Monday, May 20, 2019
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हरियाणा में 450 पोलिंग बूथों के ई.वी.एम का वीवीपैट मिलान किया जाएगा

May 13, 2019 09:41 PM

चंडीगढ़- गत सप्ताह भारत की सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाले तीन जजों के बेंच द्वारा पुनः दोहराया गया कि वर्तमान  लोक सभा चुनावों की मतगणना प्रक्रिया  के दौरान देश के  हर संसदीय क्षेत्र (सीट)  के अंतर्गत आने वाले  प्रत्येक विधानसभा हलके में से केवल पांच-पांच पोलिंग स्टेशन में मतदान के दौरान प्रयुक्त की जाने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनो (ई.वी.एम.) में डाले गए मतों का उनके साथ अटैच किये गए वी.वी.पैट. ( वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल) के साथ मिलान करना आवश्यक होगा। कांग्रेस पार्टी सहित देश के 21  राजनीतिक दलों द्वारा पहले चुनाव आयोग और फिर सुप्रीम कोर्ट में यह मांग की गयी की हर लोक सभा क्षेत्र में प्रयुक्त सभी ई.वी.एम. में से 50 फीसदी की वी.वी.पैट जांच हो लेकिन पिछले महीने 8 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने उक्त आदेश दिया जिसके बाद सभी विपक्षी दलों ने अदालत में पुनर्विचार याचिका दायर की थी एवं इस संख्या को कम से कम 25 फीसदी करने की गुहार की थी जिसे सुप्रीम कोर्ट ने गत सप्ताह नामंजूर  कर दिया। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया की इसका अर्थ यह  है कि  जैसे हरियाणा प्रदेश में दस संसदीय क्षेत्र (हल्का ) आते हैं जिनमें से प्रत्येक के अंतर्गत नौ-नौ विधानसभा क्षेत्र आते है जैसे अम्बाला (आरक्षित) लोक सभा सीट में अम्बाला शहर, अम्बाला कैंट, नारायणगढ़, कालका, पंचकूला, साढौरा, जगाधरी और यमुनागर, तो इन सभी नौ हलकों में से हर एक विधानसभा हलके में से पांच-पांच पोलिंग स्टेशन का चयन किया जाएगा जिसका मतलब यह हुआ की नौ गुना पांच यानि अम्बाला सीट पर कुल 45  पोलिंग स्टेशनों की ई.वी.एम. में दर्ज मतों की उनके साथ अटैच वी.वी.पैट में रिकॉर्ड वोटर स्लिपों से मिलान किया जाएगा. इस प्रकार हरियाणा में कुल 450 पोलिंग स्टेशनों पर यह प्रक्रिया की जाएगी। हेमंत ने बताया कि  हर विधानसभा क्षेत्र में उक्त पांच पोलिंग स्टेशन का चयन रैंडम /बेतरतीब तौर  से अर्थात ड्रा ऑफ़ लॉट्स तरीके से किया जाएगा जो सम्बंधित राजनीतिक दल के उम्मीदवारों या उनके एजेंटो और चुनाव अधिकारियो/पर्यवेक्षकों की उपस्थिति में किया जाएगा. यह प्रक्रिया मतगणना का आखिरी दौर ख़त्म होने के बाद अमल में लाई  जायेगी. एडवोकेट ने बताया कि  हालांकि पिछले वर्ष भारतीय निर्वाचन आयोग ने इस सम्बन्ध में जारी निर्देशों में लोक सभा चुनाव के दौरान सम्बंधित संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली हर विधानसभा हलके में  कोई एक पोलिंग स्टेशन, जिसका चुनाव भी ड्रा ऑफ़ लॉट्स से किया जाना निर्देशित था,  के लिए ऐसी व्यवस्था  लागू की थी परन्तु अब   सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब इनकी संख्या पांच गुना बढ़ जायेगी जिससे निश्चित तौर पर चुनावो का नतीजा घोषित होने में कुछ घंटों का अतिरिक्त समय लगेगा।हेमंत ने बताया कि  देश में हर लोक सभा सीट के अंतर्गत आने वाली विधानसभा हलकों  की संख्या के सामान नहीं है. हरियाणा और पंजाब में जहाँ हर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत नौ- नौ विधानसभा हलके आते है, वही राजधानी दिल्ली की सात लोक सभा सीटों में हर सीट के नीचे दस विधानसभा हलके आते है, हिमाचल में चार लोक सभा सीटों के लिए यह संख्या 17 है और वहीँ राजस्थान में यह केवल आठ है जबकि उत्तर प्रदेश में यह केवल पांच है।

 
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