Friday, November 22, 2019
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Haryana

भाजपा के चार महारथियों की राजनैतिक प्रतिष्ठा दांव पर लगी

October 20, 2019 09:05 AM

ईश्वर धामु (चंडीगढ़): हरियाणा विधानसभा चुनाव में भाजपा का 75 पार का नारा दम तोड़ता नजर आने लगा है। भाजपा ने लोकसभा चुनाव में 78 सीटों पर बढ़त हासिल की थी तो उसी को देखते हुए भाजपा आलाकमान ने 75 सीटों का लक्ष्य रखा था। भाजपा को करनाल, जहां से मुख्यमंत्री मनोहरलाल खुद चुनावी मैदान में है, को छोड़ कर हर जगह कड़ी चुनौती मिल रही है। कहीं सीधा तो कहीं तिकोने मुकाबले में भाजपा उलझी हुई है। भाजपा के चार दिज्गज शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा, वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु, कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ और प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला अपने-अपने क्षेत्रों में कड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। जबकि चुनाव में ये स्टार प्रचारक थे। लेकिन चुनाव में इनकी हालत यह बनी हुई है कि यें सब अपना चुनाव क्षेत्र चाह कर भी नहीं छोड़ सकते। महेंद्रगढ़ से पांच बार चुनाव जीतने वाले भाजपा के कद्दावर नेता राम बिलास शर्मा को कांग्रेस के राव दानसिंह कड़ी चुनैती दे रहे हैं। रावदान सिंह भी महेन्द्रगढ़ से तीन बार विधायक रह चुके हैं। पिछले 2014 के चुनाव में चली कांग्रेस विरोधी लहर में वें रामबिलास शर्मा से 34 हजार 491 वोटों से चुनाव हार गए थे। उस समय राम बिलास शर्मा को 83 हजार 724 वोट मिले थे तो राव दान सिंह को 49 हजार 233 वोट मिले थे। राम बिलास शर्मा और राव दानसिंह का पहला मुकाबला 1996 में हुआ था। पर राव दान सिंह को पहली जीत 2000 के चुनाव में मिली थी। उन्होने राम बिलास शर्मा को 38850 वोटों से हराया था। अब इस 2019 के चुनाव में दोनो में ही सीधा मुकाबला है। यंहा से राव रमेश पालड़ी जेजेपी के प्रत्याशी हैं। यंहा से राव दानसिंह इस बार अपनी जीत के प्रति आश्वस्त दिखाई दे रहे हैं। इसी तरह भाजपा का जाट चेहरा कैप्टन अभिमन्यु अपने चुनाव क्षेत्र नारनौंद में बुरी तरह से फंसे हुए हैं। उनका इस बार सीधा मुकाबला जेजेपी के रामकुमार गौतम से है। रोहतक से लोकसभा के दो चुनाव हारने के बाद कैप्टन अभिमन्यु ने जाट प्रभावी क्षेत्र नारनौंद से 2014 का विधानसभा का चुनाव जीता था। उन्होने 2014 के चुनाव में इनेलो के राजसिंह मोर को 5761 वोटों से हराया था। परन्तु इस बार उनको कांग्रेस के बलजीत सिहाग और जेजेपी के रामकुमार गौतम से सीधी चुनौती मिल रही है। रामकुमार गौतम नारनौंद से भाजपा की टिकट से 2005 में विजयी रहे थे। उन्होने इनेलो की सरोज मोर को 1399 वोटों से हराया था। पर इस बार वें जेजेपी की टिकट से प्रत्याशी हैं। इस बार के लोकसभा चुनाव में नारनौंद से कांग्रेस प्रत्याशी भव्य बिश्रोई ने भाजपा के बिजेन्द्र सिंह को 3030 वोटों से हराया था। इसलिए इस बार सभी की नजरे नारनौंद के चुनाव परिणामों पर लगी हुई है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला को  अपने चुनाव क्षेत्र टोहाना में जेजेपी प्रत्याशी देवेन्द्र बबली कड़ी चुनौती दे रहे हैं। लेकिन यंहा से कांग्रेस प्रत्याशी परमवीर सिंह भी कमजोर पोजिशन में नहीं है। सुभाष बराला ने 2014 का चुनाव इनेलो के निशान सिंह को 6906 वोटों से हरा कर जीता था। वहीं परमवीर सिंह 2005 और 2009 में टोहना विधायक रहे हैं। वहीं भाजपा का बड़ा और प्रभावी जाट चेहरा ओम प्रकाश धनखड़ बादली क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी कुलदीप वत्स की चुनौती में फंसे हुए हैं। धनखड़ ने बादली से 2014 में पहला चुनाव जीता था। उन्होने कुलदीप वत्स को 9266 वोटों से हराया था। धनखड़ को इस चुनाव में 41 हजार 549 वोट मिले थे। लेकिन इस बार उनकी जीत की राह आसान नहीं दिखाई पड़ रही है। उनका चुनाव क्षेत्र बादली से लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी दीपेन्द्र्र हुुड्डा ने भाजपा के अरविंद शर्मा से 14 हजार 871 वोट अधिक पाए थे। इसके बाद कांग्रेस के होंसले बढ़ गए हैं। कुलदीप वत्स ने भी 2014 के चुनाव में 32 हजार 283 वोट प्राप्त किए थे। इस बार उनको अपने ब्राह्मण समाज पर भरोसा है तो धनखड़ को जाट वोटों पर विश्वास है। यंहा यह बताना भी होगा कि इन चार प्रत्याशियों में से तीन ओम प्रकाश धनखड़, कैप्टन अभिमन्यु और राम बिलास शर्मा मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल थे। परन्तु भाजपा ने पहला चुनाव लडऩे वाले मनोहरलाल को मुख्यमंत्री बना दिया था। अब देखना होगा कि भाजपा के इन चार दिज्गज नेताओं में से कितने चुनाव जीत कर विधानसभा पहुंचते हैं? 

 
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