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हाईकोर्ट में वकील काम पर लौटे, कमेटी की रिपोर्ट आने तक फुल बेंच ने स्थगित की सुनवाई

August 17, 2019 05:29 AM

COURTESY DAINIK BHASKAR AUG 17

हाईकोर्ट में वकील काम पर लौटे, कमेटी की रिपोर्ट आने तक फुल बेंच ने स्थगित की सुनवाई

हरियाणा एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल के खिलाफ काम का बहिष्कार कर रहे पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के वकील शुक्रवार से अपने काम पर लौट आए। बार एसोसिएशन की जनरल हाउस मीटिंग में हड़ताल को डेफर करने का फैसला लिया गया, जिसकी जानकारी चीफ जस्टिस कृष्ण मुरारी, जस्टिस राजीव शर्मा और जस्टिस राकेश कुमार जैन के फुल बेंच को दे दी गई। इसके बाद फुल बेंच ने हरियाणा सरकार द्वारा गठित कमेटी की रिपोर्ट आने तक केस की सुनवाई स्थगित कर दी।
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान डीजीपी संजय बेनीवाल, होम सेक्रेटरी अरुण गुप्ता और एसएसपी निलांबरी जगदले मौजूद रही। बार एसोसिएशन की तरफ से प्रेजीडेंट और सेक्रेटरी ने कहा कि आंदोलन को फिलहाल डेफर किया जा रहा है और जनरल हाउस की मीटिंग में फैसला लिया गया है कि वकील शनिवार से काम पर लौट आएंगे।
हाईकोर्ट के लगभग 280 वकीलों ने 14 अगस्त को ही बार एसोसिएशन के प्रेजीडेंट को ओपन लेटर लिख स्पष्ट कर दिया कि बार एसोसिएशन भले ही काम न करने का फैसला ले सकती है, लेकिन वे 16 अगस्त से काम पर लौट आएंगे। इस पर बार प्रेजीडेंट ने कहा कि डेमोक्रेसी में हर किसी को अपना पक्ष रखने का हक है।
पार्किंग में दंगा विरोधी दस्ता तैनात : सुबह सुनवाई से पहले ही हाईकोर्ट की पार्किंग में दंगा विरोधी दस्ता तैनात कर दिया गया था और पुलिस किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने की तैयारी में दिखी। फुल बेंच में सुनवाई 11 बजे थी, लेकिन बार एसोसिएशन ने 10 बजे ही जनरल हाउस की मीटिंग बुलाकर काम न करने के फैसले को फिलहाल वापस ले लिया।
वकीलों ने पहले पत्र लिख काम पर लौटने का फैसला लिया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के बाहर तैनात पुलिस फाेर्स।
हड़ताल को टाला है खत्म नहीं किया : वकीलों ने शुक्रवार से ही वकीलों ने कोर्ट में पेश होना शुरू कर दिया। ऐसे में अब शनिवार से हाईकोर्ट में पूरी तरह से सुचारु रूप से कामकाज होगा। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के प्रेजीडेंट डीपीएस रंधावा ने कहा कि काम न करने के फैसले को फिलहाल टाला है। ऐसा नहीं है कि वकील दोबारा आंदोलन नहीं कर सकते, लेकिन ट्रिब्यूनल के कामकाज को लेकर गठित कमेटी की रिपोर्ट की इंतजार करते हुए काम पर लौटने का फैसला लिया गया है।
बार के खिलाफ कॉस्ट लगाने का फैसला वापस ले : फुल बेंच के समक्ष सुनवाई के दौरान बार एसोसिएशन के प्रेजीडेंट ने मांग की कि एक मामले में बार एसोसिएशन पर 50 हजार कॉस्ट लगाई गई है और कई मामलों में एडवर्स आर्डर जारी किए हैं। इन्हें भी वापस लिया जाए।

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