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प्रोफेसर डॉ. रंजना अग्रवाल को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद् के राष्ट्रीय विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं विकास अध्ययन संस्थान (सीएसआईआर-एनआईएसटीएडीएस), नई दिल्ली का निदेशक नियुक्त किया

June 18, 2019 06:09 PM

कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरूक्षेत्र के रसायन विज्ञान विभाग में प्रोफेसर डॉ. रंजना अग्रवाल को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद् के राष्ट्रीय विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं विकास अध्ययन संस्थान (सीएसआईआर-एनआईएसटीएडीएस), नई दिल्ली का निदेशक नियुक्त किया है। राष्ट्रीय विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं विकास अध्ययन संस्थान केन्द्र सरकार के अंतर्गत वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद् के प्रमुख अनुसंधानों में एक है और इस संस्थान के अध्यक्ष प्रधानमंत्री तथा उपाध्यक्ष केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन है। डॉ. रंजना अग्रवाल की नियुक्ति छह वर्षों की अवधि के लिए की गई है।
यह प्रतिष्ठित संस्थान विज्ञान, समाज और राज्य के बीच संवाद के विभिन्न पहलुओं के अध्ययन और विज्ञान, प्रौद्योगिकी और समाज के बीच निरंतर जुड़ाव की संभावनाओं की खोज करता है। 
डॉ. रंजना अग्रवाल ने कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय से बीएससी, एमएससी तथा पीएचडी की डिग्री उत्तीर्ण करने के उपरांत कैंब्रिज विश्वविद्यालय, इंग्लैंड से एरिथ्रोमाइसिन बायोसिंथेसिस पर पोस्टडॉक्टरल शोध किया है। डॉ. रंजना ने वर्ष 1995 में बतौर सहायक प्रोफेसर अपने मातृसंस्था कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय से ही अकादमिक करियर की शुरूआत की। इसके बाद, उन्होंने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी, ट्रिनिटी कॉलेज डबलिन, यूनिवर्सिटी ऑफ ट्रिएस्ट जैसी कई प्रसिद्ध यूरोपीय प्रयोगशालाओं में शोध कार्य किया। वह अमेरिका, स्पेन और आयरलैंड के वैज्ञानिकों के साथ सक्रिय सहयोग से शोध कार्य कर रही है। वर्तमान में वह कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान में प्रोफेसर और महिला अध्ययन केंद्र की निदेशक है। 
उनके पसंदीदा अनुसंधान विषयों में एजेहेरोसायकल के डिजाइन और संश्लेषण, हरे अभिकर्मकों को शामिल करते हुए एंटीकैंसर, एंटी-इंफ्लेमेरी, एंटीमाइक्रोबियल और फोटोडायनामिक एजेंटों का चिकित्सीय हित में उपयोग शामिल हैं। हाल ही में उन्हें हरियाणा राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् द्वारा डीएनए के माध्यम से कैंसर के इलाज के नये उपाय विकसित करने के लिए 20 लाख रुपये का शोध अनुदान प्रदान किया गया है। उनके शोध योगदान को विशेष रूप से कॉमनवेल्थ फेलोशिप (2003-2004), इंडियन केमिकल सोसाइटी द्वारा डॉ. बासुदेव बनर्जी मेमोरियल अवार्ड (2014) और भारतीय विज्ञान कांग्रेस द्वारा प्रो. एस.एस. कटियार एंडॉमेंट अवार्ड (2015) के रूप में मान्यता मिल चुकी है। महिला अध्ययन अनुसंधान केंद्र की निदेशक के रूप में वह सक्रिय रूप से क्षमता निर्माण कार्यक्रमों, लिंग संवेदीकरण को बढ़ावा देने और विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं के बीच कौशल विकास की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। 
कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. कैलाश चंद्र शर्मा ने डॉ. अग्रवाल को उनकी नियुक्ति पर बधाई दी है तथा कामना की है कि उनके नेतृत्व में राष्ट्रीय विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं विकास अध्ययन संस्थान नये आयाम स्थापित करेगा। उन्होंने कहा कि यह कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय के लिए गौरव का क्षण है क्योंकि सीएसआईआर की पहली महिला निदेशक डॉ. लक्ष्मीकांतम भी कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रा थीं। संयोग से, दोनों महिला वैज्ञानिकों ने इस विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग से पीएचडी की डिग्री प्राप्त की है।

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