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चंडीगढ़ में इस बार दोहरी चुनौती से जूझ रही हैं किरण खेर!

May 16, 2019 05:42 AM

COURTESY NBT MAY 16
पवन बंसल
किरण खेर
पिछले चुनाव में कांग्रेस के पवन बंसल को 70 हजार से ज्यादा वोट से हराया था
चंडीगढ़• गुलशन राय खत्री, चंडीगढ़

 

पंजाब और हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ लोकसभा सीट पर इस बार चुनावी जंग बेहद दिलचस्प हो गई है। हालांकि पिछली बार ऐक्ट्रेस और बीजेपी उम्मीदवार किरण खेर ने कांग्रेस के दिग्गज नेता पवन बंसल को 70 हजार से अधिक मतों से मात दी थी लेकिन इस बार खेर के लिए राह आसान नजर नहीं आ रही। उन्हें दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। चुनाव मैदान में अपने विरोधी कांग्रेस उम्मीदवार से तो टक्कर लेनी ही पड़ रही है, साथ ही उन्हें पार्टी के भीतर भी विरोधी गुट का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि बीजेपी ने अपने आला नेताओं को एक्टिव करके भितरघात रोकने की कोशिश शुरू कर दी है लेकिन इसके बावजूद बीजेपी के लिए इस बार चंडीगढ़ की राह बेहद मुश्किल नजर आ रही है।

जिसकी सरकार, उसी का उम्मीदवार : चंडीगढ़ के साथ यह संयोग रहा है कि देश की जनता जिसे केंद्र में सरकार बनाने के लिए चुनती है, चंडीगढ़ की जनता भी प्राय: उसी पार्टी के उम्मीदवार को जिताती है। यह सिलसिला लंबे अरसे से चलता आ रहा है। इसी सीट से 1996 और 1998 में बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीत चुके सत्यपाल जैन का कहना है कि 1977 में भी जब जनता पार्टी जीती, तो यहां से इसी पार्टी के कृष्णकांत सांसद चुने गए थे। 1991, 2004 और 2009 में कांग्रेस उम्मीदवार जीते तो सरकारें भी कांग्रेस की ही बनीं। 2014 में भी यही सिलसिला बरकरार रहा। सीट बीजेपी की किरण खेर ने जीती और केंद्र में बीजेपी की सरकार बनी।

क्यों है तगड़ी टक्कर/ : इस सीट पर तगड़ी टक्कर की वजह यही है कि कांग्रेस के पवन बंसल पर फिर से भरोसा जताया है। उन्हें मजबूत उम्मीदवार माना जाता है। वह इस सीट पर चार बार सांसद रह चुके हैं। हालांकि पिछली बार उन्हें किरण खेर के हाथों हार झेलनी पड़ी थी लेकिन उस वक्त देश भर में मोदी लहर भी चल रही थी और आम आदमी पार्टी भी मजबूत थी। पिछले चुनाव में आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार गुल पनाग ने ही लगभग 24 फीसदी वोट हासिल कर लिए थे, जबकि पवन बंसल को 27 फीसदी वोटों से ही संतोष करना पड़ा था। इस तरह से कांग्रेस और आप का वोट बंटने का फायदा किरण खेर को मिला था और वह 42 फीसदी वोट लेकर भी बंसल को 70 हजार के अंतर से हराने में कामयाब हो गई थीं। यहां 70 फीसदी वोटर शहरी हैं जबकि 20 फीसदी स्लम बस्तियों में रहने वाले और दस फीसदी देहातों में रहने वाले हैं। शहरी सीट होने की वजह से यहां न तो जात-पात मुद्दा बनता है और न ही धर्म।

इस बार समीकरण बदले : इस बार हालात बदले हुए हैं। आम आदमी पार्टी ने हरमोहन को उम्मीदवार बनाया है लेकिन पहले जैसा जलवा कायम नहीं रह सका है। ऐसे में बंसल मजबूती से चुनाव मैदान में हैं और किरण खेर पर चंडीगढ़ को पीछे ले जाने के आरोप लगा रहे हैं। किरण खेर अपने सांसद निधि फंड का इस्तेमाल करने से लेकर केंद्र सरकार के कामकाज और राष्ट्रवाद को मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही हैं, जबकि बंसल उन्हें स्थानीय मुद्दों पर लगातार घेर रहे हैं। खेर लगातार कह रही हैं कि उन्होंने लोकसभा में जनता की आवाज बनकर काम किया है और चंडीगढ़ को स्मार्ट सिटी बनाने समेत शहर को संवारने का कार्य किया है

 
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