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National

हिंसा से क्या मोड़ लेगी बंगाल की सियासत

May 16, 2019 05:35 AM

COURTESY NBT MAY 16

हिंसा से क्या मोड़ लेगी बंगाल की सियासत/


30
% से अधिक वोट की उम्मीद है पार्टी को इस बार
10
प्रतिशत वोट ही मिले थे बीजेपी को पिछले विधानसभा में


17
फीसदी वोट मिले थे बीजेपी को 2014 के आम चुनाव में


बीजेपी का जबरदस्त विरोध कर रही है टीएमसी
Narendra.Mishra@timesgroup.com

• नई दिल्ली : आम चुनावों के बीच पश्चिम बंगाल में बीजेपी और टीएमसी के बीच हिंसक सियासी टकराव हो रहे हैं। तेजी से चलते घटनाक्रमों को देखकर सवाल उठ रहा है कि सूबे की सियासत क्या मोड़ लेने जा रही है और ये हालात क्यों/ बीजेपी की बात करें तो उसे इस दफा बंगाल से बेहद उम्मीदें हैं। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने बुधवार को फिर दावा किया कि वह राज्य की 42 सीटों में से कम से कम 23 पर जीत हासिल करेगी। बीजेपी के लिए यह इसलिए भी जरूरी है कि अगर उसे हिंदी पट्टी में कुछ सीटों का नुकसान होता है तो बंगाल से उसकी भरपाई की जा सके। ममता बनर्जी की टीएमसी से सीधे मोर्चा लेकर वह जनता को संदेश देना चाहती है कि मजबूत विकल्प वही है। सत्ता विरोधी वोटों पर उसका स्वाभाविक हक है। ममता बनर्जी भी करीब 12 साल पहले इसी अंदाज में तीन दशक पुरानी लेफ्ट सरकार के सामने आ खड़ी हुई थीं। लगातार संघर्ष से उन्होंने मुख्य विपक्षी कांग्रेस को पीछे धकेला और फिर खुद सत्ता तक पहुंच गईं। बीजेपी इसी अंदाज में अपनी दावेदारी मजबूत कर रही है।

बंगाली अस्मिता पर आई बात: ममता बनर्जी इस सियासी टकराव को बंगाली अस्मिता से जोड़कर बीजेपी को आउटसाइडर पार्टी के रूप में पेश करना चाहती हैं। बीजेपी सरकार और पार्टी से टकराकर उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की है कि टीएमसी बंगाली स्वाभिमान की लड़ाई लड़ने वाली इकलौती पार्टी है। इस रणनीति के साथ वह कोलकाता की सड़कों पर उतर चुकी हैं।

... लेकिन खतरे भी: राज्य में हिंसक सियासी संघर्ष का पुराना इतिहास रहा है। 80 और 90 के दशक में चुनावी व्यवस्था चरमरा चुकी थी। सियासत के नाम पर हिंसा प्रभावित वाले राज्यों में पश्चिम बंगाल का नाम सबसे आगे था। उस दौरान राजनीतिक टकराव में कई जानें गईं। मौजूदा टकराव के बीच उस दौर के लौटने की भी आशंका है। इस आम चुनाव को देखें तो सबसे अधिक हिंसक घटनाएं बंगाल में ही हुई हैं। प्रत्याशियों तक को निशाना बनाने की कोशिश की गई।

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