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Haryana

HARYANA-नाम तय, नजारा दिलचस्प, नजर चुनावी समर पर

April 23, 2019 05:44 AM

COURTESY NBT APRIL 23

नाम तय, नजारा दिलचस्प, नजर चुनावी समर पर


फरीदाबाद
गुरुग्राम
सोनीपत
करनाल
अंबाला
हिसार
भिवानी
रोहतक
कुरुक्षेत्र
सिरसा
हैडिंग हैडिंग हैडिंग हैडिंग हैडिंग हैडिंग
बेशक यह यादव बहुल सीट हो, लेकिन मुस्लिम वोटर भी यहां पर निर्णायक स्थिति में होते हैं।
सिरसाा से बीजेपी प्रतयाशी सुनीता दुगगल पिछले विधानसभा चुनाव में रतिया सीट से चुनाव हार चुकी हैं।
आप-जेजेपी ने पृथ्वीराज और इनैलो ने रामपाल वाल्मीकि को प्रत्याशी खड़ा किया है। ये पिछड़ा वोट बांट सकते हैं।
संजय भाटिया सीएम मनोहर लाल की पसंद बताए जाते हैं। उनके हिस्से पिछली दो विधानसभाओं की हार है।
ललित नागर का अंत समय में टिकट कटने से अवतार सिंह भड़ाना को भितरघात का डर है।
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1) अर्जुन चौटाला

2) नायब सैनी

3) जयभगवान शर्मा
1) धर्मबीर सिंह

2) श्रुति चौधरी

3) स्वाति यादव
1) दुष्यंत चौटाला

2) बृजेंद्र सिंह

3) भव्य बिश्नोई
1) दीपेंद्र हुड्डा

2) अरविंद शर्मा

3) प्रदीप देशवाल
1) भूपेंद्र हुड्डा

2) रमेश कौशिक

3) दिग्विज चौटाला
गुरुग्राम : M-Y फॉर्म्युला गेम में

गुरुग्राम लोकसभा सीट पर प्रमुख मुकाबला बीजेपी के केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह और हरियाणा में पूर्व मंत्री रहे कांग्रेस के प्रत्याशी कैप्टेन अजय सिंह यादव के बीच बताया जा रहा है। जेजेपी ने यहां से महमूद खान को टिकट दिया है। राजनीतिक जानकार बताते हैं कि इसकी वजह एम-वाई समीकरण को साधना और बीजेपी से सीट छीनना भी है। लेकिन राव इंद्रजीत से सीट छीन लेना आसान बात नहीं। अलबत्ता इंद्रजीत और अजय के बीच की टक्कर अब पहले जैसी नहीं रहेगी।
सिरसा : तंवर की कड़ी परीक्षा

सिरसा (सुरक्षित )लोकसभा सीट पर कांग्रेस की तरफ से कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर चुनावी ताल ठोक रहे हैं। दूसरी तरफ बीजेपी ने आईआरएस रहीं सुनीता दुग्गल को मैदान में उतारा है। इनैलो ने अपने निवर्तमान सांसद चरणजीत रोड़ी को टिकट दिया है, जबकि जेजेपी ने निर्मल सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया है। इस बार जीत या हार अशोक तंवर का सियासी भविष्य तय करेगी। इसलिए वह सिरसा में खूब पसीना बहा रहे हैं।
अंबाला : भरोसे की परख

अंबाला लोकसभा सीट पर ने दिगगज नेता और पूर्व मंत्री कुमारी सैलजा को उतारा है। बीजेपी ने अपने निर्वतमान संासद रत्नलाल कटारिया पर ही भरोसा जताया है। सैलजा को पीएम मोदी के माहौल को फेल करके जीत हासिल के लिए दिन-रात एक करना होगा, वहीं रत्नलाल कटारिया पर भी दोबारा अपनी सीट बचाए रखने का भारी दबाव है। दोनों ही नेता इस सीट पर जीत दर्ज करने के लिए पसीना बहा रहे हैं।
करनाल : सीएम की साख दांव पर

बीजेपी ने करनाल से लगातार दो विधानसभा चुनाव हारने वाले संजय भाटिया को मैदान में उतारा है। भाटिया के नाम पर मुहर खुद मनोहर लाल ने लगाई थी। इस वजह से उन्हें जिताने में सीएम कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। पिछली बार इस सीट पर बीजेपी के अश्वनी चोपड़ा सांसद बने थे। कांग्रेस ने कुलदीप शर्मा को यहां से अपना उम्मीदवार बनाया है। वहीं जेजेपी-आप के साझे प्रत्याशी कृष्ण कुमार अग्रवाल और इनैलो ने धर्मबीर पाढा को अपना उम्मीदवार बनाया है।
फरीदाबाद : भितरघात का भय

