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HSIIDE-इंडस्ट्रियल प्लॉट्स के नक्शे पास न होने से नहीं कर पा रहे कंस्ट्रक्शन एचएसवीपी और एचएसआईआईडीसी के अफसर एक-दूसरे पर थौंप रहे जिम्मेदारी

May 21, 2019 05:57 AM

COURTESY DAINIK BHASKAR MAY 21




इंडस्ट्रियल प्लॉट्स के नक्शे पास न होने से नहीं कर पा रहे कंस्ट्रक्शन
एचएसवीपी और एचएसआईआईडीसी के अफसर एक-दूसरे पर थौंप रहे जिम्मेदारी

हरियाणा सरकार ने एक साल पहले इंडस्ट्रियल एरिया की डेवलपमेंट और मेंटेनेंस का जिम्मा हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड को सौंपने की घोषणा की थी। इससे पहले इंडस्ट्रियल एरिया की डेवलपमेंट और मेंटेनेंस का जिम्मा हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के पास था। एचएसवीपी से एचएसआईआईडीसी को इंडस्ट्रियल एरिया की डेवलपमेंट और मेंटेनेंस का काम ट्रांसफर होने के बाद से ही इंडस्ट्रियलिस्ट्स को अपने कामों के लिए परेशान होना पड़ रहा है। कभी वे एचएसवीपी और कभी एचएसआईआईडीसी के चक्कर काट रहे हैं। एचएसवीपी के अफसर यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि इंडस्ट्रियल एरिया की डेवलपमेंट व मेटेनेेंस अब उनसे लेकर एचएसआईआईडीसी को सौंप दी गई हैं इसलिए अपने कामों के लिए इंडस्ट्रियलिस्ट्स एचएसआईआईडीसी से कॉन्टैक्ट करें। वहीं दूसरी ओर एचएसआईआईडीसी के अफसरों का तर्क होता है कि एचएसवीपी ने अभी उन्हें इंडस्ट्रियल एरिया का रिकॉर्ड नहीं सौंपा हैं जिस वजह से नक्शा पास कराने सहित कई अन्य काम अभी वह नहीं कर सकते हैँ। अब तीन-तीन डिपार्टमेंट इन्वॉल्व हो गए हैं। एचएसआईआईडीसी फाइल को टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट को भेजता है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट की ओर से सेक्रेटरी इंस्पेक्शन और जोनिंग इंस्पैक्शन को इसे रैफर किया जा रहा है। ये डिपार्टमेंट मौके पर जाकर वॉयलेशन चैक करते हैं और उसके बाद अपनी रिपोर्ट देते हैं। रनिंग इंडस्ट्री ट्रांसफर होने से पुरानी बिल्डिंग तोड़कर नई बनाने के मामले में भी वॉयलेशन चैक कराई जा रही है जबकि नई कंस्ट्रक्शन में चैक होना चाहिए कि नए किए गए निर्माण में किसी तरह की वॉयलेशन तो नहीं की गई है। फ्री होल्ड प्लॉट होने पर भी इंडस्ट्रियलिस्ट्स को बेवजह तंग किया जा रहा है। यह प्रोसेस काफी लंबा होने के कारण बीते एक साल में नई पॉलिसी के आधार पर किसी इंडस्ट्रियलिस्ट्स को बेनीफिट नहीं मिल पा रहा है।
: केस स्टडी...
केस 1- इंडस्ट्रियल एरिया में प्लॉट नंबर 294 के ऑनर रमेश मेहता बढ़ाए गए फ्लोर एरिया रेशो के मुताबिक कंस्ट्रक्शन करना चाहते थे। ग्राउंड फ्लोर पहले ही बना है लेकिन अब फर्स्ट फ्लोर का निर्माण किया है। इसका नया नक्शा भी अप्रूव कराना है। एचएसआईआईडीसी के अधिकारी कहते हैं कि एचएसवीपी इसकी अप्रूवल देगा। वहीं एचएसवीपी की दलील है कि वह इंडस्ट्रियल एरिया एचएसआईआईडीसी को ट्रांसफर कर चुके हैं। अब एचएसआईआईडीसी ही नया नक्शा अप्रूव करेगा।
केस 2- प्लॉट नंबर 300 के मालिक ओपी चुग भी फर्स्ट फ्लोर का निर्माण करा रहे हैं। नया नक्शा अप्रूव कराने के लिए कभी एचएसवीपी तो कभी एचएसआईआईडीसी के चक्कर काट रहे हैं। दोनों ही एक-दूसरे पर इसकी अप्रूवल का जिम्मा सौंप रहे हैं। कोई भी काम करने को तैयार नहीं है। करनाल में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने एफएआर बढ़ाने की भी घोषणा की थी। दो साल पहले तक यहां 1.25 एफएआर था जिसे बढ़ाकर साल 2016 में 1.50 कर दिया गया। इंडस्ट्रियलिस्ट्स की मांग पर मुख्यमंत्री इसे बढ़ाकर 2.0 करने की घोषणा कर चुके हैं लेकिन अफसर इसे लागू नहीं कर रहे।
संजीव रामपाल | पंचकूला
