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Editorial

DAINIK BHASKR EDIT- हरियाणा चुनावों में हलकान महिला नेताओं की भागीदारी

October 12, 2019 06:22 AM

COURDTESY DAINIK BHASKAR OCT 12

बेटियों की घटती संख्या के लिए पूरे देश में कुख्यात इस राज्य में पहली बार लड़कियों का आंकड़ा 900 पार गया है। 1000 बेटों पर 900 बेटियों का यह आंकड़ा पिछले चार सालों की उन कोशिशों का नतीजा है जिसमें इंटेलिजेंस का सहारा लेना तक शामिल है। हरियाणा में इसी महीने चुनाव होना है। प्रधानमंत्री मोदी ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा इसी राज्य से दिया था, लेकिन उनकी पार्टी ने इस बार के हरियाणा विधानसभा चुनावों में महिला उम्मीदवारों के टिकट कम कर दिए हैं। महिलाओं के टिकट तो बाकी दोनों प्रमुख पार्टियों कांग्रेस और आईएनएलडी ने भी घटाए ही हैं। इस बार सबसे ज्यादा आईएनएलडी ने 15, भाजपा ने 12 और कांग्रेस ने 9 और पहली बार चुनाव लड़ने जा रही पार्टी जेजेपी ने 7, स्वराज इंडिया ने 5 और आम आदमी पार्टी ने 3 महिलाओं को चुनाव में खड़ा किया है। 2014 के चुनावों में आईएनएलडी ने 16, भाजपा ने 15 और कांग्रेस ने 10 महिला नेताओं को टिकट दिए थे। भाजपा ने तो अपनी चार महिला विधायकों को इस बार घर बैठने का इशारा किया है। इनमें डिप्टी स्पीकर संतोष यादव और पटौदी, पानीपत की विधायक शामिल हैं। कारण भले यह बताया गया हो कि इन नेताओं के जीतने की उम्मीद कम थी, क्योंकि स्थानीय स्तर पर उनका विरोध हो रहा था, लेकिन सवाल बस यही है कि इन चार के बदले जिन्हें चुना गया उनमें एक भी महिला क्यों नहीं? वैसे बता दें कि पिछले चुनावों में भाजपा की 15 में से आठ उम्मीदवार जीती थीं। जीतीं तो हरियाणा के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों बंसीलाल, भजनलाल और ओपी चौटाला की बहुएं भी थीं। तो क्या महिला नेताओं की जीत के लिए उनका किसी राजनीतिक परिवार से ताल्लुक या सेलेब्रिटी होना जरूरी है? भाजपा के टिकट पर इस बार बबीता फोगट और सोनाली फोगट लड़ रही हैं। एक खिलाड़ी तो दूसरी टिकटॉक स्टार है। हरियाणा की बेटियां भ्रूण हत्या से भले बच जाए,ं लेकिन नीति निर्धारण करने वाले नेताओं की जमात में वजूद की लड़ाई के लिए महिलाओं को अभी कई साल और संघर्ष करना होगा। यह तब जब यहां की बेटियों ने खेल की दुनिया में जो कर दिखाया है वह काबिले तारीफ है। लेकिन अगले दो हफ्तों में देखना यह होगा कि इस बार चुनावों के दंगल में उतरी 51 महिलाओं में से कितनी विधानसभा तक पहुंचने में सफल हो पाती

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