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Haryana

11 दिन में महज 28 हजार क्विंटल गेहूं खरीद, 4 दिन और हड़ताल चली तो बिगड़ जाएंगे हालात

April 13, 2019 07:21 AM

COURTESY DAINIK BHASKAR APRIL 13

11 दिन में महज 28 हजार क्विंटल गेहूं खरीद, 4 दिन और हड़ताल चली तो बिगड़ जाएंगे हालात
विभाग ने कहा-सारी बातें मानी, आढ़ती मांगों पर फिर भी अड़े, किसान बोले-समस्या जल्द सुलझे
अबकी बार एक साथ पकी है प्रदेश में गेहूं, करीब 30 अप्रैल तक चलता है सीजन
भास्कर न्यूज | राजधानी हरियाणा
गेहूं की खरीद को लेकर आढ़तियों और सरकार के बीच बढ़ा विवाद कम होने का नाम नहीं ले रहा। जहां संबंधित विभाग खरीद को लेकर सभी तरह की शर्तें मान लेने का दावा कर रहा है, वहीं आढ़ती पुराने सिस्टम को लागू करने पर अड़े हैं और समूचे प्रदेश मंे हड़ताल पर हैं।
एक अप्रैल से गेहूं की खरीद प्रक्रिया शुरू होती है, 11 अप्रैल तक प्रदेश की मंडियों में महज 28 हजार क्विंटल गेहूं की खरीद हो पाई है। अबकी बार प्रदेश में ठंड का सीजन लंबा चला है। पारा बढ़ने से गेहूं एक साथ पका है, ऐसे में अगले तीन से चार दिनों में खरीद प्रक्रिया सुचारू रुप से शुरू नहीं हुई तो प्रदेशभर में हालात बिगड़ सकते हैं। किसान संगठनों का कहना है कि अब तक यह लड़ाई आढ़ती और सरकार के बीच है, किसान जब मंडियों मंे गेहूं लेकर पहुंच जाएंगे तो दिक्कत बढ़ सकती है। सरकार का फैसला सही है, इसे कड़ाई से लागू कराया जाना चाहिए। अबकी बार प्रदेश की मंडियों में 85 लाख टन गेहूं खरीद के इंतजाम किए गए हैं, लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि 90 लाख टन से अधिक गेहूं की आवक हो सकती है। जो अब तक का रिकार्ड होगा।
पुराने सिस्टम पर अड़े आढ़ती
प्रदेश के आढ़ती पुराने सिस्टम पर ही अड़े हुए हैं। वे चाहते हैं कि जे फार्म मेनुअली काटा जाए, इसी तरह से आढ़ती को जो पेमेंट पहले बीसीपीए के जरिए आती थी, ऐसे ही आनी चाहिए। इस संदर्भ में विधायक सुभाष सुधा के साथ आढ़ितयों के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत हुई है। बातचीत काफी हद तक सिरे तो चढ़ गई है, लेकिन अाखिरी फैसला सीएम को करना है। ऐसे में अब गेंद सीएम के पाले हैं क्योंकि पहले भी सीएम इस संदर्भ में आढ़तियों के प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता कर चुके हैं। हरियाणा स्टेट अनाज मंडी आढ़ती एसो. के प्रधान अशोक गुप्ता के अनुसार आढ़ती पुराने सिस्टम को लागू कराना चाहते हैं। इस संदर्भ में विधायक सुभाष सुधा के सामने प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांग रखी है। अब निर्णय सरकार को करना है, फिलहाल प्रदेश में आढ़ती हड़ताल पर हैं। हरियाणा स्टेट अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान अशोक गुप्ता का कहना है कि करनाल में प्रस्तावित महारैली निर्धारित समय पर होगी। आढ़तियों की हड़ताल तब तक जारी रहेगी, जब तक सरकार पुराने सिस्टम पर गेहूं की खरीद नहीं करती, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।
16.17 लाख किसानों के लिए दिक्कत
आढ़ती यदि अपनी मांगों पर अड़े रहे और हड़ताल चलती रही तो ऐसे में प्रदेश के 16.17 लाख किसान परिवारों की दिक्कत बढ़ जाएगी। प्रदेश की 385 अनाज मंडियों में गेहूं की खरीद होनी है। गेहूं सीजन प्रदेश में बड़ा सीजन माना जाता है, वहीं गेहूं से एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड को 320 करोड़ रुपए सालाना आय भी होती है।
सरकार अपना फैसला लागू कराए: किसान संघ
सरकार ने मंडियों मंे हेराफेरी बंद कराने के लिए यह अच्छा फैसला किया है। पारदर्शिता बढ़ेगी तो किसानों को लाभ होगा। सरकार को चाहिए कि इसे लागू कराए। जब फसल किसानों की है तो इसका पैसा किसान को मिले। सरकार आढ़ती को कमीशन दे। किसान हर साल आढ़ती के कर्ज में डूब रहा है, इससे काफी राहत मिलेगी। किसान अपना बजट बना सकेगा। सरकार की जिम्मेदारी है कि किसान की फसल की बिक्री कराए। सालाना इनकम भी मार्केटिंग बोर्ड की होती है, ऐसे में अधिकारियों की भी डयूटी बनती है कि वे मंडियों मंे जाकर गेहूं की बिक्री कराए। -रत्न मान, प्रदेशाध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन
सभी मांगों को मान लिया है : जे गणेशन
आढ़तियों की सभी मांगों को मान लिया गया है, फिर भी हड़ताल जारी है। ऐसा ठीक नहीं है। जो भी सरकार के साथ उनकी बात हुई थी, उसी अनुसार नीति बनाई गई है। फिर भी हड़ताल को लंबा चलाना ठीक नहीं है। आढ़तियों को किसानों की समस्या को ध्यान में रखना चाहिए। -जे गणेशन, सीए, मार्केटिंग बोर्ड हरियाणा

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