हरियाणा सरकार ने एक साल पहले इंडस्ट्रियल एरिया की डेवलपमेंट और मेंटेनेंस का जिम्मा हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड को सौंपने की घोषणा की थी। इससे पहले इंडस्ट्रियल एरिया की डेवलपमेंट और मेंटेनेंस का जिम्मा हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के पास था। एचएसवीपी से एचएसआईआईडीसी को इंडस्ट्रियल एरिया की डेवलपमेंट और मेंटेनेंस का काम ट्रांसफर होने के बाद से ही इंडस्ट्रियलिस्ट्स को अपने कामों के लिए परेशान होना पड़ रहा है। कभी वे एचएसवीपी और कभी एचएसआईआईडीसी के चक्कर काट रहे हैं। एचएसवीपी के अफसर यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि इंडस्ट्रियल एरिया की डेवलपमेंट व मेटेनेेंस अब उनसे लेकर एचएसआईआईडीसी को सौंप दी गई हैं इसलिए अपने कामों के लिए इंडस्ट्रियलिस्ट्स एचएसआईआईडीसी से कॉन्टैक्ट करें। वहीं दूसरी ओर एचएसआईआईडीसी के अफसरों का तर्क होता है कि एचएसवीपी ने अभी उन्हें इंडस्ट्रियल एरिया का रिकॉर्ड नहीं सौंपा हैं जिस वजह से नक्शा पास कराने सहित कई अन्य काम अभी वह नहीं कर सकते हैँ। अब तीन-तीन डिपार्टमेंट इन्वॉल्व हो गए हैं। एचएसआईआईडीसी फाइल को टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट को भेजता है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट की ओर से सेक्रेटरी इंस्पेक्शन और जोनिंग इंस्पैक्शन को इसे रैफर किया जा रहा है। ये डिपार्टमेंट मौके पर जाकर वॉयलेशन चैक करते हैं और उसके बाद अपनी रिपोर्ट देते हैं। रनिंग इंडस्ट्री ट्रांसफर होने से पुरानी बिल्डिंग तोड़कर नई बनाने के मामले में भी वॉयलेशन चैक कराई जा रही है जबकि नई कंस्ट्रक्शन में चैक होना चाहिए कि नए किए गए निर्माण में किसी तरह की वॉयलेशन तो नहीं की गई है। फ्री होल्ड प्लॉट होने पर भी इंडस्ट्रियलिस्ट्स को बेवजह तंग किया जा रहा है। यह प्रोसेस काफी लंबा होने के कारण बीते एक साल में नई पॉलिसी के आधार पर किसी इंडस्ट्रियलिस्ट्स को बेनीफिट नहीं मिल पा रहा है।
: समस्याएं कम होने के बजाय बढ़ गई...हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने इंडस्ट्रियल एरिया की डेवलपमेंट व मेंटेनेंस का जिम्मा एचएसवीपी से लेकर एचएसआईआईडीसी को सौंपने के बाद ट्रांसफर पीरियड व प्रोसेस इतना लंबा हो गया है कि इंडस्ट्रियलिस्ट्स की समस्याएं कम होने की बजाए बढ़ गई हैं। ऑनलाइन प्रोसेस में इंडस्ट्रियलिस्ट्स को ऑनलाइन अप्लाई और ऑनलाइन परमिशन मिलने की सुविधा मिलनी चाहिए। -विष्णु गोयल, प्रदेश अध्यक्ष, हरियाणा चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री
कुछ टेक्नीकल खामियां आ रही हैं
हरियाणा सरकार के निर्देशों पर एचएसवीपी इंडस्ट्रियल एरिया से संबंधित रिकॉर्ड एचएसआईआईडीसी को सौंप चुका है। कुछ टेक्निकल खामियां आ रही हैं। नक्शे अभी एचएसआईआईडीसी को सौंपे जाने हैं। इन टेक्निकल खामियों को सुलझाने के प्रयास हो रहे हैं। इसके लिए मीटिंगों का दौर जारी है। इसका जल्द ही समाधान कर लिया जाएगा। एचएसवीपी की कोशिश होगी कि अगले दो से तीन हफ्तों में इंडस्ट्रियलिस्ट्स की समस्याओं का समाधान हो जाए। एचएसआईआईडीसी को इंडस्ट्रियल एरिया की डेवलपमेंट व मेंटेनेंस का जिम्मा पूरी तरह सौंप दिया जाएगा। -आशुतोष राजन, इस्टेट अफसर, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण
पहले स्टेटस चेक किया जा रहा
इंडस्ट्रियल एरिया में कुल 960 प्लॉट हैं। इनमें से एचएसवीपी ने 650 प्लॉट्स की फाइलें एचएसआईआईडीसी को ट्रांसफर की हैं। ऐसे में हम फैसला ले चुके हैं कि जिन प्लाॅट्स का पूरा रिकॉर्ड ट्रांसफर हो चुका है, उसे एचएसआईआईडीसी पास कर दे। जो फाइलें अभी ट्रांसफर होनी हैं या अंडर प्रोसेस हैं, उन्हें एचएसवीपी पास करे। इस वजह से फैमिली ट्रांसफर या थर्ड पार्टी ट्रांसफर के लिए आई फाइलों के प्लॉट का पहले स्टेटस चेक किया जा रहा है। ट्रांसफर से पहले वॉयलेशन भी चेक कराई जा रही है। किसी तरह की वॉयलेशन है तो इसके लिए कम्पाउंडेबल फीस प्लॉट बेचने वाले से ली जाएगी ताकि खरीदार बाद में परेशान न हो। इंडस्ट्रियल एरिया बने कई साल बीत चुके हैं। यहां बने 80 परसेंट प्लॉट्स में वॉयलेशन हैं जिसे ट्रांसफर करने से पहले चेक कराया जाता है। -प्रियंका, डीटीपी, एचएसआईआईडीसी

 
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