Wednesday, June 19, 2019
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National

जनता के भरोसे का मोदी को ब्लैंक चैक

May 24, 2019 02:38 PM

                 

 
मोदी जी ने अपनी जीत को एक नये भारत के निर्माण के रूप में प्रस्तुत किया है। 17वीं लोकसभा के  चुनावी नतीजे कई मायनों में चैंकाने वाले हैं। कांग्रेस ने 17 राज्यों में खाता ही नहीं खोला अर्थात डक पे आउट-क्रिकेट की भाषा में, हो गई। मोदी के नाम पर एन डी ए को प्रचंड बहुमत मिला। मोदी जी ने अपने भाषण में ठीक ही कहा कि जनता जर्नादन ने इस फकीर की झोली भर   दी - वो अपने को फकीर कह रहे हैं तो अखबार उन्हें ‘‘शाह-शहनशाह’’ जैसे टाइटलों से नवाज रही है। मोदी जी के जीत के जो कारण हैं, उसी में राहुल गांधी या कांग्रेस की हार के मायने छिपे हैं। इन चुनावी परिणामों में भारतीय जनतंत्र, राजनीति तथा समाज रचना के स्वरूप में परिवर्तन के लिये अद्भुत चेतना प्रदर्शित हुई है। जहां मोदी जी अपने में भारत की नई भावना तथा उसमें श्रेष्ठता स्थापित करने में सफल हुए हैं, वहीं सेवा, शम-दम, ध्येय के लिये जीवन समर्पित करने की अपनी उत्कंठा को वो हर भारतीय में देखने के लिये अपने को आदर्श प्रस्तुत करने में सिद्धहस्त हैं और उसमें उन्होंने सफलता पाई भी है। गीता का यह वाक्य, जहां धर्म है, वहां विजय है, उसको रेखांकित कर, सैक्लूरिजम तथा जाति-पाति के बंधनों के खत्म होने तथा नये प्रकार की राजनीति के सूत्रपात करते दिखाई पड़ते हैं। उनका परिणामों के बाद का भाषण, वास्तव में ऐसा था, मानो कि किसी पैगम्बर का अपने अनुयायियों के लिये कोई अद्भुत संदेश हो। भारतीय राजनीति पटल पर मोदी ने स्वयं को एक चमत्कारी व्यक्तित्व तथा जटिलताओं को तोड़ नई राजनैतिक चेतना का संचार करने वाले के रूप में प्रस्तुत किया है। देखना है कि वो इन विचारों व वाक्यों को कितना अमलीजामा पहना पाते हैं। भय और पृथकत्ता की राजनीति से हटकर भारतीय सभ्यता के प्राचीन सूत्रों ‘‘संगच्छध्वम् संवदध्वम्’’ की विराटता को समझते हुए नये हिन्दोस्तान की बात की है। उन्होंने यह भी स्वीकारा तथा स्पष्ट किया कि वो जो बात सार्वजनिक रूप से कहते हैं, उन्हें जीवन में जीते भी हैं, यही सारी नैतिकता छिपी है। भारत के लोगों ने सदैव नैतिक व आत्मिक साधना को महत्व दिया है। मनुष्य सर्वप्रथम स्वयं के उत्कर्ष की साधना - अर्थात आत्म रूप को विकसित करता है, फिर अपनी साधना को लोक साधना, समाज साधना, समूह साधना, राष्ट्र साधना से लांघता हुआ विश्व साधना की ओर अग्रसर होता है। भारत एक विचार साधना रूप है, जिसमें संयंम, संतुलन, सहिष्णुता, सद्भाव, सदाशयता आदि का नैतिक आचरण अपेक्षित है। भारत अंतर्विरोध का पुंज हैं, विश्वासों, विचारों, जीवनशैलियों में विविधता लिये हैं, उन सबमें न्याय, स्वतन्त्रता, समानता की भावना बनाये रखने, संप्रभुता के संरक्षण के साथ-साथ उन्नति के अवसर उपलब्ध करवाना हमारा लक्ष्य हो, उसके प्रति समर्पण, अपने संकल्पों के प्रति तत्परता तथा वचनबद्धता ही इस विराट जीत, जोकि जनता ने एन डी ए को सौंपी है, उसके बदले में भारत की जनता चाहेेगी।
अंत में जावेद अख्तर की प्रसिद्ध पंक्तियां ‘‘जो कामयाबी है उसकी खुशी तो पूरी है, मगर ये याद रखना बहुत जरूरी है कि दास्तान हमारी अभी अधूरी है, बहुत से होठों पे मुस्कान आ गई लेकिन, बहुत से आंखे हैं जिनमें अभी नमी तो है’’
 
 
 
            डा0 क.कली
 
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