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National

‘मोदी लहर’ में भी क्यों मुश्किल में रामविलास/

May 16, 2019 05:33 AM

COURTESY NBT MAY 16
Narendra.Mishra@timesgroup.com

• नई दिल्ली : बीजेपी और नीतीश कुमार की जेडीयू के साथ से चुनावी मैदान में उतरी लोक जनशक्ति पार्टी बिहार में 6 सीटों पर खड़ी है। जब सभी जगह मोदी फैक्टर की बात की जा रही है और एनडीए के सहयोगी दल भी इसी नाम के सहारे चुनावी नैया पार लगाने की कोशिश में हैं, तब रामविलास पासवान की पार्टी को लेकर पूछा जा रहा है कि उसके लिए चुनौती क्यों बढ़ गई है/

एससी-एसटी ऐक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उसे पलटने के लिए सरकार पर कानून बनाने का दबाव डालने वालों में रामविलास पासवान और उनके बेटे चिराग पासवान सबसे आगे थे। मोदी सरकार पर दबाव पड़ने के बाद कानून बदला गया। तब से राज्य में खासकर सवर्ण वोटर रामविलास की पार्टी से नाराज हैं। जिन सीटों पर एलजेपी खड़ी है, वहां दलितों के अलावा सवर्णों की आबादी भी निर्णायक स्थिति में है। सवर्णों में कई जगह राजपूतों ने खुलकर विरोध भी किया। इसके अलावा हाजीपुर, जमुई और समस्तीपुर में पार्टी को सत्ता विरोधी लहर का भी सामना करना पड़ रहा है। हालांकि एलजेपी का दावा है कि हल्के विरोध के बाद सभी पीएम मोदी के नाम पर मान गए।

परिवारवाद पर विरोध: रामविलास ने हाजीपुर से भाई पशुपति कुमार पारस, समस्तीपुर से दूसरे भाई रामचंद्र पासवान और जुमई से बेटे चिराग को टिकट दिया है। परिवारवाद पर पार्टी के भीतर नाराजगी थी।

मांझी से खतरा : विपक्षी गठबंधन ने पूर्व सीएम जीतन मांझी की पार्टी को तीन टिकट दिया है। ऐसे में पासवान के सामने अपनी सीटें बचाने के साथ दलितों का सबसे बड़ा नेता बने रहने की भी बड़ी चुनौती है।

एलजेपी ने 2014 में सभी 6 सीटें जीती थीं। इस बार पार्टी वैशाली, हाजीपुर, समस्तीपुर, खगड़िया, जमुई और नवादा से चुनाव लड़ रही है

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