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Haryana

HSVP PANCHKULA-अलॉटी की मौत के 25 दिन बाद मोर्टगेज परमिशन जारी करने और लोन देने का मामला

June 19, 2019 05:24 AM


COURTESY DAINIK BHASKAR JUNE 19

एचएसवीपी ने अपने अफसरों और बाबुओं को दी क्लीनचिट तो पुलिस ने मांगा जवाब
अलॉटी की मौत के 25 दिन बाद मोर्टगेज परमिशन जारी करने और लोन देने का मामला
बैंक से भी पूछा-लोन जारी करने के बाद बार-बार एन्हांस करने वाले अफसरों की डिटेल और क्राइटेरिया

मरे हुए अलॉटी के नाम पर मोर्टगेज परमिशन लेकर लोन जारी करने के मामले में पंचकूला पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच में सामने आया है कि हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) ने अपने जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों को क्लीनचिट भी जारी कर दी है।
वहीं मरे हुए अलॉटी के नाम पर शुरू हुए लोन को कई बार बढ़ाया पर भी करवाया गया है। इसे बैंक ने बिना किसी ऑब्जेक्शन के जारी भी कर दिया। अब पुलिस के सवालों के घेरे में एचएसवीपी और बैंक और दोनों आ गए हैं। दोनों से सवालों का जवाब भी मांगा गया है।
सेक्टर 7 की एक कोठी के को- अलॉटी सुरजीत रेखी की मौत के बाद एचएसवीपी से मोर्टगेज परमिशन को जारी किया गया था। इसके साथ बैंक ने लोन भी जारी किया। इसके बाद लोन बढ़ाया भी किया गया।
लोन लेने के बाद और सुरजीत की मौत के बाद इस प्रॉपर्टी को उनकी पत्नी के नाम पर ट्रांसफर किया गया था। इस दौरान भी कोई ऑब्जेक्शन खड़ा नहीं किया गया था। मार्च में बैंक की ओर से नोटिस आने पर जब परिवार के लोग जवाब देने लगे तो सामने अाया कि अलॉटी की मौत के बाद लोन दिया गया है।
अपनी गलती छुपा रहे- हर बार की तरह ही एचएसवीपी के अधिकारी अपने बाबुओं, कर्मचारियों, अधिकारियों के कारनामों पर पर्दा डाल रहे हैं। इसमें सीधा सीधा एचएसवीपी के बाबुओं, क्लर्क, सुपरिंटेंडेंट, अकाउंट ब्रांच पर सवाल खड़े हुए थे, लेकिन उन्हें पहले भी क्लीनचिट दी गई थी।
इस बार एचएसवीपी की ओर से पुलिस को बताया गया है कि हमारे किसी भी अधिकारी या बाबू की इसमें कोई गलती नहीं हैं। जबकि मोर्टगेज परमिशन एचएसवीपी ने ही दी थी। वहीं, सुरजीत की बेटी और बेटा बार बार पुलिस में जब चक्कर लगाकर एफआईआर के लिए बोल रहे थे तो उनसे बचने के लिए खुद ही यहां से एफआईआर को दर्ज करवाया गया।
प्रॉपर्टी ट्रांसफर होती रही और बैंक लोन की अमाउंट को भी बढ़ाता गया
मरे हुए अलॉटी के नाम पर लोन जारी करने वाले बैंक ने एक बार नहीं, बल्कि कई बार इस लोन को बढ़ाया भी गया था।
इस प्रॉपर्टी के दो पार्टनर थे। एक मर चुके थे। दूसरे जिंदा थे। मरे हुए पार्टनर के नाम पर मोर्टगेज हुआ और लोन भी जारी किया गया। ये सबसे बड़ी गलती थी।
पहले पार्टनर की मौत के बाद उनकी पत्नी के नाम उनकी प्रॉपर्टी का शेयर नाम हुआ। वहीं दूसरे पार्टनर की मौत के बाद उनकी पत्नी के नाम प्रॉपर्टी हुई। इसी बीच कई बार इस लोन की अमाउंट को बढ़ाया गया था, लेकिन इस पर बात पर बैंक ने ध्यान ही नहीं दिया कि सबसे पहले लोन लेने वाला अलॉटी लोन से पहले ही मर चुका था।
एचएसवीपी से इन सवालों का जवाब मांगा
ये प्रॉपर्टी कब और किसके नाम पर अलॉट की गई थी?
जब लोन लिया गया था उस दौरान प्रॉपर्टी की अमाउंट पेंडिंग थी? वहीं मोर्टगेज परमिशन का रूल और प्रोसेस क्या है?
क्या एचएसवीपी को पता था कि अलॉटी मर चुका है। अगर नहीं तो पता क्यों नहीं किया। क्योंकि मोर्टगेज परमिशन के दौरान प्रॉपर्टी के पार्टनर एचएसवीपी ऑफिस हो तो ही परमिशन मिलती है। ऐसे में ये परमिशन कैसे दी गई।
