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Haryana

FARIDABAD- कमिश्नर ने बर्खास्त किए 4 जेई, एक एसडीओ व सेनेटरी इंस्पेक्टर सस्पेंड, 41 अफसरों व कर्मियों पर भी कार्रवाई

May 15, 2019 05:40 AM

COURTESY DAINIK BHASKAR MAY 15


कमिश्नर ने बर्खास्त किए 4 जेई, एक एसडीओ व सेनेटरी इंस्पेक्टर सस्पेंड, 41 अफसरों व कर्मियों पर भी कार्रवाई
सेक्टर-48 में जलभराव का मामला : एनजीटी की सरकार को फटकार व नगर निगम से 50 लाख की जुर्माना वसूली से सरकार सख्त

सेक्टर 48 में जलभराव होने के मामले में एनजीटी की फटकार और 50 लाख रुपए के जुर्माने के बाद निगम कमिश्नर अनीता यादव ने सख्ती बरतते हुए आउट सोर्सिंग पर लगे चार जेई को बर्खास्त कर दिया है। इसके अलावा 41 अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। इनमें चीफ इंजीनियर, एसई समेत कई एक्सईएन और एसडीओ शामिल हैं। किसी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है तो किसी को चार्जशीट किया गया है। सेनेटरी इंस्पेक्टर प्रमोद शर्मा और एसडीओ विनोद कुमार को सस्पेंड कर दिया एनजीटी की फटकार के बाद चीफ सेक्रेटरी डीएस ढेसी ने उन कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने का आदेश दिया था जिनकी लापरवाही से ये समस्या पैदा हुई। इस मामले की जांच नगर निगम के सचिव जितेंद्र दहिया कर रहे थे।
इन अधिकारियों व कर्मचारियों किया गया है चार्ज शीट
सेनेटरी इंस्पेक्टर गजराज सिंह,सेनेटरी इंस्पेक्टर प्रमोद शर्मा,जूनियर इंजीनियर अनिल कुमार, जूनियर इंजीनियर सुमेर सिंह,सीनियर सेनिटरी इंस्पेक्टर, चंद्रदत्त शर्मा, ट्यूबवेल हेल्पर दीपक कुमार को चार्जशीट किया है। वहीं रिटायर्ड चीफ इंजीनियर अनिल मेहता, एक्सईएन वीरेंद्र कर्दम, रिटायर्ड एसई एसके अग्रवाल, रिटायर्ड एक्सईएन प्रीतम चंद, एक्सईएन विजय ढाका, रवि शर्मा, एसडीओ नवल सिंह, सुरेंद्र खट्टर, उम्मेद सिंह, खेमचंद, राजेश शर्मा, शेर सिंह, विनोद कुमार भी चार्जशीट हुए हैं।
एक एसडीओ और सेनेटरी इंस्पेक्टर सस्पेंड, 41 अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई

