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क्लोज होगी चंडीगढ़ में दर्ज एफआईआर, अग्रिम जमानत की कोशिश कर रहे अफसर पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप घोटाला : रोहतक जिला अदालत में दायर की है याचिका

August 21, 2019 05:51 AM

COURTESY DAINIK BHASKAR AUG 21

क्लोज होगी चंडीगढ़ में दर्ज एफआईआर, अग्रिम जमानत की कोशिश कर रहे अफसर
पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप घोटाला : रोहतक जिला अदालत में दायर की है याचिका
याचिका में कहा- दस्तावेज सहायक से लेकर निदेशक और एसीएस की निगरानी से भी गुजरते हैं
मनोज कुमार | राजधानी हरियाणा
पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप में हुए घोटाले में चंडीगढ़ में दर्ज एफआईआर अब क्लोज होगी। हरियाणा स्टेट विजिलेंस ब्यूरो की ओर से जांच के बाद रोहतक में एक एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। ऐसे में ब्यूरो ने चंडीगढ़ की एफआईआर को विड्रा करने की सिफारिश की थी। हरियाणा सरकार ने पहले चंडीगढ़ पुलिस को विड्रा की चिट्‌ठी भेजी, लेकिन पुलिस ने नहीं की। इसलिए प्रशासक के सलाहकार आईएएस मनोज परिदा को इस एफआईआर को क्लोज करने की सिफारिश एससीबीसी वेलफेयर डिपार्टमेंट की प्रिंसिपल सेक्रेट्री द्वारा की गई। अब एडवाइजर ने यह सिफारिश स्वीकर कर ली है। इसलिए अब चंडीगढ़ में यह मामला क्लोज हो जाएगा।
इधर, महकमे के चंडीगढ़ स्थित मुख्यालय के आरोपी अफसरों ने रोहतक कोर्ट में अग्रिम जमानत के प्रयास शुरू कर दिए हैं। उन्होंने रोहतक जिला अदालत में इसके लिए याचिका भी दायर की है, जिस पर अब 23 अगस्त को सुनवाई होनी है। सूत्रों का कहना है कि एक आरोपी ने इस मामले में तर्क दिया है कि स्कॉलरशिप की फाइल सहायक से लेकर अधीक्षक, निदेशक और एसीएस तक की निगरानी में गुजरती है और वहीं से मंजूरी मिलती है। इसमें उसका कोई कसूर नहीं है। जबकि एक अिधकारी की अग्रिम जमानत याचिका पर विजिलेंस के ही अफसर ने लिखा है कि उसके खिलाफ इस मामले में कोई सबूत ही नहीं मिले हैं। लेकिन यह भी लिखा है कि उसने दस्तावेजों से छेड़छाड़ की नियत से अग्रिम जमानत की याचिका दायर की है, इसलिए जमानत न दी जाए। एडवाइजर टू एडमिनिस्ट्रेटर मनोज परिदा ने बताया कि हरियाणा सरकार ने एफआईअार क्लोज करने की रिक्वेस्ट की है। मामले की एक जगह ही जांच होती है तो ठीक रहता है। इसलिए चंडीगढ़ में दर्ज एफआईआर क्लोज की जाएगी।
एफआईआर क्लोज के लिए सरकार ने यह दिया तर्क : विभाग की प्रिंसिपल सेक्रेट्री नीरजा शेखर की ओर से एडवाइजर टू एडमिनिस्ट्रेटर को भेजी गई चिट्‌ठी में लिखा है कि यह ऑर्गेनाइज्ड होकर गड़बड़ी की गई है। कई जिलों में यह गड़बड़ी हुई है। फेक स्टूडेंट्स के नाम जिलों से भेजे गए। यह अपराध भी अलग-अलग जिलों में हुई है। इसलिए तीन जिले सोनीपत, रोहतक और झज्जर के मामलों की एफआईआर रोहतक विजिलेंस ब्यूरो के थाने में 30 जुलाई को दर्ज की जा चुकी है। अन्य जिलों की भी जांच चल रही है। इसलिए हरियाणा सरकार ने सलाह लेने के बाद यह तय किया है कि यूटी प्रशासन से रिक्वेस्ट कर चंडीगढ़ में 13 मई को दर्ज एफआईआर को क्लोज कराया जाए। पूरे मामले की जांच विजिलेंस कर रही है।
आधार नंबर बदलकर स्कॉलरशिप में किया करोड़ों रुपए का गोलमाल
