Wednesday, August 12, 2020
Follow us on
BREAKING NEWS
मुंबईः संजय दत्त को कैंसर, हुई पुष्टिPM मोदी ने देशवासियों को ट्वीट कर दी जन्माष्टमी की शुभकामनाएंखुल गया वैष्णो देवी का दरबार, दर्शन के लिए करना होगा इन नियमों का पालनमशहूर शायर राहत इंदौरी का हार्ट अटैक से निधनहरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मुख्यमंत्री की घोषणाओं की व्यवहार्यता सम्बन्धी जानकारी तुरंत देंहरियाणा सरकार ने मुख्यमंत्री के ओएसडी, श्री सतीश कुमार, को रोहनात फ्रीडम ट्रस्ट के सचिव का कार्यभार, सौंपाहरियाणा:रिटायर्ड आईपीएस अनिल राव को सीएमओ में मिली नई जिम्मेदारीहरियाणा के गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने प्रदेशवासियों को जन्माष्टमी की बधाई एवं शुभकामनाएं दी
National

चीन के चंगुल से बचा भारत

November 06, 2019 03:42 PM

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

भारत ने थोड़ी हिम्मत दिखाई और वह चीन के चंगुल से बच निकला। पूर्वी एशिया के 16 देशों के संगठन (क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी) में यदि भारत हां में हां मिलाता रहता तो उसकी अर्थ व्यवस्था चौपट हो जाती। एसियान के 10 देशों और चीन, जापान, द.कोरिया, आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ने बैंकाक में मिलकर फैसला किया है कि वे भारत समेत इन 16 देशों का मुक्त व्यापार का एक साझा बाजार बनाएंगे याने यह दुनिया का सबसे बड़ा साझा बाजार होगा। विश्व व्यापार का एक-तिहाई हिस्सा इसी बाजार में होगा। लगभग साढ़े तीन अरब लोग इन्हीं देशों में रहते हैं। इन देशों के बीच अब जो भी व्यापार होगा, उसमें से 90 प्रतिशत तक चीज़ें ऐसी होंगी, जिन पर कोई तटकर नहीं लगेगा। वे एक-दूसरे से चीजें मंगाकर तीसरे देशों को भी निर्यात कर सकेंगे। भारत ने इस संगठन का बहिष्कार कर दिया, क्योंकि वह भारतीय बाजारों पर चीन का कब्जा नहीं होने देना चाहता है। चीन में मजदूरी सस्ती है और उत्पादन पर सरकारी नियंत्रण है। वह अपने माल को खपाने के खातिर इतना सस्ता कर देगा कि उसके मुकाबले भारत के उद्योग-धंधों और व्यापार का भट्ठा बैठ जाएगा। अभी तो चीन भारत को 60 अरब डाॅलर का निर्यात ज्यादा कर रहा है, यदि भारत इस समझौते को मान लेता तो यह घाटा 200-300 अरब तक चला जा सकता था। चीन का व्यापार अमेरिका से आजकल बहुत घट गया है। अब उसके निशाने पर भारत ही है। भारत ने इस समझौते से हाथ धो लिये, इससे उसे ज्यादा नुकसान नहीं होगा, क्योंकि एसियान के कई देशों के साथ उसके द्विपक्षीय व्यापारिक समझौते पहले से हैं और चीन से भी हैं। भारत के इस साहसिक कदम पर विपक्षी दल इसलिए आक्षेप कर रहे हैं कि कुछ मंत्रियों ने इस समझौते पर जरुरत से ज्यादा आशावादिता दिखा दी थी। इस सारे मामले में अब भी आशा की किरण दिखाई पड़ रही है। वह यह है कि इन सभी देशों ने जो संयुक्त वक्तव्य जारी किया है, उसमें भारत को समझाने-पटाने के दरवाजे खुले रखे हैं। यहां मुझे यही कहना है कि भारत का उक्त कदम तात्कालिक दृष्टि से तो ठीक है लेकिन क्या हमारी सरकारें कभी अपनी शिथिलताओं पर भी गौर करेंगी ? क्या यह शर्म की बात नहीं है कि आजादी के 72 साल बाद भी हम इतने पिछड़े हुए हैं कि हम चीन के आर्थिक हमले से डरे रहते हैं ?

Have something to say? Post your comment
More National News
PM मोदी ने देशवासियों को ट्वीट कर दी जन्माष्टमी की शुभकामनाएं
मशहूर शायर राहत इंदौरी का हार्ट अटैक से निधन
पीएम मोदी बोले- गृह मंत्री के नेतृत्व में दिल्ली के लिए रणनीति बनाई, उम्मीद के अनुसार नतीजे आए 24 अगस्त को होने वाले राज्यसभा उपचुनाव में जयप्रकाश निषाद होंगे बीजेपी उम्मीदवार पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की हालत गंभीर, दिल्ली के आर्मी अस्पताल में हैं भर्ती कोरोना: मुंबई, दिल्ली, पुणे से कोलकाता आने वाली सभी फ्लाइट पर 31 अगस्त तक रोक बागपत: बीजेपी के पूर्व जिलाध्यक्ष संजय खोखर की गोली मारकर हत्या कोलकाताः दिल्ली, मुंबई समेत 6 शहरों की उड़ान पर 31 अगस्त तक रोक अंडमान निकोबार में एक हफ्ते के लिए बढ़ा लॉकडाउन, जारी रहेंगी सीमित उड़ानें PM मोदी ने बाढ़ प्रभावित 6 राज्यों के CM के साथ की समीक्षा बैठक