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GURGAON- रैपिड मेट्रो: अभी रोज हैं 58 हजार सवारियां, घाटे से फायदे में आने के लिए 42 हजार और बढ़ानी होंगी

September 17, 2019 06:45 AM

COURTESY DAINIK BHASKR SEP 17
रैपिड मेट्रो: अभी रोज हैं 58 हजार सवारियां, घाटे से फायदे में आने के लिए 42 हजार और बढ़ानी होंगी
फैसला आज : नए शहर में 12 किलोमीटर में रैपिड मेट्रो के परिचालन के 9 बिंदुओं पर हाईकोर्ट करेगा निर्णय

रैपिड मेट्रो के परिचालन को लेकर कंपनी और सरकार पक्ष के बीच चल रहे झगड़े में मंगलवार को नौ साल पुरानी रैपिड मेट्रो के भविष्य को लेकर कुल 9 बिंदुओं पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्टका फैसला आ सकता है। अगर इसके परिचालन की जिम्मेवारी सरकार को मिली तो फायदे में आने के लिए अभी की करीब 58 हजार सवारियों को 1 लाख तक पहुंचाना होगा। सरकार को इसके परिचालन में प्रतिदिन हो रहे 40 लाख रुपए के घाटे व कर्ज की 2800 करोड़ रुपए की भरपाई का भी बोझ उठाना पड़ेगा। कुल 12 किलोमीटर लंबी रैपिड मेट्रो रेल के परिचालन को लेकर रैपिड मेट्रो रेल गुड़गांव लिमिटेड (आरएमजीएल) और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के बीच समझौता रद्द हो चुका है। दोनों में इसके परिचालन की जिम्मेवारी को लेकर खींचतान चल रही है।
क्या है विवाद
आरएमजीएल और एचएसवीपी के बीच पहले फेज के लिए 3 जनवरी 2009 और दूसरे फेज के लिए 3 जनवरी 2013 में समझौता हुआ था। समझौता रद्द होने के बाद अब झगड़ा इसके परिचालन की जिम्मेवारी को लेकर है। आरएमजीएल इसके परिचालन के लिए तैयार नहीं है। कंपनी इसकी इसकी जिम्मेवारी सरकार को सौंपना चाहती है। इधर सरकार इसका परिचालन करने को है। अब झगड़ा लंबित कर्ज राशि को लेकर है। कंपनी कुल 3600 करोड़ रुपए का कर्ज बता रही है। जिसमें 2200 करोड़ का बैंक लोन, 1200 करोड़ की इक्विटी और 200 करोड़ रुपए का ब्याज शामिल है। इसकी 80% राशि का लगभग 2800 करोड़ रुपए की भरपाई के लिए सरकार पर दावा कर रही है। कंपनी का तर्क है कि इस एग्रीमेंट को सरकार ने तोड़ा है, इसलिए शर्तों के अनुसार लंबित कर्ज की भरपाई सरकार करेगी।
रैपिड मेट्रो के परिचलन पर आरएमजीएल और एचएसवीपी के बीच रद्द हो चुका है समझौता
कुल 9 बिंदुओं पर आना है फैसला
1. एचएसवीपी को प्रोजेक्ट सौंपने के लिए टाइम बांड क्या होगा।
2. इस प्रोजेक्ट को लेने के लिए एचएसवीपी की प्रतिबद्धता क्या होगा।
3. लंबित कर्ज की 80 फीसदी की राशि का एचएसवीपी द्वारा आरएमजीएल को किस तरह से भुगतान किया जाएगा।
4. तत्काल हेंडओवर करने के संबंध में।
5. आगे आरएमजीएल के लिए एजेंडा के तौर पर एचएसवीपी काम कर सकती है क्या।
6. इस पर एचएसवीपी की लागत और आमदनी क्या होगी।
7. इसमें थर्ड पाटी क्लेम की क्या संभावनाएं हैं।
8. 9 सितंबर 2019 से नया एग्रीमेंट क्या होगा।
9. एचएसवीपी द्वारा निहित प्रमाणपत्र सौंपना होगा।