 

फरीदाबाद से कांग्रेस के पूर्व सांसद रहे अवतार सिंह भड़ाना पिछले दिनों ही बीजेपी से कांग्रेस में दोबारा आए हैं। फरीदाबाद सीट पर कांग्रेस ने पहले ललित नागर को उतारा था लेकिन रविवार शाम को जारी हुई सूची में उनका टिकट काटकर अवतार सिंह भड़ाना को मैदान में उतारा गया है। भड़ाना इससे पहले बीजेपी के यूपी की मीरापुर विधानसभा सीट से विधायक बने थे। काफी अरसे बाद दोबारा फरीदाबाद में अब चुनाव के समय ही सक्रिय हुए हैं।
निश्चित तौर पर अर्जुन चौटाला होंगे। वह इनैलो के उन 10 उम्मीदवारों में से केवल दूसरे ऐसे उम्मीदवार हैं, जिन्हें हरियाणा की जनता नाम से जानती है।
भिवानी-महेंद्रगढ़ की सीट पर धर्मबीर सिंह और बंसीलाल परिवार के बीच रायवलरी पुरानी है। इनके बीच सियासी आमना-सामना साल 1989 से होता आ रहा है। पिछले चुनाव में धर्मबीर ने कांग्रेस उम्मीदवार और बंसीलाल की पोती श्रुति चौधरी को हरा दिया था। लेकिन स्वाति यादव की एंट्री के बाद मामला दोतरफा नहीं रह गया है। सोमवार को नामांकन से पहले रोड शो में जिस तरह का जन समर्थन स्वाति को हासिल हुआ, वह बीजेपी और कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी बजा गया है।
यहां तीन नेता नहीं, दरअसल तीन बड़े राजनीतिक घराने चुनाव लड़ रहे हैं। इनमें से दो की हार तय है। क्योंकि विजेता कोई एक ही होगा। जीतने वाले घराने का हरियाणा की राजनीति में मकाम 23 मई के बाद और बड़ा हो जाएगा। राजनीतिक जानकार बताते हैं कि सांसद दुष्यंत चौटाला के लिए ऐसे में अपनी सीट को बचाना सबसे बहुत बड़ी चुनौती होगी। अगर वह जीत गए, तो न सिर्फ उनका बल्कि उनकी नई पार्टी जेजेपी की हैसियत और दखल प्रदेश की राजनीति में बढ़ जाएगी।


दीपेंद्र हुड्डा के रास्ते में जेजेपी के प्रत्याशी प्रदीप देशवाल एक बड़ी रुकावट बनते नजर आ रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि देशवाल को जितने ज्यादा वोट मिलेंगे, उतने ही दीपेंद्र हुड्डा की जीत के आसार कम होते जाएंगे। आप के उम्मीदवार एक कांटे की टक्कर में वोटकटवा भी साबित हो सकते हैं। इसलिए दीपेंद्र को कई स्तर पर चुनौतियों से जूझना पड़ सकता है। अब देखना यह है कि दीपेंद्र हुड्डा के दमखम और बीजेपी की रणनीति में से बाजी किसके हाथ लगती है।
भूपेंद्र हुड्डा भले ही चार बार सांसद रहे हों, लेकिन वह सोनीपत सीट से एक बार भी चुनाव नहीं लड़े हैं। अगर हुड्डा हार गए तो उनकी सियासत का खात्मा हो जाएगा, जीत गए तो कांग्रेस में एक बार फिर उनका एकाधिकार नजर आएगा।
कुरुक्षेत्र से चुनाव लड़ रहे अर्जुन चौटाला के लिए खाता खोलने की चुनौती है। अभय चौटाला के परिवार से वह इकलौते शख्स हैं, जो चुनाव मैदान में है। इस सीट पर बीजेपी ने नायब सिंह सैनी और जेजेपी ने जयभगवान शर्मा (डीडी) को उतारकर मुकाबला कड़ा बना दिया है। कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट पर कांग्रेस का दबदबा रहा है, लेकिन पिछले चुनाव में यहां से बीजेपी के उम्मीदवार राजकुमार सैनी संसद पहुंचे थे। सैनी ने अपनी अलग पार्टी बना ली है। बीजेपी को वह बीएसपी से मिलकर कितना नुकसान पहुंचाते हैं, यह देखने की बात होगी।


