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HARYANA - किलोमीटर स्कीम घोटाला भास्कर सवाल: रेट की फाइल निदेशक, एसीएस, मंत्रालय के बाद सीएमओ में पहुंची, कमेटी ही जिम्मेदार क्यों?

July 24, 2019 05:52 AM

COURTESY DAINIK BHASKR JULY 24

किलोमीटर
मनोज कुमार | राजधानी हरियाणा
किलोमीटर स्कीम में स्टेट विजिलेंस ब्यूरो की ओर से घोटाला खोले जाने के बाद परिवहन विभाग ने नेगोशिएशन कमेटी में व अन्य अफसरों के खिलाफ एक्शन ले लिया है। सभी को अंडर रूल-7 के तहत चार्जशीट कर दिया गया है, जिन्हें चार्जशीट किया गया है, उनमें परिवहन विभाग की नेगोशिएशन कमेटी में शामिल एसचसीएस एवं विभाग के एडिशनल डायरेक्टर संवर्तक सिंह, चीफ एकाउंट ऑफिसर मुकेश गांधी, फ्लाइंग स्कवायड ऑफिसर ट्रैफिक भंवरजीत सिंह व फ्लाइंग स्कवायड ऑफिसर टेक्निकल-2 अश्विनी कुमार डोगरा के अलावा हाउसिंग बोर्ड के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर विजय त्रिखा और कंप्यूटर ऑपरेटर पवन कुमार शामिल है। हालांकि इस कमेटी के अलावा फाइनेंस कमेटी और टेक्निकल कमेटी भी इस टेंडर प्रक्रिया में शामिल थी, लेकिन विजिलेंस जांच में उनकी जिम्मेदारी तय न होने पर वह बच गई है।
खास बात यह है भी है कि रेट अप्रूवल के लिए फाइल निदेशक, एसीएस और परिवहन मंत्रालय के बाद सीएमओ तक से गुजरी, लेकिन इनमें किसी पर आंच तक नहीं आई है। सवाल पूछने पर महकमे के मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने कहा- कार्रवाई विजिलेंस जांच की रिपोर्ट पर की गई है। विजिलेंस ने दूसरे अफसरों या उनके कार्यालयों को दोषी नहीं माना, क्योंकि वहां से कोई गड़बड़ी नहीं हुई। इसलिए कमेटी में शामिल अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
बता दें कि यह फाइल कमेटी के बाद महकमे के निदेशक के कार्यालय में पहुंची। निदेशक के देखने के बाद उन्होंने अप्रूवल कर एडिशनल चीफ सेक्रेट्री और यहां से परिवहन मंत्रालय तक फाइल पहुंची। मंत्रालय ने भी सीएमओ तक इसे अप्रूवल करके भेज दिया और वहां से इसपर मुहर लग गई, लेकिन सीनियर अफसरों ने भी इसमें लापरवाही बरती। यदि किसी ने भी रेट पर आपत्ति की होती तो टेंडर रुक सकते थे। निदेशक से लेकर एसीएस, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव और परिवहन मंत्री तक कर्मचारियों की मीटिंगों में यही कहते रहे कि कहीं कोई गड़बड़ी नहीं हुई है।
यह है अंडर रूल-7 की चार्जशीट
इस नियम के तहत कर्मचारी का इंक्रीमेंट और प्रमोशन रोका जा सकता है। आरोप सिद्ध हुए तो बर्खास्तगी तक हो सकती है।
स्कीम घोटाला
भास्कर सवाल: रेट की फाइल निदेशक, एसीएस, मंत्रालय के बाद सीएमओ में पहुंची, कमेटी ही जिम्मेदार क्यों?
मंत्री का जवाब: विजिलेंस ने कमेटी को ही जिम्मेदार माना है, दूसरे कार्यालय जिम्मेदार होते तो उन पर भी कार्रवाई होती
कमेटी के बाद 3 सीनियर अफसर और मंत्रालय से आई फाइल, नहीं की आपत्ति
कर्मचारियों के आॅब्जेक्शन पर अधिकारी, और मंत्री कर रहे थे पारदर्शिता का दावा
सरकार का एक्शन, जिम्मेदार 5 अफसरों समेत 6 चार्जशीट
वह सबकुछ जो आपको जानना जरूरी है... विजिलेंस ने करीब 40 लोगों की कॉल डिटेल जुटाई गई
किस कमेटी का क्या था काम
टेक्निकल कमेटी: टेंडर के लिए आवेदन करने वालों का रिकॉर्ड देखना। यह भी जांचना कि जिस एजेंसी ने टेंडर लगाए हैं, वह इसके एजेंसी की योग्यता देखी जानी थी।
फाइनेंस कमेटी: टेंडर में भरे गए रेट देखना था। ज्यादा हैं या कम।
