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Haryana

मंत्रियों का चयन BJP-JJP के लिए बनी बड़ी चुनौती

November 09, 2019 05:37 AM

COURTESY NBT NOV 9
•सुरेन्द्र कुमार, जींद

 

मंत्रियों का चयन बीजेपी के लिए बड़ी सिरदर्दी बन गया है। गठबंधन की सरकार में क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को एक साथ साधना बेहद कठिन हो गया है। पिछली बार मंत्रियों की नियुक्ति में बीजेपी को कोई परेशानी नहीं आई थी लेकिन इस बार गठबंधन सहयोगी जेजेपी और निर्दलीय विधायकों को एक साथ साधने की रणनीति बीजेपी के समीकरणों पर भारी पड़ रही है। सूत्रों के अनुसार, बीजेपी के लिए अपने 40 विधायकों को समायोजित करना बड़ी चुनौती बनती जा रही है। 3 से 4 मंत्री पद जेजेपी के लिए छोड़ने और निर्दलीय विधायकों को साथ जोड़े रखने के लिए 1-2 मंत्री बनाने की सोच के कारण बीजेपी के पास अपने कोटे के 6-7 मंत्री पद ही बचते हैं। पिछली बार से आधी संख्या में पूरे प्रदेश के सभी हिस्सों और सभी बड़ी जातियों को समायोजित करना बीजेपी के लिए आसान नहीं है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इसी कारण मंत्रिमंडल के विस्तार में देरी हो रही है। बीजेपी को पिछली बार के मुकाबले आधे मंत्री पद ही मिल रहे हैं। खट्टर मंत्रिमंडल के 10 में से 8 मंत्रियों के चुनाव हार जाने के चलते इस बार अनिल विज के अलावा बाकी नए मंत्रियों का चयन करना पार्टी के लिए मजबूरी हो गया है। आधी संख्या में पूरी हिस्सेदारी को समायोजित करना किसी भी तरह से मुमकिन नहीं है। 5 जिलों में बीजेपी का खाता भी नहीं खुला है। इसके अलावा जेजेपी के मंत्री वाले जिलों में भी बीजेपी अपने मंत्री नहीं बना पाएगी। एक तिहाई जिलों में बीजेपी को अपने मंत्रियों के बगैर ही सरकार चलानी पड़ेगी। बीजेपी के पास प्रदेश की सियासत को निर्धारित करने वाली जाट बेल्ट रोहतक, झज्जर, सोनीपत, जींद, हिसार और फतेहाबाद जिलों में सिर्फ गन्नौर से निर्मल चौधरी ही जाट विधायक बनी हैं।

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