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Haryana

जजपा समर्थक चार बागी इनेलो विधायकों की तरह नसीम अहमद भी पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल

May 16, 2019 09:21 PM

चंडीगढ़ - हरियाणा विधानसभा के स्पीकर कँवर पाल ने इनेलो पार्टी द्वारा अपने चार बागी विधायकों के विरूद्ध दल-बदल विरोधी कानून के तहत उन्हें सदन की सदस्यता से निष्कासित करने सम्बन्धी याचिकाओं पर जवाब देने के लिए उक्त विधायकों को एक माह का समय और दे दिया गया है. ज्ञात रहे कि इनेलो से टूटकर गत वर्ष बनी जननायक जनता पार्टी (जजपा ) को अपना खुला समर्थन दे रहे चार इनेलो विधायकसिरसा के डबवाली हलके से   नैना सिंह चौटाला,  चरखी दादरी के दादरी से राजदीप फौगाट, हिसार  के उकलाना से अनूप धानक एवं जींद  के नरवाना से पिरथी सिंह नंबरदार  के विरूद्ध गत मार्च माह में इनेलो पार्टी द्वारा दायर की गयी है स्पीकर के समक्ष लंबित है.लगभग दो माह पहले  26 मार्च को   स्पीकर  ने  नवंबर, 2014 से सदन  में विपक्ष के नेता  रहे  अभय सिंह चौटाला को इस पद से हटा दिया था. इसकी वजह थी  दो तत्कालीन इनेलो  विधायकों - सर्वप्रथम 20 मार्च को हिसार के नलवा हलके  से विधायक रणबीर सिंह गंगवा एवं इसके पश्चात  24 मार्च को  पलवल ज़िले के हथीन से विधायक केहर सिंह रावत का अपनी विधानसभा सदस्यता से त्यागपत्र देना एवं उक्त तिथियों से ही स्पीकर द्वारा उन्हें  स्वीकार किया जाना  जिसके  फलस्वरूप सदन में इनेलो विधायक दल के सदस्यों की संख्या  तत्कालीन 17 से दो घटकर  15 हो गयी थी जो की कांग्रेस पार्टी के 17  विधायकों की वर्तमान संख्या से दो कम है. लिखने योग्य है कि उक्त दोनों विधायक मार्च माह में ही  भाजपा पार्टी में  शामिल भी हो गए हैं. इसके बाद गत माह अप्रैल माह के अंत में इनेलो पार्टी के मेवात ज़िले के फ़िरोज़पुर झिरका से  विधायक नसीम अहमद ने भी कांग्रेस पार्टी में शामिल होने का एलान किया  परन्तु उन्होंने आज तक  रणबीर गंगवा एवं केहर सिंह की तरह  विधानसभा सदस्यता से अपना त्यागपत्र नहीं दिया गया है और न ही  इनेलो पार्टी द्वारा जैसे जजपा को खुला समर्थन दे रहे अपने चार बागी  विधायकों के  विरूद्ध स्पीकर के समक्ष याचिकाएं दायर कर कार्यवाही की गयी वैसा अब तक नसीम अहमद के सम्बन्ध में नहीं किया गया है.  पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची में दल-बदल विरोधी कानून के अनुसार  अगर  किसी पार्टी विशेष के नाम  एवं चुनाव चिन्ह के आधार पर चुना गया विधायक  अगर उस पार्टी को छोड़कर कोई और पार्टी में शामिल होता  है, तो उसे  स्पीकर द्वारा दल-बदल करने का दोषी मानते हुए इस  आधार पर सदन की सदस्यता से निष्कासित  किया जा सकता है. हालांकि अगर ऐसा  विधायक दूसरी पार्टी में शामिल होने से पहले अपनी   सदन की सदस्यता से त्यागपत्र दे देता है, फिर उस पर दल-बदल करने का  मामला नहीं चलाया जा सकता. ज्ञात रहे कि इस वर्ष  23 मार्च को तत्कालीन विपक्ष के नेता  अभय  चौटाला द्वारा अपने पद से त्यागपत्र देने बाबत घोषणा भी की गयी परन्तु यह सशर्त थी क्योंकि इसके साथ उन्होंने पत्र लिखकर स्पीकर  से  इनेलो विधायक दल  के बागी  विधायकों के विरूद्ध  दल-बदल कानून के तहत कार्यवाही करते हुए की गुहार की गयी.  परन्तु  स्पीकर महोदय द्वारा इस तिथि से पहले अर्थात  20 मार्च  से ही रणबीर गंगवा का  त्यागपत्र स्वीकार कर दिया जिससे अभय चौटाला को  स्पीकर द्वारा उन्हें 26 मार्च को  इस पद से हटा दिया गया था. सनद रहे कि पिछले लगभग नौ  महीनो में  दो इनेलो विधायकों-- पहले अगस्त, 2018 में  जींद से हरी चंद मिड्डा और फिर जनवरी, 2019 में  पेहोवा से जसविंदर सिंह संधू की मृत्यु के कारण इनेलो  पार्टी की सदस्यता संख्या मूल रूप में 19 से घटकर  17 हो गई थी. इस सबके फलस्वरूप वर्तमान इनेलो विधायक दल के स्थान पर 17 सदस्यी कांग्रेस पार्टी ने  सदन के विपक्ष के पद पर दावा जताया हालांकि  इस विषय में स्पीकर महोदय ने सदन में कांग्रेस विधायक दल की नेता  किरण चौधरी और हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी  के अध्यक्ष अशोक तंवर को एक माह से भी पहले  पत्र लिखकर सम्बंधित पार्टी  विधायक का नाम तय कर स्पीकर को सूचित करने को कहा है जिसे इस पद पर नामित किया जा सके, परन्तु अब तक कांग्रेस पार्टी ने इस पर स्पीकर को अपना जवाब नहीं भेजा है जिससे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि संभवतः मौजूदा कांग्रेसी विधायक किरण चौधरी का इस पद पर चयन करने बाबत पूर्णतः सहज नहीं हैं. बहरहाल, अब प्रश्न उठता है की क्या इनेलो पार्टी अपने फ़िरोज़पुर झिरका  से मौजूदा विधायक नसीम अहमद द्वारा कांग्रेस पार्टी में शामिल होने पर एवं इसके पूर्व  अपनी विधानसभा सदस्यता  से  त्यागपत्र न देने पर क्या  उनके विरूद्ध स्पीकर महोदय को दल-बदल विरोधी  कानून के तहत लिखित शिकायत देगी अथवा नहीं. यहाँ यह भी लिखने योग्य है कि फरीदाबाद निट क्षेत्र से इनेलो के एक और मौजूदा विधायक नागेंद्र भड़ाना भी काफी समय से भाजपा पार्टी एवं सत्तारूढ़ खट्टर सरकार के पक्ष में बयान देते रहे हैं परन्तु आज तक इनेलो पार्टी द्वारा उनके विरूद्ध कोई अनुसाशनात्मक कार्यवाही नहीं की गयी है. 

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