Wednesday, June 19, 2019
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National

भूतपूर्व राष्ट्रपति अपने ट्विटर पर भारत के स्टेट एम्ब्लेम का कानूनन इस्तेमाल नहीं कर सकते-हेमंत कुमार

May 22, 2019 11:53 AM

चंडीगढ़ - गत दिवस भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुख़र्जी द्वारा अपने निजी ट्विटर हैंडल (अकाउंट) पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ई.वी.एम.) के साथ कथित छेड़छाड़ किये जाने बाबत विभिन्न विपक्षी दलों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों पर अपना निजी बयान जारी कर डाला गया। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने जब इसे देखा तो वह यह देखकर हैरान रह गए कि मुख़र्जी द्वारा जारी उक्त संक्षिप्त बयान के नीचे उनके कार्यालय अर्थात भारत के पूर्व राष्ट्रपति के कार्यालय की सील लगी हैं जिसके भीतर भारत का राज्य संप्रतीक ( स्टेट एम्ब्लेम ) भी दिखाई दे रहा है। प्रश्न यह है कि क्या भारत के राष्ट्रपति अपना कार्यकाल पूर्ण होने के बाद भी अपने निजी दस्तावेजों पर भारत के राज्य संप्रतीक प्रयोग कर सकते है। जब इस सम्बन्ध में हेमंत ने प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों का गहन अवलोकन किया तो उन्हें ज्ञात हुआ कि कानूनन ऐसा नहीं किया जा सकता। इस बाबत जानकारी देते हए हेमंत ने बताया कि दिसंबर, 2005 में तत्कालीन मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यू.पी.ए-प्रथम सरकार ने भारत का राज्य संप्रतीक ( अनुचित प्रयोग प्रतिषेध ) अधिनियम, 2005 भारतीय संसद द्वारा अधिनियमित करवाया था। इसी अधिनियम के अंतर्गत तत्कालीन केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा अक्टूबर, 2007 भारत का राज्य संप्रतीक (प्रयोग का विनियम) नियम, 2007 भी बनाये गए थे जिसकी प्रथम अनुसूची में स्पष्ट तौर पर दिखाए गए संवैधानिक या वैधानिक पदों पर आसीन प्राधिकारियों ही भारत के राज्य संप्रतीक का कानूनी तौर पर प्रयोग कर सकते हैं एवं उसमे कहीं भी भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति का सन्दर्भ नहीं है। एडवोकेट ने यह भी बताया कि उक्त 2007 नियमो में जुलाई, 2010 में गृह मंत्रालय द्वारा के गजट अधिसूचना जारी कर संशोधन भी किया गया था परन्तु उसमें भी भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति का सन्दर्भ उक्त नियमों कि प्रथम अनुसूची में नहीं डाला गया है। बहरहाल, इसी बीच हेमंत ने प्रणब मुख़र्जी, जिन्हे वो देश का एक वरिष्ठम राजनीतिज्ञ एवं प्रख्यात कानूनविद मानते हैं, को एक ट्वीट मैसेज कर इस सम्बन्ध में अवगत करवाया है हालांकि अब तक उनकी और से कोई जवाब नहीं आया।

 
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