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चीनी राज्य मेंे स्कूली बच्चों के लिए 10 बजे सोना अनिवार्य, भले ही होमवर्क पूरा न हो; पैरेंट्स ने इसे कर्फ्यू बताया

November 02, 2019 05:35 AM

COURTESY DAINIK BHASKAR NOV 2

 : झेजियांग प्रांत के शिक्षा विभाग ने जारी किया 33 सूत्री एजेंडा, माता-पिता विरोध में

चीन के झेजियांग प्रांत में इन दिनों एक निर्देश को लेकर बहस छिड़ी है। वजह है स्कूली बच्चों के जारी किए गए नए दिशा-निर्देश, जिनमें होमवर्क से ऊपर सोने के समय को तवज्जो दी गई है।
दरअसल, यहां स्कूली बच्चों के लिए लागू किए गए नए नियम के तहत यहां सभी बच्चों को 10 बजे से पहले सोना अनिवार्य कर दिया गया है। प्राइमरी स्कूलों के छात्रों के लिए बिस्तर पर जाने का समय 9 बजे सुझाया गया है। ऐसा वो तब भी कर सकते हैं, जबकि उनका होमवर्क पूरा न हुआ हो। पैरेंट्स इसकी आलोचना कर रहे हैं। उन्होंने इसे 'होमवर्क कर्फ्यू' का नाम दिया है। माता-पिता का तर्क है कि इससे बच्चे प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाएंगे। पूर्वी झेजियांग प्रांत के शिक्षा विभाग ने बाकायदा 33 बिंदुओं वाला दिशा-निर्देश मसौदा प्रकाशित किया है। इसमें छात्रों के लिए अभिभावकों की अनुमति से एक आदर्श समय पर सो जाने का सुझाव है। चाहे स्कूल से दिया गया काम उन्होंने पूरा ना किया हो। इसमें परिजनों को सुझाव दिया गया है कि दूसरों से के साथ प्रतिस्पर्धा न करें। इसके अलावा सलाह दी गई है कि वीकेंड और छुटि्टयों के दौरान बच्चों से अतिरिक्त पढ़ाई न करवाई जाए। चीन में स्कूली पढ़ाई के अलावा माता-पिता द्वारा अतिरिक्त गतिविधियों में भी बच्चों को हिस्सेदार बनाया जाता है। पैरेंट्स बच्चों पर पढ़ाई का दबाव इसलिए बनाते हैं, क्योंकि चीन की यूनिवर्सिटी में प्रवेश के लिए गाओकाओ परीक्षा देनी पड़ती है। यह सबसे कठिन परीक्षा मानी जाती है। यूनिवर्सिटी में प्रवेश का एकमात्र यही रास्ता है। इसलिए माता-पिता स्कूल से ही बच्चों पर ज्यादा दबाव बनाते हैं।
अभिभावकों को बच्चों के पढ़ाई में पिछड़ने की चिंता: अभिभावकों की बड़ी चिंता यह है कि बच्चों पर होमवर्क का भार कम होने से वह प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाएंगे। उनका कहना है कि आज का दौर परीक्षा आधारित है, इसलिए बच्चों को रिलैक्स नहीं रहने दिया जा सकता। सोशल मीडिया पर पैरेंट्स नाराजगी जता रहे हैं, कह रहे हैं कि इस तरह के नियमों को वापस लिया जाना चाहिए।

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