प्रदेश के सबसे बड़े सियासी परिवारों में शामिल स्वर्गीय बंसीलाल की पोती श्रुति चौधरी एक बार फिर भिवानी महेंद्रगढ़ सीट पर कांटे की टक्कर में हैं। उनके सामने परिवार के सबसे कट्टर प्रतिद्वंदी वर्तमान सांसद धर्मबीर सिंह मजबूती के साथ खड़े हैं। श्रुति के लिए पिछली बार की हार का बदला लेते हुए जीत हासिल करना इस बार भी मुश्किल है। बीजेपी प्रत्याशी धर्मवीर के लिए भी दोबारा जीत हासिल करना आसान नहीं है। जानकार बताते हैं कि सांसद का चुनाव लड़ने से तौबा कर चुके धर्मबीर को मजबूरी में चुनावी दंगल में उतरना पड़ा है और उनके लिए पीएम मोदी के नाम का ही एक मात्र सहारा बचा है। इस बार क्षेत्र में दौरों के समय कई गांवों में उनका विरोध भी हुआ। उन्हें इस लिहाज से एंटी-इन्कम्बेंसी का भी सामना करना पड़ सकता है। बीजेंपी और कांग्रेस के इन दो बड़े चेहरों के बीच जननायक जनता पार्टी ने अमेरिका से आई युवा स्वाति यादव पर अपना दांव लगाया है। ओबामा की टीम में काम कर चुकीं स्वाति यादव ने अहीरवाल बहुल 4 सीटों पर बढ़त हासिल कर ली, तो वह धर्मबीर और श्रुति दोनों पर ही भारी पड़ सकती हैं। धर्मबीर के लिए भी अहीरवाल की चारों सीट जीत या हार का फैसला करने का काम करेगी।


हिसार सीट पर इस बार तीन पड़े राजनीतिक घराने सियासी लड़ाई लड़ रहे हैं। कांग्रेस से इस सीट पर पूर्व सीएम भजन लाल के पोते भव्य बिश्नोई, जेजेपी से ओमप्रकाश चौटाला के पोते दुष्यंत चौटाला और बीजेपी से बीरेंद्र सिंह के बेटे बृजेंद्र सिंह मैदान में हैं। भव्य बिश्नोई के लिए यह पहला चुनाव है। उनके लिए खाता खोलना एक बड़ी चुनौती होगी। भले ही हिसार को भजनलाल परिवार का गढ़ माना जाता रहा है लेकिन बीते निगम चुनाव में कांग्रेस कोई चमत्कार नहीं दिखा पाई। वहीं 2014 लोकसभा में इनैलो से जीतकर संसद पहुंचे दुष्यंत चौटाला फिर से मैदान में हैं। परिवार के मना करने के बावजूद उन्होंने इस सीट पर चुनाव लड़ने का फैसला लिया है। हिसार में जीत और हार दुष्यंत चौटाला के कद का पैमाना तय करने का काम करेगी। वहीं आईएएस की नौकरी छोड़कर राजनीति में आए बीरेंद्र सिंह के पुत्र बृजेंद्र सिंह के लिए यह चुनाव चुनौती है। बीजेपी के सिपहसालार बृजेंद्र सिंह को अपनी सियासी लॉन्चिंग बेहद कड़े मुकाबले में करनी पड़ रही है। वह खुद कोई जाना-पहचाना चेहरा नहीं है, यह चुनाव पिता और पार्टी के फेस पर लड़ रहे हैं। बृजेंद्र की अगर जीत होती है, तो यह विशुद्ध बीजेपी और बीरेंद्र सिंह की जीत मानी जाएगी।


