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सरकारी खजाने के लिए लाखों करोड़ की चुनौतियां, फिर भी बांटीं खुशियां

September 21, 2019 06:29 AM

COURTESY NBT SEPT 21

सरकारी खजाने के लिए लाखों करोड़ की चुनौतियां, फिर भी बांटीं खुशियां


HDFC बैंक की अर्थशास्त्री साक्षी गुप्ता ने बताया, ‘GST कलेक्शन में कमी से सरकारी खजाने पर पहले से दबाव है। कॉरपोरेट टैक्स में कटौती से प्रेशर और बढ़ेगा।

हालांकि रिजर्व बैंक से मिले 1.76 लाख करोड़ की रकम से फिस्कल डेफिसिट को कम रखने में मदद मिल सकती है। सरकार ने बजट में रिजर्व बैंक से 90 हजार करोड़ रुपये मिलने का अनुमान लगाया था, लेकिन उसे 58 हजार करोड़ रुपये अधिक मिले हैं। केंद्र विनिवेश से भी पैसा जुटाएगा।
RBI के पैसे

से मिलेगी मदद• ईटी ब्यूरो, नई दिल्ली

 

सरकार के कॉरपोरेट टैक्स में कटौती से भारत का राजकोषीय घाटा (सरकार की आमदनी से अधिक खर्च) वित्त वर्ष 2020 में ग्रॉस डोमेस्टिक प्रॉडक्ट (GDP) के 4 फीसदी तक पहुंच सकता है, जो बजट में तय लक्ष्य से 0.70 प्रतिशत अधिक है। अगर ऐसा हुआ तो उससे ब्याज दरों में बढ़ोतरी होगी क्योंकि सरकार को इस घाटे को पाटने के लिए बाजार से अधिक कर्ज लेना पड़ेगा। टैक्स में कटौती से सरकार को 1.45 लाख करोड़ की आमदनी से हाथ धोना पड़ेगा। इस वजह से शुक्रवार को बॉन्ड यील्ड में 0.15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। केंद्र ने बजट में कहा था कि वित्त वर्ष 2020 में फिस्कल डेफिसिट GDP के 3.3 प्रतिशत तक रह सकता है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी कहा कि सरकार को टैक्स में कटौती से फिस्कल डेफिसिट पर संभावित असर का अहसास है। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि राहत उपायों से टैक्स कलेक्शन में बढ़ोतरी हो सकती है। उन्होंने कहा, ‘इससे अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ेगी, जिससे आमदनी और टैक्स कलेक्शन में इजाफा होगा। कॉरपोरेट टैक्स में जो कटौती की गई है, उससे इसका भुगतान करने वाली कंपनियों की संख्या भी बढ़ने की उम्मीद है। इसलिए हम टैक्स कलेक्शन पर इस कदम के पॉजिटिव असर की उम्मीद कर रहे हैं।’
वित्त मंत्री ने कहा, कटौती से खुश होकर टैक्स देने वाली कंपनियां बढ़ेंगी
आगे की राह

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