गुड़गांव. नए शहर में चल रही रेपिड मेट्रो।
घाटा: संचालन पर 5 करोड़ खर्च, किराए से 4 करोड़ 60 लाख की आय
डीएलएफ फेज-2 में छह स्टेशन के तहत रैपिड मेट्रो के परिचालन के लिए एचएसवीपी और आरएमजीएल के बीच 3 जनवरी 2009 में समझौता हुआ था और 2010 में इसका संचालन शुरू हो गया था। इस पर कुल 1100 करोड़ रुपए की लागत आई थी। पहले फेज में प्रतिदिन औसतन 32 हजार 100 सवारियों का लक्ष्य रखा गया था। दूसरे फेज में इसका विस्तार सेक्टर-55/56 तक किया गया, जिसके लिए वर्ष 2013 में समझौता हुआ था। कुल 5 स्टेशन को शामिल किया गया, जिस पर कुल 2400 करोड़ रुपए की लागत आई। वर्ष 2017 में इसका परिचालन शुरू हुआ। इस रूट पर प्रतिदिन कुल 26 हजार 427 सवारियों को लक्ष्य था। सुबह 6 बजे से शुरू होकर रात 12 बजे तक ट्रेनें चलती हैं। ट्रेनों में मात्र 3 कोच हैं और इसकी 7 ट्रेनें चलती हैं। कुल 11 स्टेशन अंतर्गत कुल 12 किलोमीटर की दूरी में रैपिड मेट्रो के संचालन पर प्रति माह लगभग 5 करोड़ रुपए की लागत आ रही है, जबकि सवारियों के किराए के तौर पर प्रतिदिन 4 करोड़ 60 लाख रुपए प्राप्त हो रहे हैं। कंपनी का मानना है कि इसके संचालन पर सवारी किराया के अलावा कोई आमदनी नहीं हो रही है। विज्ञापनों से आय नहीं हो रही है। ऊपर से कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है।
रैपिड मेट्रो को लाभ पहुंचाने के लिए प्रदेश सरकार आज जनता की कमाई से प्राप्त राजस्व को लुटाने की सोच रही है। रैपिड मेट्रो के मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और अब मुख्यमंत्री मनोहरलाल नियमों की अनदेखी कर कंपनी को लाभ पहुंचाने में जुटे हैं। प्रदेश सरकार कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए राइट्स के सर्वे या अनुशंसा के बिना रेपिड मेट्रो का रुट 3.2 किलोमीटर से बढ़ाकर 5 किलोमीटर कर दिया गया था, ताकि डीएलएफ क्षेत्र को फायदा मिल सके। कंपनी कर्ज की राशि गलत दर्शा रही है इसमें पारदर्शिता नहीं है। -हरींद्र ढींगरा, आरटीआई कार्यकर्ता
सवाल- रैपिड मेट्रो के परिचालन के संबंध में सरकार क्या चाहती है।
जवाब- सरकार रेपिड मेट्रो के परिचालन के लिए तैयार है। सरकार परिचालन का खर्च वहन कर सकती है, मगर कंपनी द्वारा लिए गए कर्ज की भरपाई आसान नहीं होगा। सरकार इसके पक्ष में नहीं है। हम इतनी आसानी से नहीं मानेंगे।
सवाल- रैपिड मेट्रो घाटे का सौदा होगा या लाभ का?
जवाब- इसके परिचालन के लिए सरकार लाभ हानि नहीं सोच रही। जिस तरह से सिटी बस सर्विस का परिचालन किया जा रहा है, उसी तरह से इसका भी परिचालन संभव है। इसमें 60 हजार से अधिक सवारी बढ़ाने की जरूरत है। ऊपर से विज्ञापनों से भी आमदनी का लक्ष्य होगा।
सवाल- इसके विस्तार की संभावना है क्या।
सीईओ के जवाब- फिलहाल रैपिड मेट्रो केवल उन क्षेत्रों से गुजरती है, जिन क्षेत्रों के लोग सार्वजनिक परिवाहन की बजाए निजी वाहनों में चलना पसंद करते हैं। इसलिए रैपिड मेट्रो को पुराने शहर से जोड़ने की बात चल रही थी। इसके लिए फिर से संभावनाएं तलाशना होगा।
  वी उमाशंकर, सीईओ, जीएमडीए

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