10 मई को दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर।
इन्हें जारी किया गया कारण बताओ नोटिस
चीफ इंजीनियर करनाल रमन शर्मा, रिटायर्ड एसई अनिल मेहता , एसई राम प्रकाश, रिटायर्ड एसई रमेश कुमार बंसल, एक्सईएन दीपक किंगर, एक्सईएन आनंद स्वरूप, चीफ इंजीनियर डीआर भास्कर, चीफ इंजीनियर ओपी गोयल, एसडीओ ओपी मोर, एक्सईएन प्रेम राज सिंह, एक्सईएन वीरेंद्र कर्दम, एक्सईएन श्याम सिंह, रिटायर्ड चीफ इंजीनियर एनके कटारा, एसडीओ सुरेंद्र खट्टर, चीफ इंजीनियर बीएस सिंगरोहा।
यह है मामला: हुडा ने निगम को तीन साल पहले सेक्टर 48 ट्रांसफर किया था
वर्ष 1991-92 में हुडा ने सेक्टर 48 काटा था। बाद में यहां कई प्लाटों पर कब्जा हो गया था। हुडा ने उक्त कब्जों को हटवाकर वर्ष 1999-2000 से आवंटियों को पजेशन देना शुरू कर दिया था। हुडा ने सेक्टर बसाने के बाद मार्केट के लिए करीब साढ़े तीन एकड़ जगह छोड़ रखी है। इस जगह पर मार्केट प्रस्तावित है। लेकिन आज तक न तो उक्त जमीन किसी को अलॉट की गई और न ही वहां मार्केट बनाई गई। अपना पीछा छुड़ाने के लिए हुडा ने वर्ष 2016 में इस सेक्टर को नगर निगम को ट्रांसफर कर दिया। जबकि जमीन का मालिकाना हक अभी भी हुडा के पास है।
निगम को भरना पड़ा 50 लाख रुपए जुर्माना
नौ मई को नई दिल्ली स्थित एनजीटी में सुनवाई हुई। इसमें शहरी स्थानीय निकाय विभाग के डायरेक्टर समीरपाल सरो, नगर निगम के चीफ इंजीनियर डीआर भास्कर, एक्सईएन वीरेंद्र कर्दम और एसडीओ सुरेंद्र खट्टर पेश हुए थे। सरकार की ओर से पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल ग्रोवर ने की थी। एनजीटी के चेयरमैन आदर्श कुमार ने सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि इसके पहले समस्या का समाधान क्यों नहीं किया गया। जब जुर्माना लगाया गया तब अधिकारी हरकत में आए। कोर्ट ने बगैर जुर्माना भरे सरकार को सुनने को तैयार नहीं थी। आखिर में सरकार की ओर से 50 लाख रुपए का डीडी कोर्ट में जमा करना पड़ा। अब 16 मई को इस मामले में फिर सुनवाई होगी। इसमें निगम कमिश्नर अनीता यादव को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होना है।
फरीदाबाद। सेक्टर 48 में होने वाले जलभराव की फाइल फोटो।
चीफ सेक्रेटरी के आदेश पर की गई कार्रवाई
एनजीटी की फटकार के बाद चीफ सेक्रेटरी डीएस ढेसी ने नगर निगम अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने का आदेश दिया था। नगर निगम के सचिव जितेंद्र दहिया ने मामले की जांच कर आउटसोर्सिंग पर लगे चार जेई को जिम्मेदार ठहराया। निगम कमिश्नर अनीता यादव ने सेवा प्रदाता कंपनी मेसर्स इंपीरियल इलेक्ट्रिकल एंड अलायड सर्विसेज जवाहर कॉलोनी को पत्र लिखकर इंजीनियरिंग ब्रांच में तैनात जेई संदीप राणा, राहुल तेवतिया, पुनीत त्यागी और स्वच्छता शाखा में तैनात जेई विशाल की सेवाएं तुरंत समाप्त करने के लिए कहा है। निगम कमिश्नर का कहना है कि चारों जेई ने ड्यूटी सही से नहीं निभाई है।
आरडब्ल्यूए ने एनजीटी में दायर की थी याचिका
मार्केट का हिस्सा नीचा होने से यहां कई साल से पानी भरा था। यहां तक की पानी सड़क पर आ जाता था। इससे सेक्टरवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। इसके अलावा जलजनित बीमारियां पैदा होने का खतरा बना रहता था। आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों का कहना है कि उक्त समस्या के समाधान के लिए नगर निगम और हुडा अधिकारियों को कई बार शिकायत दी, लेकिन किसी अधिकारी ने समस्या को गंभीरता से नहीं लिया। सीएम विंडो पर भी शिकायत की गई। फिर भी समस्या का हल नहीं निकला। आखिर में जनकल्याण समिति और आरडब्ल्यूए ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की। याचिका में कहा गया कि डेढ़ दशक से यहां सीवर का पानी जमा हो रहा है। लेकिन नगर निगम और हुडा समस्या का समाधान नहीं कर रहे। यह सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के आदेश की अवहेलना है। साथ ही यहां पर्यावरण को भी नुकसान हो रहा है। एनजीटी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए नगर निगम को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।

 
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