Saturday, September 21, 2019
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Haryana

हुड्डा को चुनौती देकर मीडिया की सुखियों में बने रहना चाहते थे राजकुमार सैनी

April 24, 2019 01:18 PM

रमेश शर्मा

सोनीपत :- नवनिर्मित लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी के अध्यक्ष राजकुमार सैनी ने काफी पहले भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के मुकाबले में लोकसभा चुनाव लड़ने की चुनौती दी थी। कांग्रेस ने इस बार मोदी सरकार के खिलाफ अपने सबसे मजबूत उम्मीदवार ही चुनाव मैदान में उतारे है।कांग्रेस ने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा को भी नामांकन की अंतिम तिथि के दो दिन पहले सोनीपत लोकसभा से चुनाव मैदान में उतारने की घोषणा की। नामांकन के अंतिम दिन भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने अपना नामांकन दाखिल किया। नामांकन के अंतिम दिन लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी के अध्यक्ष राजकुमार सैनी भी सोनीपत से ही लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने पंहुचे लेकिन नामांकन के कागज पूरे ना होने के चलते वे नामांकन नहीं कर सके ऐसा राजकुमार सैनी ने मीडिया में कहा। सैनी ने कहा कि भूपेन्द्र सिंह हुड्डा का नाम लेट घोषित होने के कारण ही जल्दबाजी में अपना नामांकन फार्म ठीक से नहीं भर सके। गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक प्रत्याशी नामांकन के अंतिम दिन तक अपना नामांकन पत्र चुनाव अधिकारी को जमा करवा सकते है। चुनाव अधिकारी किसी भी प्रत्याशी का नामांकन लेने से इंकार नहीं कर सकता चाहे उसके किसी भी कागज में कोई कमी ही क्यों ना हो। नामांकन के बाद सभी प्रत्याशियों के फार्म की स्कूर्टनी होती है। स्कूर्टनी का समय निर्धारित होता है। स्कूर्टनी में ही कागज पत्रों की जांच की जाती है। जिसके बेस पर नामांकन रद्द किया जाता है। किसी भी प्रत्याशी के पास ये अधिकार होता है कि वह स्कूर्टनी के अंतिम समय तक अपने कागज पत्र पूरे कर सकता है। जैसा कि आज 11 बजे से 4 बजे तक हरियाणा की सभी 10 लोकसभा सीटों की स्कूर्टनी होनी है। अगर राजकुमार सैनी सही मायने में हुड्डा के खिलाफ चुनाव लड़ना चाहते तो कल अपना नामांकन पत्र जमा करवा सकते थे और आज शाम 4 बजे तक अपने जरुरी कागज पूरे करके जमा करवा सकते थे। राजनीतिक गलियारों में सर्वत्र चर्चा है कि बड़ा क्या राजकुमार सैनी भूपेन्द्र सिंह हुड्डा से डर गए । या फिर राजकुमार सैनी की चुनौती खोखली निकली, राजकुमार सैनी केवल राजनीति में हुड्डा को चुनौती देकर मीडिया की सुखियों में बने रहना चाहते थे। सवाल यह है कि मौजूदा सांसद को क्या नियमों की जानकारी नहीं थी, या फिर जानबूजकर सैनी ने नामांकन फार्म में गड़बड़ी करके नामांकन दाखिल करने से परहेज किया और केवल नामांकन दाखिल करने का ड्रामा किया। सैनी ने शायद यह सोचकर हुड्डा को चुनौती दी थी कि हुड्डा ने पिछले 15 साल से लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ा है और ना ही लड़ेंगे क्योंकि वे खुद को मुख्यमंत्री पद का सशक्त दावेदार मानते है तो ऐसे में चुनौती देने में क्या जाता है। लेकिन सैनी को इस बात का जरा सा भी इलम नहीं होगा कि कांग्रेस आखरी वक्त पर भूपेन्द्र सिंह हुड्डा को लोकसभा का चुनाव लड़वा सकती है।  इस सारे घटनाक्रम से तो ऐसा ही लगता है कि भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के चुनाव मैदान में आते ही राजकुमार सैनी बड़े अजीबोगरीब तरीके से मैदान छौड़ कर भाग गए।

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