एससी बीसी वेलफेयर डिपार्टमेंट में एससी-बीसी के बच्चों को दसवीं के पास स्कॉलरशिप दी जाती है। जिसमें आधार नंबर बदलकर स्टूडेंट्स के नाम पर स्कॉलरशिप में करोड़ों रुपए का गोलमाल किया गया। पहले करीब तीन करोड़ रुपए का गोलमाल सामने आया तो विभाग की ओ स्कॉलरशिप में करोड़ों रुपए का गोलमाल र से चंडीगढ़ पुलिस के पास मामले की गहन पड़ताल के लिए एफआईआर दर्ज कराई। दो अफसरों समेत सात कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया। विभाग ने पड़ताल जारी रखी तो उसके बाद 14 करोड़ रुपए का और गोलमाल पकड़ा गया। इसके लिए भी चंडीगढ़ पुलिस को एफआईआर के लिए लिखा गया लेकिन वह दर्ज नहीं हुई। इधर, मामला तूल पकड़ा तो मुख्यमंत्री ने मामले की जांच विजिलेंस को सौंपी। जिसने खुलासा किया कि रोहतक, सोनीपत और झज्जर में ही 26 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ है। इसके बाद 15 लोगों के खिलाफ रोहतक विजिलेंस थाने में एफआईआर दर्ज की गई। जिनमें चार प्राइवेट लोग थे और एक कर्मचारी की मौत पहले हो चुकी है। विजिलेंस अभी सभी जिलों में जांच में जुटी हुई है। करीब 50 करोड़ का गोलमाल होने की संभावना विजिलेंस जता चुकी है।
मनोज कुमार | राजधानी हरियाणा
पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप में हुए घोटाले में चंडीगढ़ में दर्ज एफआईआर अब क्लोज होगी। हरियाणा स्टेट विजिलेंस ब्यूरो की ओर से जांच के बाद रोहतक में एक एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। ऐसे में ब्यूरो ने चंडीगढ़ की एफआईआर को विड्रा करने की सिफारिश की थी। हरियाणा सरकार ने पहले चंडीगढ़ पुलिस को विड्रा की चिट्‌ठी भेजी, लेकिन पुलिस ने नहीं की। इसलिए प्रशासक के सलाहकार आईएएस मनोज परिदा को इस एफआईआर को क्लोज करने की सिफारिश एससीबीसी वेलफेयर डिपार्टमेंट की प्रिंसिपल सेक्रेट्री द्वारा की गई। अब एडवाइजर ने यह सिफारिश स्वीकर कर ली है। इसलिए अब चंडीगढ़ में यह मामला क्लोज हो जाएगा।
इधर, महकमे के चंडीगढ़ स्थित मुख्यालय के आरोपी अफसरों ने रोहतक कोर्ट में अग्रिम जमानत के प्रयास शुरू कर दिए हैं। उन्होंने रोहतक जिला अदालत में इसके लिए याचिका भी दायर की है, जिस पर अब 23 अगस्त को सुनवाई होनी है। सूत्रों का कहना है कि एक आरोपी ने इस मामले में तर्क दिया है कि स्कॉलरशिप की फाइल सहायक से लेकर अधीक्षक, निदेशक और एसीएस तक की निगरानी में गुजरती है और वहीं से मंजूरी मिलती है। इसमें उसका कोई कसूर नहीं है। जबकि एक अिधकारी की अग्रिम जमानत याचिका पर विजिलेंस के ही अफसर ने लिखा है कि उसके खिलाफ इस मामले में कोई सबूत ही नहीं मिले हैं। लेकिन यह भी लिखा है कि उसने दस्तावेजों से छेड़छाड़ की नियत से अग्रिम जमानत की याचिका दायर की है, इसलिए जमानत न दी जाए। एडवाइजर टू एडमिनिस्ट्रेटर मनोज परिदा ने बताया कि हरियाणा सरकार ने एफआईअार क्लोज करने की रिक्वेस्ट की है। मामले की एक जगह ही जांच होती है तो ठीक रहता है। इसलिए चंडीगढ़ में दर्ज एफआईआर क्लोज की जाएगी।
वकील ने कहा- जिला कार्यालय में हुई गड़बड़ी: आरोपी अफसरों के वकील रवीश चंद्र दलाल का कहना है कि अफसरों ने कोई गलती नहीं की है। क्योंकि ऑन लाइन आवेदन होते हैं और जिला कल्याण अधिकारी इन्हें वैरीफाई करके निदेशालय भेजता है। उसी के आधार पर निदेशालय से मंजूरी मिलती है। फाइल सहायक, अधीक्षक, निदेशक और एसीएस तक जाती है और उसी के अनुसार मंजूर होकर वापस सहायक के पास आती है। इसलिए इस मामले में गड़बड़ी जिला लेवल पर हुई है। तीन अफसरों ने अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की है। इस पर 23 अगस्त को सुनवाई होगी

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