रोहतक संसदीय सीट हुड्डा परिवार और बीजेपी दोनों के लिए ही जी का जंजाल बन गई है। पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा के बेटे दीपेंद्र हुड्डा चौथी बार सांसद बनकर नया इतिहास रचने के लिए जमकर पसीना बहा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी पहली बार किसी गैर जाट नेता को सांसद बना कर उलटफेर करने का दावा कर रही है। विपरीत माहौल के बीच दीपेंद्र हुड्डा के लिए इस बार चुनाव जीतना किसी भी तरह से आसान नहीं है। बीजेपी ने भले ही यहां से बाहरी उम्मीदवार अरविंद शर्मा को मैदान में उतारा हो लेकिन वह अपने पूरे संगठन की ताकत से चुनाव लड़ रही है। शर्मा को जातिगत, पुराने जनाधार के अलावा बीजेपी काडर के वोट से आस है। इसके उलट दीपेंद्र के लिए हालात थोड़े अलग हैं। पिता भूपेंद्र हुड्डा को सोनीपत से टिकट मिल जाने के बाद दीपेंद्र हुड्डा की ताकत कम हो गई है। इससे पहले लगभग हर चुनाव में दीपेंद्र के लिए भूपेंद्र हुड्डा रोहतक में प्रचार करते नजर आए हैं। अब सीनियर हुड्डा को अपना क्षेत्र पहले संभालना है। ताकत बंटेगी। इस लिहाज से दीपेंद्र को अब बीजेपी की रणनीति भेदने के लिए अपने बूते ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी। हालांकि आशा हुड्डा दीपेंद्र के साथ खड़ी नजर आएंगी। इससे उन्हें प्रचार में स्थानीय स्तर पर बड़ी मदद मिलेगी।


प्रदेश में सबसे बड़ा सियासी महामुकाबला सोनीपत लोकसभा सीट पर होगा। रविवार शाम कांग्रेस ने अपने दिग्गज पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा को सोनीपत सीट से उतारकर इसे हॉट सीट बना दिया था। हुड्डा के आने से मुकाबला बीजेपी के रमेश कौशिक के बीच माना जा रहा था। लेकिन जननायक जनता पार्टी ने यहां से दिग्विजय चौटाला को टिकट देकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। जातिगत समीकरण को देखें तो दिग्विजय की यहां से एंट्री सीधे-सीधे हुड्डा के वोट बैंक में सेंधमारी होगी। सोनीपत लोकसभा क्षेत्र में एक विशेष जाति में भूपेंद्र हुड्डा का व्यक्तिगत बड़ा वोट बैंक है। देखना होगा कि हुड्डा क्या रणनीति बनाकर मैदान में उतरते हैं। गौरतलब है कि जनवरी में हुए जींद उपचुनाव में दिग्विजय चौटाला करीब 38 हजार वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे थे। सोनीपत सीट पर भूपेंद्र हुड्डा की हार या जीत प्रदेश के आगामी सियासी दौर का फैसला करने का काम करेगी।


कुरुक्षेत्र : अर्जुन का निशाना लगेगा/


भिवानी-महेन्द्रगढ़ : बदले की बिसात बिछी है
हिसार : बड़े घराने की टक्कर
रोहतक : उलटफेर के आसार


सोनीपत : त्रिकोणीय मुकाबला
हरियाणा में सोमवार को जेजेपी के उम्मीदवार घोषित होते ही लगभग सभी पार्टियों के उम्मीदवार तय हो गए। उम्मीदवारों के नाम तय होते ही पिछले 24 घंटे में प्रदेश का सियासी नजारा बदल गया है। सभी दस की दस सीटों पर मुकाबला रोचक हो गया है। कई सीटों पर दिग्गज आमने-सामने हैं, तो कइयों पर राजनीतिक घरानों की साख दांव पर है।

सुरेन्द्र कुमार और एसपी रावत की रिपोर्ट :
हरियणा की दस सीटों पर दिग्गजों के बीच महासंग्राम के आसार
सीट बीजेपी कांग्रेस जेजेपी/आप इनैलो

सोनीपत रमेश कौशिक भूपेंद्र हुड्डा दिग्विजय चौटाला सुरेंद्र छिकारा

करनाल संजय भाटिया कुलदीप शर्मा कृष्ण कुमार अग्रवाल धर्मबीर पाढा

कुरुक्षेत्र नायब सैनी निर्मल सिंह जयभगवान शर्मा अर्जुन चौटाला

अम्बाला रत्नलाल कटारिया कुमारी शैलजा पृथ्वीराज रामपाल वाल्मीकि

रोहतक अरविंद शर्मा दीपेंद्र हुड्डा प्रदीप देशवाल धर्मबीर

हिसार बृजेंद्र सिंह भव्य बिश्नोई दुष्यंत चौटाला सुरेश कौथ

भिवानी धर्मबीर श्रुति चौधरी स्वाति यादव बलवान सिंह

गुडग़ांव राव इंद्रजीत अजय यादव महमूद खान बीरेंद्र राणा

फरीदाबाद कृष्णपाल गुर्जर वतार बड़ाना नवीन जयहिंद महेंद्र चौहान

सिरसा सुनीता दुग्गल अशोक तंवर निर्मल सिंह चरणजीत रोडी

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