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कोचिंग सेंटरों में कमरतोड़ पढ़ाई हो रही है, ज्यादातर बच्चों को मांसपेशियों में दर्द - स्टडी में सामने आया यह नतीजा

May 16, 2019 05:29 AM

COURTESY NBT MAY 16

कोचिंग सेंटरों में कमरतोड़ पढ़ाई हो रही है, ज्यादातर बच्चों को मांसपेशियों में दर्द


स्टडी में सामने आया यह नतीजा


488 स्टूडेंट्स पर स्टडी,

12 से 16 महीने कोचिंग ले चुके थे, ढाई से तीन घंटे बिना ब्रेक पढ़ते थे 63.9% लड़के, 36.1% लड़कियां थीं
87.1% को मांसपेशियों में परेशानी थी

43% को लोअर बैक पेन में दर्द

36% को ऐड़ी और पैरों में दर्द

32% को पीठ के ऊपरी हिस्से में दर्द

28% कंधे में दर्द से परेशान

20% को घुटने, कोहनी, कलाई में दर्द
स्टडी से पता चला कि कोचिंग सेंटरों में पढ़ने वाले 87 फीसदी स्टूडेंट्स मांसपेशी में दर्द के शिकार
जरा संभलकर
Rahul.Anand@timesgroup.com

• दिल्ली: करियर संवारने के सपने दिखाने वाले कोचिंग सेंटर स्टूडेंट्स को बीमार भी कर सकते हैं। एक स्टडी से पता चला है कि कोचिंग सेंटरों में भीड़, घंटों एक ही जगह बैठे रहने और पीठ को आराम न मिलने से स्टूडेंट्स की मांसपेशियों में दर्द की शिकायतें बढ़ रही हैं। स्टडी में शामिल 16 से 22 साल के 87 पर्सेंट स्टूडेंट्स मांसपेशियों के दर्द से जूझते मिले जबकि पहले उन्हें कोई परेशानी नहीं थी।

यह स्टडी जर्नल ऑफ फैमिली मेडिसिन एंड प्राइमरी केयर में छपी है। इस स्टडी में शामिल सफदरजंग अस्पताल के डॉ. हर्षानंद पोपलवार ने बताया कि एम्स भोपाल की मदद से डॉ़ आशुतोष संतोषी की अगुआई में स्टडी की गई। डॉ. हर्षानंद ने बताया कि हमने पांच कोचिंग सेंटरों को चुना और ऐसे 488 स्टूडेंट्स चुने, जो 14 से 16 महीने कोचिंग कर चुके थे और रोजाना ढाई से तीन घंटे कोचिंग ले रहे थे। ये पूरे दिन में औसतन 5 घंटे पढ़ते थे। स्टडी के रिजल्ट चौंकाने वाले आए। 87.1 पर्सेंट स्टूडेंट्स मस्कुलोस्केलेटल डिसऑर्डर (MSD) के शिकार पाए गए। एमएसडी को आसान शब्दों में मांसपेशियों की परेशानी कहा जाता है। यह मांसपेशी गर्दन, कमर का निचला हिस्सा, एड़ी, पीठ का ऊपरी हिस्सा, कंधा, घुटना, कलाई कहीं की भी हो सकती है। डॉ. हर्षानंद ने बताया कि अधिकतर कोचिंग सेंटरों में बच्चे बेंच पर बैठते हैं, जिसमें पीठ को पीछे से सपोर्ट नहीं मिलता। ये फिजिकल एक्टिविटी नहीं करते, जिससे मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं।

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