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Haryana

रणदीप सिंह सुरजेवाला, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के मीडिया इंचार्ज व विधायक बयान जारी किया

June 09, 2019 02:41 PM

हरियाणा के युवाओं का भविष्य हुआ अंधकार

सरकारी नौकरियों में धांधलियों का लगा अंबार

पिछले पाँच साल में हरियाणा में हुई सभी भर्तियों के सारे उम्मीदवारों के लिखित परीक्षाओं और इंटरव्यू के नम्बर सार्वजनिक किए जांए

खट्टर सरकार जब से आई है तब से दिन प्रतिदिन सरकारी नौकरी की भर्तियों में फर्जीवाड़े और भष्टाचार के मामले सामने आ रहे हैं। सरकार एक ओर तो निष्पक्षता का दावा करती है वहीं दूसरी ओर पिछले दरवाज़े से बड़े पैमाने पर भर्तियों में फर्जीवाड़ा चल रहा है। नौकरियों में हो रहे फर्जीवाड़े को जनता से छिपाने के लिए धांधली के नए-नए तरीके आजमाए जा रहे हैं। हर रोज पेपर लीक हो रहे है, नए-नए घोटाले हो रहे हैं फिर भी फर्जीवाडों के खुलासों पर सरकार चुप्पी साधे हुए बैठी है, जिससे प्रदेश के युवाओं के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

1. लिखित परीक्षाओं और इटरव्यू के नम्बर किए जाएं सार्वजनिक- युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने में माहिर खट्टर सरकार युवाओं की आँखों में धूल झोंकने का प्रयास कर रही है। यदि सरकार अपने आपको ईमानदार होने का दावा करती है तो उसे पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा 22 मई, 2014 को दिए फैसले के अनुसार सभी भर्तियों की लिखित परीक्षाओं और इटरव्यू के नम्बर सार्वजनिक करने चाहिए, जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा और सरकार के फर्जीवाड़े का खुलासा भी हो जाएगा। दुःख की बात है की पिछले पांच साल से खट्टर सरकार उस स्पस्ट फैसले का पालन नहीं कर रही।

2. हरियाणा स्टाफ सलेक्शन कमीशन भर्ती घोटाले की जांच में अडंगा डालने का काम कर रही सरकार - प्रदेश सरकार ने हरियाणा स्टाफ सलेक्शन कमीशन भर्ती घोटाले के असली दोषियों को बचाने और जनता के सामने असलियत आने से रोकने के लिए पंचकुला जिला अदालत द्वारा 4 दिसंबर, 2018 को जारी आदेश के मुताबिक दो महीने में पूरी जांच करने के आदेश की अनुपालना नहीं की है। पंचकूला अदालत के बार- बार आदेशों के बावजूद जांच पूरी नहीं की जा रही और पिछले 7 महीनों से जांच को लगातार लटकाया जा रहा है। इसी प्रकार इस मामले में जब पंजाब एंव हरियाणा हाईकोर्ट ने 23 जनवरी 2019 को इसे बड़ा घोटाला बताते हुए सीबीआई जांच के आदेश देने की बात की तो प्रदेश सरकार ने सीबीआई जांच में टाल-मटोल किया, जिससे सरकार की मंशा का साफ पता चलता है।

3. जॉब स्कैम में गिरफ्तार एचएसएससी कर्मचारियों की कॉल डिटेल्स और ट्रांसक्रिप्शन किए जाएं सार्वजनिक- पिछले वर्ष नौकरी लगवाने के नाम पर हुए जॉब स्कैम में गिरफ्तार एचएसएससी कर्मचारियों की कॉल डिटेल्स और ट्रांसक्रिप्शन सार्वजनिक करने से सरकार क्यों हिचक रही है, क्या सरकार को डर है कि इन कॉल डिटेल्स के सार्वजनिक होने से सरकार से जुड़े बड़े-बड़े सफेदपोश लोगों के काले कारनामे उजागर हो जाएंगे? हमारी स्पष्ट मांग है की आरोपियों की सभी कॉल डिटेल्स और ट्रांसक्रिप्शन सार्वजनिक की जाएं।

4. सरकार ने किया परीक्षाओं में धाँधली का वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम, हरियाणा लोकसेवा आयोग की परीक्षा में नए खुलासे से एक और फर्जीवाड़े का इशारा- पिछले 5 वर्षों में प्रदेश की खट्टर सरकार ने युवाओं के साथ नौकरियों के नाम पर भद्दा मजाक किया है, युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने में माहिर निक्कमी खट्टर सरकार ने परीक्षाओं में धांधली का वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम किया है। एक और फर्जीवाड़े की ओर इशारा करते हुए हाल ही में हरियाणा लोकसेवा आयोग की परीक्षा में विचित्र संयोग सामने आया है, इस परीक्षा में चुने गये 57 ऐसे परीक्षार्थी पाये गये हैं जो 'इत्तिफ़ाक़' से या तो आगे या पीछे बैठे थे। जो बेहद ही शर्मनाक और आपत्तिजनक है। इस प्रकरण की तुरंत जांच होनी चाहिए, दोषियों को सज़ा मिलनी चाहिए व लोकसेवा परीक्षा रद्द कर पुन: करानी चाहिये। पिछले दिनों नायब तहसीलदार पेपर लीक मामला इस सरकार के निकम्मेपन को एक बार फिर उजागर किया है, जब सरकार मान रही है कि पेपर लीक हुआ तो फिर पेपर को रद्द क्यों नहीं किया जा रहा।

5. सरकार के फर्जीवाड़े के कारण 35 प्रतिशत से ज्यादा भर्तियों के नतीजे लटके - पिछले पांच सालों में एचएसएससी द्वारा 90 हजार से ज्यादा भर्तियां निकाली गई, लेकिन 35 प्रतिशत से ज्यादा भर्तियों के नतीजे लटके हुए हैं या भारी संख्या में कई-कई साल बीत जाने के बाद भर्तियां रद्द करके दोबारा की जा रही हैं। खट्टर सरकार की अंधेरगर्दी के कारण प्रदेश में दर्जनों पेपर लीक हो चुके हैं, हजारों भर्तियों के मामले विभिन्न अदालतों में चल रहे हैं, बार-बार भर्तियां रदद् की जा रही है।

6. चेयरमैन भारती की नियुक्ति के साथ ही आरंभ हो गया था एचएसएससी में फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार का खेल- आयोग में भर्ती का खेल तो एचएसएससी के चेयरमैन भारती की नियुक्ति के साथ ही आरंभ हो गया था, क्योंकि चेयरमैन पद के लिए आवेदन का आखिरी दिन, 31 दिसंबर, 2014 था, लेकिन भारती का आवेदन ही 23 फरवरी, 2015 को प्राप्त हुआ था। यही नहीं, भारती की पेहवा नगर पालिका के चेयरमैन पद के लिए 70 लाख रु. लिए जाने की सीडी सारे प्रदेश ने वायरल ऑडियो में सुनी। जब चेयरमैन ही भ्रष्टाचार में लिप्त हो तो इस आयोग में फैले भ्रष्टाचार का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

कांग्रेस की सरकार आते ही सारे मामलों की निष्पक्ष तरीके से जांच करवाई जाएगी और दोषियों को सलाखों में डाला जाएगा।

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