Friday, November 22, 2019
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पिंक पर्ची का नया अर्थ-महिलाओं के लिए डी.टी.सी. में मुफ्त यात्रा

October 30, 2019 04:31 PM







महिलाओं के लिए डी.टी.सी. में मुफ्त  यात्रा का औचित्य

पिंक पर्ची का नया अर्थ - फिलहाल दिल्ली की सरकारी बसों में मुफत यात्रा के लिए दी गयी पर्ची के लिए प्रयोग हो रहा है जबकि पहले आम व्यक्ति के लिए पिंक पर्ची का मतलब रोजगार  छूटने पर दी जाने वाली पर्ची के लिए किया जाता रहा है । दिल्ली सरकार का यह निर्णय केवल मनलुभावन लोकप्रिय वोट इक्ट्ठे करने के तरीके की बजाय, इसको नारीसशक्तिकरण तथा समाज में समानता व न्याय की दृष्टि से भी इसका मूल्यांकन होना चाहिए । दो प्रश्न उठते है - पहला यह कि बसों में यात्रा समाज का कौन सा वर्ग करता है । अर्थात आर्थिक दृष्टि से गरीब व निम्न मध्यमवर्ग काम पर आने जाने, स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए तथा अन्य कारणों से गतिशीलता के लिए डीटीसी की बसों का प्रयोग करता है । एक सर्वेक्षण के अनुसार महिलाए जो कार्यरत है अर्थात सक्रिय रूप से श्रम बाजार का हिस्सा है, 90 प्रतिशत से अधिक केवल 10000 रूपये तक ही कमा पाती है । उनकी आय का बड़ा हिस्सा आने जाने में खर्च हो जाता है । दूसरा प्रश्न डीटीसी बसों में यात्रा करने वालनी महिलायों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है, उसके लिए यह तर्क दिया जा रहा है कि बसें जब भरी हुई होंगी तो निर्भया कांड जैसी अमानवीय घटनाओं को भी रोका जा सकेगा, हालांकि सरकार द्वारा सुरक्षा को पुख्ता बनाने के लिए बसों में मार्शल भी तैनात किए गये है । यह कदम औरतों को स्वावलंबी बनाने, इंसाफ की लड़ाई अर्थात समाजिक न्याय की दृष्टि  से भी महत्वपूर्ण है  । छोटे छोटे राजगार, दूसरों के घर काम करने वाली महिलाएं न केवल अपने बजट में से ट्रांसपोर्ट पर किया जाने पर खर्च बचा पायेगी अपितु स्वास्थ्य लाभ के लिए विभिन्न दूर-दूर फैली स्वास्थ्य सुविधाओं का भी लाभ उठा पायेगी । न केवल उनकी गतिशीलता बढेगी उनकी कार्यकुशलता भी बढेगी तथा कार्यअवधि को बढा कर ज्यादा कमा भी पायेगी । उदाहरण के लिए 10 रूपये या 15 रूपये का किराया, अर्थाभाव के कारण, वे बस पर न जा, पैदल या अपने साईकल पर जाती थाी, अब मुफ्त  सेवा का लाभ उठा समय व खर्च की बचत कर पायेगी । अगर इस निर्णय को एक आम महिला की दृष्टि से देखे तो यह निर्णय उनकी रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ सकुन ला सकेगा तथा उनकी आपाधापी से भरी जिंदगी सहज व सरल बना सकेगा । स्वास्थ्य और स्वावलंबन के लिए भी यह कदम उपयोगी सिद्ध होगा ।
                हांलाकि कई लोग दिल्ली सरकार के इस निर्णय पर सवालिया निशान लगा रहे है कि सरकार को बसों की संख्या तथा उनकी आवाजावी अर्थात उनकी आवृत्ति बारंबारता बढाने पर जोर दिया जाना चाहिए । बसें समय पर उपलब्ध हो तथा प्रतीक्षारत समय कम होना चाहिए, उससे सार्वजनिक टृांसपोर्ट विशेष  कर बसे लोग उपयोग में जायेंगे, निजीवाहनों का प्रयोग कम होने से प्रदूषण, शोर तथा ट्रैफिक अव्यवस्थाओं से भी निपटा जा सकेगा । इंफ्रास्ट्रªक्चर की कमी को सरकार अलग नजरिये से देख रही है तथा डीटीसी को आर्थिक रूप् से सबल और लाभकारी बनाने के बजायउसे कमजोर बना रही है । यहां यह बतनाना जरूरी है कि दिल्ली सरकार ने डीटीसी की इस मुफ्त  सेवा के बदले आने वाले खर्च की भरपाई का आश्वासन दिया है । भैया दूज के दिन दिल्ली में शुरू की गई इस मुफ्त  सेवा का लाभ पहले ही दिन चार बजे तक कुल 6.76 लाख यात्रियों में से 2.20 लाख महिलाओं ने लाभ उठाया । अगर यह कामयाव रहती है तो दिल्ली सरकार इसे सारे विधार्थियों तथासीनियर सिटीजन्स के लिए भी लागू करेगी । कुछ लोग इसे केवल एक दिन केवल भैया दूज के लिए ही समझ रहे थे, कुछ इसे केवल चुनावी हथकंडा बता रहे है कि दिल्ली के चुनावों में चार-पांच महीने जो बचे है तब तक मुफ्त   बस सेवा महिलाओं को देकर उनके वोट के लिए किया जा रहा है । कल्याणकारी सरकारें अधिकतम लाभ अधिकतम लोगांे तक पहुंचे के सिद्धान्त पर ऐसा करती है तो यह अनुकरणीय है । कुछ भी हो आम महिला के लिए यह कदम दिल्ली सरकार का साहसिक कदम कहा जा सकता है । महिलाओं के स्वावलंबन, सशक्तिकरण तथा समाज में उन्हें आगे लाने, आर्थिक दृष्टि से वो सम्पन्न बन समाज की मुख्यधारा   से जुड़े, उसके लिए सराहनीय कदम है । अंत में, ’’ दिल के लिए क्या यह सवाल काफी नहीं, माना कि इस जहान को गुलजार न कर सके हम, दो चार खार कम कर दिए, गुजरे जिस जहा से हम ।
 
डा.क.कली 

 
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