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मरे हुए अलॉटी के नाम पर एचएसवीपी ने दी एनओसी व मोर्टगेज परमिशन, बैंक ने भी दिया 4.50 करोड़ का लोन

June 12, 2019 05:49 AM


COURTESY DAINIK BHASKAR JUNE 12

मरे हुए अलॉटी के नाम पर एचएसवीपी ने दी एनओसी व मोर्टगेज परमिशन, बैंक ने भी दिया 4.50 करोड़ का लोन
सेक्टर-5 थाने में केस दर्ज, जांच के दौरान एचएसवीपी और बैंक अफसरों से होगी पूछताछ
हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) में प्रॉपर्टी डॉक्यूमेंट्स को लेकर गड़बड़ी होने का सिलसिला रुक नहीं रहा है। अब एक नया मामला सामने आया है। सेक्टर-7 की कोठी नंबर 23 के को-अलॉटी सुरजीत रेखी की मौत के बाद एचएसवीपी से एनओसी और मोर्टगेज परमिशन लेकर इसके दम पर एचडीएफसी बैंक से करोड़ों रुपए का लोन लिया गया। बैंक वालों ने भी वेरिफाई नहीं किया।
इस मामले में अब सेक्टर-5 थाने में आईपीसी की धारा-420, 467, 468, 471, 120बी के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस ने बैंक, एचएसवीपी से इस मामले से संबंधित रिकॉर्ड मांगा है।
बैंक और एचएसवीपी के अफसरों को पूछताछ के लिए बुलाया है। इसके अलावा इस्टेट अफसर ने भी इस मामले में इंक्वायरी खोल दी है।
ऐसी की गड़बड़ी, किसने की पता नहीं: सेक्टर 7 की कोठी नंबर 23 के दो अलॉटी सुरजीत सिंह रेखी, तेजिंदर सिंह थे। 26 सितंबर 2011 को सुरजीत सिंह रेखी की मोहाली के फोर्टिज अस्पताल में मौत हो गई थी। मौत के बाद किसी भी कानूनी डॉक्यूमेंट्स में उनके नाम से कुछ भी अप्लाई नहीं किया जा सकता है। इसके बाद 20 अक्टूबर को कोठी के नाम से एचएसवीपी में मॉरगेज परमिशन के लिए अप्लाई किया गया था।
21 अक्टूबर को एचएसवीपी ने ये परमिशन सुरजीत और तेंजिदर के नाम से दे दी थी, जबकि सुरजीत की मौत हो चुकी थी। इसके बाद इस कोठी की मोर्टगेज परमिशन के दम पर रेखी ब्रदर्स के नाम से करोड़ों रुपए का लोन लिया गया है।
नियमों के अनुसार लोन के लिए अलॉटी या पार्टनर की इनकम वैल्यू रिपोर्ट, प्रॉपर्टी के सभी डॉक्यूमेंट्स लगाए जाते हैं। बैंक ने कोई ऑब्जेशन नहीं किया आैर लोन जारी कर दिया। सुरजीत के घरवालों को लोन के बारे में कोई जानकारी नहीं होती। इसके बाद इस रेखी के परिवार वाले रेखी की पत्नी के नाम पर यह कोठी ट्रांसफर करवाते हैं। इस समय भी एचएसवीपी के अफसर कोई ऑब्जेक्शन नहीं लगाते।
आपके मन के हर सवाल का जवाब
: परिवार को क्या पहले पता नहीं था ?
जब रेखी ब्रदर्स के नाम लोन हुआ तो उस दौरान महिलाओं को बिजनेस के बारे में पता नहीं था और बच्चे छोटे थे। परिवार का अच्छा बिजनेस है। इस कारण किश्तें भी जाती रही और किसी ने ध्यान नहीं दिया। बैंक को साल 2011 से किश्तें दी जा रही थी। रेखी ब्रदर्स ने करीब साढ़े चार करोड़ का लोन लिया था। मार्च 2019 में तीन-किश्तों में परेशानी आई थी। इसके बाद बैंक की ओर से नोटिस आया।