नेगोशिएशन कमेटी: दोनों कमेटियों के बाद इस कमेटी का काम ऑपरेटरों से बातचीत कर रेट कम कराने का काम था। सूत्रों का कहना है कि कमेटी ने 30 पैसे से लेकर 2 रुपए तक कम कराए।
विजिलेंस जांच: मोबाइल की लोकेशन और कॉल डिटेल जुटाई
विजिलेंस ब्यूरो की ओर से बस ऑपरेटरों के मोबाइल की लोकेशन और कॉल डिटेल भी निकाली है। इनकी 14 जगह लोकेशन सामने आई है। सूत्रों का कहना है कि जब इनकी आपसी बातचीत हुई, उस दिन ये कहां पर थे। बताया गया है कि 40 के करीब लोगों की मोबाइल कॉल डिटेल जुटाई गई। इसमें सामने आया कि इनकी आपस में कब-कब बात हुई।
जिन 2 महकमों के अफसरों पर आरोप, दोनों मंत्रालय पंवार के पास
जिन 2 महकमों के अफसरों पर घोटाले में शामिल होने का आरोप है, वे दोनों ही कैबिनेट मिनिस्टर कृष्ण लाल पंवार के पास है। इसमें परिवहन विभाग के अलावा हाउसिंग बोर्ड के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर पर शामिल होने का आरोप है और ये दोनों पंवार के पास है।
विभाग के कर्मचारियों की ओर से एसीएस धनपत सिंह पर खूब आरोप लगाए। विजिलेंस जांच शुरू होने के बाद उनका तबादला किया, लेकिन उनके महकमे के मंत्री नहीं बदले। उन्हें हाउसिंग बोर्ड का एसीएस लगाया, जिसके मंत्री पंवार ही हैं।
नियमानुसार 100 करोड़ रुपए से ज्यादा के खरीद-फरोख्त के मामले वित्तमंत्री की अध्यक्षता में बनी हाई पावर चरचेज कमेटी में जाते हैं, लेकिन यह मामला नहीं भेजा गया।
उच्च स्तर पर है मिलीभगत, सीबीआई से हो जांच : पूनिया
हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन के प्रदेश महासचिव सरबत सिंह पूनिया ने कहा कि जांच में उच्चस्तर के अधिकारियों को बचाकर निचले स्तर के कर्मचारियों पर नजला झाड़ा गया है। इस मामले की जांच सीबीआई या सिटिंग जज से कराई जानी चाहिए। इसमें मिलीभगत उच्चस्तर पर हुई है। इस पॉलिसी में जब गड़बड़ी मिली है तो इसे रद्द कर देना चाहिए। वर्ना इसमें आगे फिर गड़बड़ी की आशंका बनी रहेगी।
मामला हाई पावर परचेज कमेटी को नहीं भेजना सवाल खड़ा करता है: वीरेंद्र सिंह
रोडवेज कर्मचारी यूनियन हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह धनखड़ ने कहा कि यह मामला मंत्रालय और सीएमओ की बजाए हाई पावर परचेज कमेटी के पास जाना चाहिए थे। इसमें कमेटी पर कार्रवाई कर ली गई। तत्कालीन निदेशक और एसीएस की ओर मामला हाई पावर परचेज कमेटी में न भेजा जाना सवाल खड़ा करता है। निचले कर्मचारियों ने केवल बाबू का काम किया है। यह 900 करोड़ के फर्जीवाड़े का मामला है।
किलोमीटर मीटर स्कीम में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। विजिलेंस से मिली रिपोर्ट में कुछ अफसर जिम्मेदार माने गए हैं। कृष्ण लाल पंवार, मंत्री, परिवहन विभाग एवं हाउसिंग बोर्ड।
फर्जी टिकट मामले में डोगरा के खिलाफ चल रही विजिलेंस जांच
नेगोशिएशन कमेटी में शामिल फ्लाइंग स्कवायड ऑफिसर टेक्निकल-2 अश्विनी डोगरा के खिलाफ फर्जी टिकट घोटाले में भी जांच विजिलेंस में चल रही है। किलोमीटर स्कीम के विरोध में पिछले साल 16 अक्टूबर से 2 नवंबर तक चली हड़ताल के दौरान डोगरा करनाल में विभाग के जीएम पद पर तैनात थे। उस दौरान बिना मुख्यालय की अनुमति के टिकटें छपवा ली गईं, क्योंकि बुकिंग ब्रांच परमानेंट कर्मचारियों के नाम ही टिकट इश्यू करता है। 94 लाख रुपए की छपवाई टिकट की जानकारी मुख्यालय तक नहीं पहुंची। बाद में 54 लाख रुपए जमा करा दिए, जबकि बाकी का कोई हिसाब नहीं दिया। इस मामले की विजिलेंस जांच चल रही है।

 
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