पूरे प्रोसेस को देखने के नियम क्या है। इस दौरान किन-किन अधिकारियों के पास फाइल गई थी। इसका रिकॉर्ड मांगा है। वहीं इस मामले में किस लेवल पर अधिकारियों के पास फाइल जाती है या किसने क्लियर की, इन डॉक्यूमेंट्स की डिटेल और कॉपी दी जाए।
अमित शर्मा | पंचकूला
मरे हुए अलॉटी के नाम पर मोर्टगेज परमिशन लेकर लोन जारी करने के मामले में पंचकूला पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच में सामने आया है कि हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) ने अपने जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों को क्लीनचिट भी जारी कर दी है।
वहीं मरे हुए अलॉटी के नाम पर शुरू हुए लोन को कई बार बढ़ाया पर भी करवाया गया है। इसे बैंक ने बिना किसी ऑब्जेक्शन के जारी भी कर दिया। अब पुलिस के सवालों के घेरे में एचएसवीपी और बैंक और दोनों आ गए हैं। दोनों से सवालों का जवाब भी मांगा गया है।
सेक्टर 7 की एक कोठी के को- अलॉटी सुरजीत रेखी की मौत के बाद एचएसवीपी से मोर्टगेज परमिशन को जारी किया गया था। इसके साथ बैंक ने लोन भी जारी किया। इसके बाद लोन बढ़ाया भी किया गया।
लोन लेने के बाद और सुरजीत की मौत के बाद इस प्रॉपर्टी को उनकी पत्नी के नाम पर ट्रांसफर किया गया था। इस दौरान भी कोई ऑब्जेक्शन खड़ा नहीं किया गया था। मार्च में बैंक की ओर से नोटिस आने पर जब परिवार के लोग जवाब देने लगे तो सामने अाया कि अलॉटी की मौत के बाद लोन दिया गया है।
अपनी गलती छुपा रहे- हर बार की तरह ही एचएसवीपी के अधिकारी अपने बाबुओं, कर्मचारियों, अधिकारियों के कारनामों पर पर्दा डाल रहे हैं। इसमें सीधा सीधा एचएसवीपी के बाबुओं, क्लर्क, सुपरिंटेंडेंट, अकाउंट ब्रांच पर सवाल खड़े हुए थे, लेकिन उन्हें पहले भी क्लीनचिट दी गई थी।
इस बार एचएसवीपी की ओर से पुलिस को बताया गया है कि हमारे किसी भी अधिकारी या बाबू की इसमें कोई गलती नहीं हैं। जबकि मोर्टगेज परमिशन एचएसवीपी ने ही दी थी। वहीं, सुरजीत की बेटी और बेटा बार बार पुलिस में जब चक्कर लगाकर एफआईआर के लिए बोल रहे थे तो उनसे बचने के लिए खुद ही यहां से एफआईआर को दर्ज करवाया गया।
मरे हुए अलॉटी के नाम प्रॉपर्टी की मोर्टगेज परमिशन कैसे दी
बैंक से मांगा इन सवालों का जवाब
प्राइवेट बैंक से पूछा गया है कि लोन का क्राइटेरिया क्या है?
कब और कितना लोन किस आधार पर दिया गया था। अलॉटी के मरने के बाद और प्रॉपर्टी ट्रांस्फर होने से पहले लोन कैसे जारी कर दिया गया?
क्या बैंक मरे हुए अलॉटी के नाम पर लोन देता है?
इस लोन को अप्रूव करने के बाद कितनी बार एन्हांस किया गया है और किस क्राइटेरिया पर किया गया? मार्च में बैंक ने नोटिस क्यों भेजा। इसके अलावा जब नोटिस आने के बाद जवाब दिया गया, पेंडिंग किश्तों को जमा भी करवाया गया तो उसके बाद नोटिस वापिस क्यों नहीं लिया गया?
जिम्मेवार अधिकारियों का नाम और डॉक्यूमेंट्स को मांगा गया है।
यह है मामला
दो कनाल की कोठी पर लिया 4.50 करोड़ लोन
सेक्टर-7 में दो कनाल में बनी एक कोठी के दो अलॉटीज सुरजीत सिंह रेखी, तेजिंदर सिंह के नाम पर एक प्राइवेट बैंक से साढ़े चार करोड़ का लोन दिया गया था। जब लोन दिया गया, डॉक्यूमेंट्स कंप्लीट हुए, मोर्टगेज परमिशन मिली तो उस दौरान एक अलॉटी मौत हो चुकी थी। यानी एक अलॉटी की मौत के 25 दिन बाद मोर्टगेज परमिशन दी गई और इसके दम पर लोन जारी किया गया था। अब बैंक ने नोटिस भेजने शुरू कर दिए हैं। इसके बाद मामले की शिकायत एचएसवीपी में दी गई थी। एचएसवीपी की ओर से मामले की शिकायत यहां सेक्टर-5 थाने में देकर केस दर्ज करवाया

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