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हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड में 39 बड़े नेता बदल चुके हैं दल इन तीन राज्यों में चुनाव करीब, लेकिन वहां चल क्या रहा है?

August 25, 2019 06:12 AM

COURTESY DAINIK BHASKAR AUG 25



हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड में 39 बड़े नेता बदल चुके हैं दल
इन तीन राज्यों में चुनाव करीब, लेकिन वहां चल क्या रहा है?
यहां सबसे बड़ा नुकसान इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) को है। इनेलो के दस विधायक इस्तीफा देकर भाजपा जॉइन कर चुके हैं। हरियाणा में अक्टूबर में चुनाव प्रस्तावित है। ऐसे में माना जा रहा है कि चुनाव से पहले पार्टी बदलने वालों की सूची और लंबी हो सकती है। इनेलो से भाजपा में जाने की शुरुआत विधायक रणबीर गंगवा से हुई, जो पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के खास माने जाते थे। इसके बाद तो जैसे लाइन ही लग गई। अब तक विधायक परिमंद्र सिंह ढुल, जाकिर हुसैन, केहर सिंह रावत, बलवान सिंह दौलतपुरिया, मक्खन सिंगला, रामचंद्र कंबोज, प्रोफेसर रविंद्र बलिया और नगेंद्र भड़ाना भाजपा के झंडे तले आ चुके हैं। एक विधायक नसीम अहमद लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में शामिल हुए लेकिन बाद में उन्होंने भी भाजपा का दामन थाम लिया। इसके अलावा इनेलो नेता एवं पूर्व मंत्री जगदीश यादव, इनेलो के प्रवक्ता प्रवीण आत्रेय समेत इनेलो के अनेक नेता भी भाजपा में शामिल हुए हैं। 2014 में 19 विधायकों के साथ विधानसभा में दूसरे नंबर की पार्टी बनी इनेलो अब तीसरे नंबर की पार्टी है।
लोकसभा चुनाव से शुरू हुआ दलबदल का सिलसिला बदस्तूर जारी है। इस साल के अंत तक तीन अहम राज्यों- महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड में विधानसभा चुनाव होने हैं। तीनों ही राज्यों में मौजूदा समय में भाजपा की सरकारें हैं। यहां 37 बड़े नेता अबतक पाला बदल चुके हैं। ज्यादा फायदा भाजपा को है। मोदी लहर के कारण अधिकतर नेता भाजपा के खेमे में ही आ रहे हैं। देखिए...तीनों चुनावी राज्यों में कौन बना दलबदलू?
इनेलो के दस विधायकों सहित 12 नेता भाजपा में
9 नेता इधर से उधर, भाजपा में शामिल होने की दौड़ शुरू
विनय चतुर्वेदी|रांची
यहां ज्यादा दौड़ भाजपा में शामिल होने की है। हाल ही में हजारीबाग के कद्दावर कांग्रेसी नेता प्रदीप प्रसाद 5 हजार समर्थकों के साथ भाजपा में शामिल हुए हैं। भाजपा में शामिल होने वालों में सर्वाधिक संख्या झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) के नेताओं की है। झाविमो के पूर्व विधायक लक्ष्मण स्वर्णकार, केंद्रीय प्रवक्ता योगेंद्र प्रताप सिंह, नीलम देवी, केके पोद्दार, अल्पसंख्यक मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष मुन्ना मल्लिक, अनुसूचित जनजाति अध्यक्ष प्रभात भुईयां भाजपा में शामिल हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव के समय टिकट की उम्मीद में पूर्व सांसद मनोज भुईयां फरवरी में राजद से भाजपा में शामिल हुए थे। टिकट नहीं मिलने पर मनोज अब झारखंड विकास मोर्चा में शामिल हो गए हैं। लोकसभा चुनाव के वक्त झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक जयप्रकाश भाई पटेल भाजपा-आजसू का प्रचार करने लगे थे। इस पर उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया, वे अभी किसी पार्टी में शामिल नहीं हुए हैं। पर माना जा रहा है कि वे भाजपा या ऑल झारंखड स्टूडेंट्स यूनियन में शामिल होंगे। पूर्व विधायक चंद्रिका महथा भी झामुमो छोड़ झाविमो में शामिल हो गए।
भाजपा में 11 और शिवसेना में आए सात 'पालाबदल'
चंद्रकांत शिंदे|मुंबई
लोकसभा चुनाव में यहां कांग्रेस और एनसीपी का पूरी तरह सफाया हो गया था। कांग्रेस सिर्फ एक सीट जीत पाई। यह जीत कांग्रेस की इसलिए नहीं मानी गई, क्योंकि सुरेश शिवसेना से कांग्रेस में आए थे। अक्टूबर में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस और एनसीपी के नेता भाजपा की ओर रुख कर रहे हैं। पिछले तीन महीनों की बात करें तो कांग्रेस और एनसीपी के राधाकृष्ण विखे पाटिल, शिवेंद्रराजे भोसले, संदीप नाईक, वैभव पिचड़, उनके पिता मधुकर पिचड़, कालिदास कोलंबकर, चित्रा वाघ, संग्राम जगताप, राणा जगजित सिंह, भरमू पाटिल सहित लगभग 18 बड़े नेता भाजपा और शिवसेना में शामिल हुए हैं। सबसे ज्यादा घाटा एनसीपी को हुआ है। इनमें 12 नेता एनसीपी के हैं। बाकी छह नेता-विधायक कांग्रेस के हैं। इन 18 में से 11 नेता भाजपा में गए हैं तो बाकी 7 शिवसेना में शामिल हुए हैं। भाजपा की रणनीति आक्रामक है। उसने एनसीपी के मुंबई अध्यक्ष सचिन अहीर को अपने पाले में कर लिया। सचिन एनसीपी चीफ शरद पवार के नजदीकी माने जाते रहे हैं।

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