Wednesday, October 23, 2019
Follow us on
 
Haryana

CM CITY KARNAL-प्रशासन अोरों को पढ़ा रहा जल बचाने का पाठ, खुद नहीं कर रहा अमल

July 13, 2019 06:12 AM

COURTESY DAINIK BHASKAR JULY 13

कैसे होगा जल संरक्षण : जगह-जगह लगे सबमर्सिबल, न चलाने की टाइमिंग, न बंद करने की, नालियों में बह रहा पानी
प्रशासन अोरों को पढ़ा रहा जल बचाने का पाठ, खुद नहीं कर रहा अमल

प्रदेश सरकार जल बचाने पर जोर दे रही है और प्रशासन जल ही जीवन व जल शक्ति अभियान के तहत लोगों को जल संरक्षण का पाठ पढ़ाने में जुटा है, लेकिन हालात देखिए कि लघु सचिवालय में ही पेयजल वेस्ट हो रहा है। लघु सचिवालय की फेज-2 बिल्डिंग में रखी गई पानी की टंकी लीक है, जिससे 24 घंटे व्यर्थ में पानी बह रहा है। लघु सचिवालय ही नहीं सरकारी भवनों में पेयजल की टंकियों से ओवरफ्लो होकर पानी वेस्ट हो रहा है।
पानी की वेस्टेज यहीं पर आकर नहीं रुकती है, जिले के बहुत से गांवों में गली-मोहल्ला में सबमर्सिबल ट्यूबवेल लगे हुए हैं, जिनको न तो चलाने की कोई टाइमिंग और न बंद करने का समय निश्चित है अाैर न कोई जिम्मेदार है। हर दिन जमीन से निकाला गया अमृत जैसा पानी बेकार में नष्ट हो रहा है, जिससे हर साल भूजल स्तर नीचे खिसक रहा है। करनाल ब्लॉक की बात करें तो वर्ष 2018 में भूजल स्तर 1.34 मीटर नीचे खिसक गया है। जिले में ओवरहाल पानी नीचे जाने का आंकड़ा 1.15 मीटर है, लेकिन इसकी तरफ प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है। जल संरक्षण के अधिकतर प्रयास सिर्फ बंद कमरों में हाेती मीटिंगों तक सिमटे हैं।
लघु सचिवालय में टंकी लीक होने से 24 घंटे व्यर्थ बह रहा पानी, हर रोज लाखों लीटर पानी की बर्बादी
जल संरक्षण के प्रयास सिर्फ बंद कमरों में हाेती मीटिंगों तक सीमित, भूजल स्तर 1.34 मीटर नीचे खिसका
करनाल. लघु सचिवालय में ब्लॉक-2 में रखी टंकी से बहता पानी।
सीएम ने किया था जल बचाने का आह्वान, गाड़ियों के धाेने पर भी नहीं लगा ब्रेक
सेक्टरों में संभ्रात परिवार के लोग रहते हैं, लेकिन उनमें से बहुत से लोग ऐसे हैं जो नलके से पाइप लगाकर सीधे पेयजल से गाड़ी को धोते हैं। पानी की इस बर्बादी पर तब भी ब्रेक नहीं लगे जब प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल बचाने का आह्वान कर रहे हैं। तालाबों को जोहड़ों को पुनर्जीवित करने की बात पर जोर दिया रहा है। घरों में रिचार्ज सिस्टम अपनाने की बात कही जा रही है, लेकिन सेक्टरों में पानी की बर्बादी लगातार जारी है।
शहर में बनाए गए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी ठप
शहर में बने रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी ठप पड़े हैं। जबकि प्रशासन की ओर से इन्हें दुरुस्त कराने के दावे किए जा चुके हैं, लेकिन बारिश का सीजन शुरू होने पर भी हालात सुधर नहीं पाए हैं। सेक्टर-7 में बने वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम कचरे से अटा पड़ा है, लेकिन इसको चालू करने पर किसी ने ध्यान नहीं दिया है।
करनाल. लघु सचिवालय में छत पर रखी टंकी से लीक होता पेयजल।
वेस्टेज रोकने को जागरूक किया जा रहा
लघु सचिवालय की छत पर रखी गई पानी की टंकी लीक है तो चेक कराकर उन्हें ठीक कराया जाएगा। इसके अलावा पानी की वेस्टेज को रोकने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसके अलावा सरपंचों की मीटिंग लेकर उन्हें निर्देश दिए हैं कि वे अपने गांवों में पानी की वेस्टेज काे रोकें। नलों पर लोगों से टेप लगवाएं। नंबरदार, चौकीदार व पंचों को इस काम की जिम्मेदारी दी जाए। जो व्यक्ति निर्देशों की अवहेलना करे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। एक माह में सरपंचों को इस पूरी कार्रवाई को करना है। -अनिश यादव, एडीसी, करनाल।
एक साल में 1.15 मीटर खिसका जिले का जलस्तर
ब्लॉक जल स्तर गिरा (मीटर)
करनाल 1.34
इंद्री 1.52
नीलाेखेड़ी 1.56
निसिंग 0.97
घरौंडा 8.5
असंध 1.03
जिले में औसत 1.15
टंकियों में जमी है काई, सेहत के लिए नहीं ठीक
पेयजल को लेकर प्रशासन कितना सजग है, इसका पता इसी बात से लगाया जा सकता है कि बारिश का सीजन चल रहा है, लेकिन पेयजल की टंकियों पर ढक्कन तक नहीं हैं। ऐसे में टंकियों में जहरीले जीवों के गिरकर सड़ने का खतरा बना हुआ है। अगर ऐसा पानी लोग पीएंगे तो जीवन पर संकट आ सकता है। लघु सचिवालय फेज-2 बिल्डिंग पर रखी गई पानी की टंकियों में काई जमी हुई है। ऐसे में इस तरह का पानी पीने से लोगों के सेहत पर भारी पड़ सकता है

Have something to say? Post your comment