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Editorial

NBT EDIT-नौकरशाही की चमक

June 12, 2019 05:46 AM

COURTY NBT EDIT JUNE 12

नौकरशाही की चमक


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नौकरशाही से सीधा संवाद करने और उसे गतिशील बनाए रखने की नीति को अपने दूसरे कार्यकाल में भी जारी रखा है। उन्होंने सोमवार को विभिन्न मंत्रालयों के सचिवों के साथ बैठक की और उन्हें भविष्य के लिए जरूरी दिशा-निर्देश दिए। सबसे पहले तो प्रधानमंत्री ने उनके कामकाज की तारीफ की और अपनी चुनावी सफलता का श्रेय भी उन्हें दिया। उन्होंने साफ कहा कि आप सभी ने जिस कड़ी मेहनत से काम पूरा किया, उसी का परिणाम था कि चुनाव में हमारे पक्ष में सकारात्मक वोट पड़े। उन्होंने अधिकारियों को अपने-अपने मंत्रालय के लिए पांच साल की योजना तैयार करने को कहा और आश्वस्त किया कि योजनाओं को सौ दिनों के भीतर मंजूरी मिल जाएगी। मोदी ने कहा कि आप सभी अपने-आपको प्रधानमंत्री समझें और देश, समाज और खासकर गरीबों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए काम करें। अगर ऐसा करते हुए आपसे अनजाने में कोई गलती हो जाती है तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है। यह मेरी गलती होगी। इससे पहले शायद ही किसी प्रधानमंत्री ने नौकरशाहों को इस तरह से विश्वास दिलाया हो। मोदी ने कहा कि भारत को पांच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को ध्यान में रखकर एक रोडमैप तैयार करना होगा जिसमें गरीबी उन्मूलन और पानी से जुड़े मुद्दों को खासतौर से तवज्जो देने की जरूरत है। नौकरशाहों में इस तरह उत्साह भरना और काम के लिए प्रेरित करना नरेंद्र मोदी की कार्यशैली की विशेषता रही है। उनके पहले कार्यकाल के दौरान पीएमओ ने प्रशासन में सुधार के लिए विभिन्न विषयों पर सचिवों के आठ समूहों का गठन किया था। प्रधानमंत्री हर महीने विभिन्न राज्यों के सचिवों के साथ भी बातचीत करते रहे हैं जिसके सकारात्मक परिणाम निकले। सरकार की कई

गरीब समर्थक योजनाएं जमीन पर बेहतर ढंग से उतरीं और जरूरतमंदों तक पहुंचीं। नौकरशाही को सक्रिय रखने के साथ उसके स्वरूप में बदलाव भी मोदी सरकार का अजेंडा रहा है। सरकार ने लैटरल एंट्री के जरिए अपने विभिन्न मंत्रालयों में 9 प्रफेशनल्स को संयुक्त सचिव के रूप में नियुक्त किया। इनमें से ज्यादातर प्राइवेट सेक्टर से हैं। इन्होंने कुछ ही महीने पहले कार्यभार संभाला है। सरकार इस प्रयोग को और विस्तार देने जा रही है। वह संयुक्त सचिव स्तर के चालीस फीसदी पदों पर गैर आईएसएस अफसरों को रखना चाहती है। अभी तक

सभी अफसरों की नियुक्ति संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के जरिए होती रही है, लेकिन सरकार अब नीति आयोग के जरिए भी अधिकारियों को नियुक्त करना चाहती है। सरकार का मानना है कि विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ अपने-अपने फील्ड में सामान्य आईएएस की तुलना में बेहतर रिजल्ट दे सकते हैं। न्यूजीलैंड, ब्रिटेन और अमेरिका में यह प्रयोग काफी सफल रहा है। उम्मीद की जानी चाहिए कि मोदी सरकार भारतीय नौकरशाही के ढांचे और माइंडसेट में बदलाव

लाएगी जिसका लाभ देश के हर वर्ग को मिलेगा।
पीएम के साथ सचिवों की बैठक

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