Sunday, December 15, 2019
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Haryana

FARIDABAD-कमिश्नर ने चालान को गठित 3 दस्ते किए भंग, 12 जेई सहित 58 आउटसोर्स कर्मचारी हटाए गए

November 13, 2019 05:26 AM

COURTESY DAINIK BHASKR NOV 13
कार्रवाई : निगम के इतिहास में कर्मियों को निकालने का अबतक का यह सबसे बड़ा फैसला

नगर निगम कमिश्नर ने अवैध गतिविधियों को लेकर चालान करने के लिए गठित तीनों दस्तों को भंग कर दिया है। इसके साथ ही तीनों दस्तों में तैनात 58 कर्मियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। सभी कर्मी आउटसोर्स पर नियुक्त थे। इन कर्मियों में 12 जूनियर इंजीनियर भी शामिल हैं। जांच में सभी का काम असंतोषजनक पाया गया है। इन कर्मियों पर दस्तों के गठन के लिए निर्धारित की गई शर्तों की पालना नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया है। निगम के इतिहास में कर्मियों को हटाने का यह अबतक की सबसे बड़ी कार्रवाई है।
आउटसोर्स पर इन कर्मियों की नियुक्ति मार्केट मैनेजमेंट, होर्डिंग डिफेसमेंट और पॉलीथीन को लेकर चालान करने के लिए की गई थी। तीनों कार्यों के लिए तीन दस्ते बनाए गए थे, जिसमें जेई की अहम भूमिका सुनिश्चित की गई थी। तीनों दस्ते में चार-चार जेई नियुक्त किए गए थे। इन जेई की टीम में तीन-चार सुपरवाइजर और मल्टी टॉस्क वर्कर्स लगाए गए थे। इस तरह से कुल 12 जेई के साथ 10 सुपरवाइजर और 36 कर्मियों की तीन टीमें बनाई गई थी। इनमें से अधिकतर राजनीतिक सिफारिशों पर लगे हुए थे। विधानसभा चुनाव संपन्न होते ही सभी की सिफारिशें नाकाम हो गई और सभी असहाय हो गए। सिफारिशी कर्मियों को हटाने के लिए कमिश्नर ने तीनों दस्ते को ही भंग कर दिया।
कर्मियों पर दस्तों के गठन के लिए निर्धारित शर्तों नहीं मानने का आरोप
दो माह पहले कमेटी ने निगम सदन में रखी थी रिपोर्ट
निगम में सिफारिशों पर नियुक्त किए गए कर्मियों को हटाने के लिए बीते तीन महीने से आवाज उठ रही थी। आउटसोर्स पर कर्मियों की नियुक्त में गड़बड़ी की जांच के लिए गठित कमेटी ने बीते 6 सितंबर को निगम सदन की बैठक में अपनी रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें कर्मियों की नियुक्त को लेकर भारी भ्रष्टाचार उजागर किया गया था। 124 पन्नों की रिपोर्ट में कमेटी ने खुलासा किया था कि निगम में लगभग 90 फीसदी कर्मी योग्यता एवं कुशलता पर नहीं, बल्कि मंत्री, सांसद और विधायकों की सिफारिशें पर भर्ती किए गए हैं। निगम में इनकी कोई जवाबदेही नहीं है। इंफोर्समेंट टीम में लगे कर्मी उगाही पर अधिक जोर दे रहे हैं। आवश्यकता नहीं होने के बावजूद इन कर्मियों निगम द्वारा नियमित रूप से सैलरी दी जा रही है। कमेटी ने सभी फर्जी व फालतू कर्मियों की सैलरी का भुगतान बंद करने की मेयर मधु आजाद और कमिश्नर अमित खत्री से सिफारिश की थी। साथ ही चेतावनी दी कि यदि इनकी सेवा समाप्त नहीं की कई तो कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।
कमेटी ने यह सिफारिश की थी
कमेटी के चेयरमैन व वार्ड 34 के पार्षद आरएस राठी का कहना है कि जांच में 1950 कर्मियों के खिलाफ केवल 1600 कर्मी ही मिले, जिसमें से लगभग सभी के सभी सिफारिशी हैं। भर्ती से पहले न तो व्यवस्थित ढंग से कोई इंटरव्यू होता है और न ही योग्यता देखी जाती है। जांच फार्म में रेफरेंस का भी एक कॉलम था, जिसमें सामने आया कि अधिकतर भर्ती प्रदेश सरकार के 4-5 बड़े मंत्री, क्षेत्रीय विधायक, सांसद, आईएएस व निगम अधिकारियों की पर्ची पर हुई हैं। हालांकि, अभी भी बड़े पैमाने पर फर्जी कर्मी सेलरी ले रहे हैं। कई अधिकारिक पदों पर भी आउटसोर्स पर घर बैठे वेतन ले रहे सेवानिवृत अधिकारियों की सेवा समाप्त करने की सिफारिश की गई है। सिख समुदाय
आगे यह होगी कार्रवाई
कमिश्नर ने कहा है कि इन कर्मियों के नोडल तथा चालान बुक जारी करने वाले अधिकारी ड्यूटी अवधि में जारी किए गए सभी चालानों की राशि का ब्यौरा देना सुनिश्चित करें और बिना जारी किए गए चालान बुक को जमा करवाएं। निकाले कर्मियों से एनओसी लेने के बाद ही लंबित वेतन दें।
काम ठीक नहीं था:अत्री
कमिश्नर अमित खत्री ने स्पष्ट किया कि तीनों दस्तों में आउटसोर्स पर लगे इन कर्मियों का काम संतोषजनक नहीं था। दस्ते के गठन के समय निर्धारित शर्तों की पालना नहीं करने पर इन तीनों दस्तों को भंग करने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही इन दस्तों में लगे सभी आउटसोर्स कर्मियों की सेवाएं तत्काल समाप्त की गई है।

 
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