: कब, क्यों और कैसे हुआ खुलासा ?
बैंक से नोटिस आने के बाद रेखी परिवार ने अपने वकील से बात की। इसमें सारे डॉक्यूमेंट्स चेक किए गए तो सामने आया कि जितना लोन लिया था उससे ज्यादा अमाउंट जमा कराई जा चुकी है। फिर भी लोन पेंडिंग है। वकील ने बताया कि ये लोन तो बनता ही नहीं हैं। क्योकि सुरजीत सिंह रेखी के नाम पर जिस डेट पर लोन दिया गया है, उनकी तो उस डेट से पहले ही मौत हो चुकी थी। डॉक्यूमेंट्स चेक करने पर पता चला कि एचएसवीपी से भी डॉक्यूमेंट्स को प्रोवाइड करवाया गया है।
: किसकी गलती, अब क्या होगा ?
इस मामले में पुलिस ने एचडीएफसी बैंक से इस लोन से सबंधित सभी डॉक्यूमेंट्स को मांगा है। किस अधिकारी ने किस नियम के अनुसार लोन दिया, उस बारे में पूछा गया है। वहीं एचएसवीपी के उस टाइम के अधिकारियों के बारे में पूछा गया है कि किसने कब और कैसे डॉक्यूमेंट्स प्रोवाइड करवाए। बैंक और एचएसवीपी के अधिकारियों पर गाज गिरनी लाजिमी है।
: पहली बार नहीं उठ हैं ऐसे सवाल
ऐसा पहली बार नहीं है कि एचएसवीपी के अफसरों और बाबुओं पर कोई सवाल खड़ा हुआ है। पहले भी कई बार एचएसवीपी में भ्रष्टाचार के मामले सामने आ चुके हैं। एचएसवीपी के बाबुओं से लोग डॉक्यूमेंट्स को ले जाते हैं।
- वर्ष 2018 में हरियाणा के सीएम के की फ्लाइंग स्क्वायड टीम ने यहां एक बड़ा नैक्सेस पकड़ा था। कई बाबुओं और अफसरों का नाम सामने आया था। इन पर आरोप था कि ये कमीशन लेकर फाइलें क्लियर करते हैं।
- दो महीने पहले ही एक प्लॉट को फर्जी तरीके से ट्रांसफर करने का मामला सामने आया था। इसमें ऑरिजनल अलॉटी की जगह फर्जी अलॉटी इस्टेट ऑफिस में आकर प्रॉपर्टी को ट्रांसफर करवा गया था। अफसरों से मिलीभगत कर पहले ही प्रॉपर्टी के डॉक्यूमेंट्स को निकलवा लिया गया था।
: दिखावे की कार्रवाई, आज तक खुद नहीं लिया कोई स्ट्राॅन्ग एक्शन... हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण में विजिलेंस विंग को भी बनाया हुआ है। पंचकूला में चीफ एडमिनिस्ट्रेटर खुद बैठते हैं। इसके बाद भी पंचकूला इस्टेट ऑफिस के अधिकारी या बाबुओं पर आज तक कोई भी स्ट्राॅन्ग एक्शन नहीं हुआ है। हर बार इस्टेट ऑफिस की गड़बड़ मिलने के बाद इंक्वायरी के ऑर्डर किए जाते हैं, लेकिन इंक्वायरी में या तो अपने अधिकारियों को क्लीन चीट दे दी जाती है या फिर पुलिस में एफआईआर के लिए बोल दिया जाता है। इस बार भी इस्टेट ऑफिस ने अपने बाबुओं की गलती नहीं निकाली है।
: कई चक्कर लगाए, अब हुई सुनवाई
सुरजीत रेखी के बेटे गुरमेहर

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