Friday, November 22, 2019
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Haryana

हरियाणा में चुनाव परिणामों पर विश्लेषण

October 25, 2019 04:52 PM

हरियाणा में चुनाव परिणामों पर विश्लेषण  

हरियाणा में चुनाव नतीजों ने न केवल चैकाया है, अपितु हरियाणा का वोटर्स कितना मनमौजी है तथा परिपक्व भी है, इसको भी प्रत्यक्ष किया है । भारतीय जनता पार्टी जो केवल पांच महीने पहले लोकसभा की दस में से दस सीट जीत लेती है, वही विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा भी नहीं पार कर पाती। सीटों के साथ सबसे बड़ी संख्या वाली पार्टी तो बनती है, पर उसके लगभग सारे बड़े बड़े नेता, जिनके पास मंत्रीपद थे, एक-दो को छोड़कर सब हार जाते है । जनता ने विपक्ष खड़ा करने में समझदारी तो दिखाई है, लोगों ने स्थानीय मुद्दों तथा स्थानीय नेताओं की जोर जुगत को पुरस्कृत कर मिलाजुला जनादेश दिया है । ’’आय राम, गया राम’’ की दलबदलू छवि वाला छोटा सा राज्य हरियाणा राजनैतिक दृष्टि से सदैव महत्वपूर्ण रहा है, एक तो राजधानी दिल्ली से इसकी समीपपता तथा केन्द्रीय सरकार की छ़त्रछाया में पलने के कारण राजनीति के गलियारों में trend setter की भूमिका में रहा है । इन चुनावी परिणामों से एक निष्कर्ष तो ये निकलता है कि भारतीय जनता विपक्ष की भूमिका के महत्व को समझती है, विपक्ष जोकि कमजोर बंटा हुआ, निक्कमा-नकारा नजर आता है और मोदी और भाजपा लगातार विजयरथ पर सवार थे और सत्तापक्ष की विकल्पहीनता अर्थात लोगों केपास भाजपाको चुनने केइलावा कोई विकल्प नहीं था, इस व्याख्या और मान्यताको इन परिणामों ने ध्वस्त कर दिया है । क्षेत्रीय राजनीति में नेताओं का युग फिर से सामने आया है । दुष्यंत चैटाला की जननायक जनता पार्टी - जेजेपी- ने जमीन पकड़ी है तथा 10 सीटों के साथ वे केन्द्रिय भूमिका में आ गये है । राज्य स्तरों पर मल्टी पार्टी प्रणाली तथा केन्द्र स्तर पर दो मुख्य पार्टी वाली प्रणाली, लगता है, राजनैतिक  परिदृष्य पर, आने वाले समय में दिखाई देगी । सत्ता पर अंकुश लगाने के लिए सशक्त व सक्षम विपक्ष - जोकि उसकी जनता के मुद्दों के प्रति असंवेदनशीलता,क्रूरता और उसकी मनमानी को रोक सके, लोकतंत्र की प्रभावशीलता को स्थायी रखने के लिए हस्तक्षेप कर सही दिषा दे सके, जरूरत थी तथा इस चुनावी परिणाम ने इस दृष्टि से सार्थक परिणाम दिये है । हालांकि राजनेता तो राजनेता है, चाहे वो सत्ता में हैं या विपक्ष में, स्वार्थपरता, नैतिक गैरजिम्मेदारी और भ्रश्टाचार से लिप्त, जनसेवा, लोक सेवा, सर्वजनहिताय सर्वजनसुखाय के सथान पर अपने हितों की पूर्ति करते रहते हैं, उनके बारे में पंजाबी कहावत प्रसिद्ध है कि ’’लड़न-भिड़न नूं वखो वख, खाण पिण नू इकटठे’’ अर्थात राजनेता तो एक ही थैली के चट्टे-बट्टे होते हैं, अपने को सत्ता में लाने, सत्ता का सुख भोगने में माहिर होते हैं । देश व समाज व आम जनता तो मात्र वोटर्स है, वोट देने के बाद ही जनता परिदृष्य से बाहर हो जाती है, असली लोकतंत्र तो उसके बाद शुरू होता है । आशा करते है कि सरकार बनने के बाद विपक्ष अपनी रचनात्मक भूमिका का निर्वाह करेगा तथा सत्तासीन पर, उनके निर्णयों, नीतियों पर अंकुश लगा बेहतरी और विश्वसनीयता की ओर कदम बढायेगा, अंत में, आज इस तरफ लोकतंत्र की नयी फसलेबहार आयी है, विपक्ष सरोकारी व साकारात्मक रोल अदा करे, ऐसी शुभकामनाएं करते है ।

 

      डा.क.कली 

 
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