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KAITHAL-सिटी स्कवेयर भ्रष्टाचार मामले में नगर परिषद चेयरपर्सन, बिल्डर समेत 11 अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर

March 26, 2019 07:09 AM

COURTESY DAINIK BHASKAR MARCH 26

सिटी स्कवेयर भ्रष्टाचार मामले में नगर परिषद चेयरपर्सन, बिल्डर समेत 11 अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर
Rs.38.39 करोड़ का प्रोजेक्ट : 5 माह पहले पार्षद सरदाना ने बिल्डर को करोड़ों का फायदा पहुंचाने का लगाया था आरोप

38.39 करोड़ के ड्रीम प्रोजेक्ट सिटी स्कवेयर व बैंक स्कवेयर में बिल्डर को नियमों के खिलाफ करोड़ों रुपए का फायदा पहुंचाने के मामले में सोमवार देर शाम सीएम फ्लाइंग अम्बाला के डीएसपी सिद्धार्थ ढांडा की शिकायत पर सिटी थाने में नगर परिषद की चेयरपर्सन सीमा कश्यप, नगर परिषद के तत्कालीन ईओ विक्रम सिंह, सचिव कुलदीप मलिक, एमई सुमित मलिक, एमई रमेश वर्मा, एमई मुकेश शर्मा, जेई प्रदीप कुमार, वर्तमान एमई राजकुमार शर्मा, जेई हवा सिंह, जेई मोहित कुमार व बिल्डर शशांक गर्ग के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 7,11, आईपीसी की धारा 420, 120बी व 409 के तहत सिटी थाने में मामला दर्ज हुआ है। सिटी स्कवेयर में पाइल टेस्टिंग, डीएनआई नियमों में बदलाव, बिल्डर को गलत तरीके से लाभ पहुंचाने में भ्रष्टाचार की शिकायत वार्ड 8 से पार्षद राकेश सरदाना ने 5 नवंबर 2018 को अर्बन लोकल बॉडी (यूएलबी) डायरेक्टर को दी थी। उसके बाद छह नवंबर को ईओ व नगर परिषद चेयरपर्सन को शिकायत दी गई और आरटीआई लगाई। इसके बाद भी मामले में जब कुछ नहीं हुआ तो पार्षद ने 8 नवंबर 2018 को सीएम विंडो पर शिकायत देकर मामले में जांच की मांग की थी। इसके बाद म्यूनिसिपल एक्ट के तहत आपातकालीन बैठक 11 जनवरी को हुई, जिसमें सरदाना ने तथ्यों के साथ बिल्डर को करोड़ों रुपए का फायदा पहुंचाने व नियमों की अवहेलना करने का खुलासा किया था। इसके बाद 24 जनवरी को तीन सदस्यीय कमेटी को डीसी ने जांच सौंपी, जिसकी अध्यक्षता एडीसी ने की।
तब भी मामले में कार्रवाई न होते देख पार्षदों ने 14 फरवरी को नगर परिषद में भ्रष्टाचार के खिलाफ धरना आरंभ कर दिया। यह धरना 18 फरवरी तक चला। जिसे बीजेपी जिलाध्यक्ष ने मामले में संलिप्त अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करवाने का आश्वासन देकर समाप्त करवाया था। इस मामले में अभी तक एडीसी की फाइनल रिपोर्ट नहीं आई है। करीब 10 दिन पहले डीसी ने मामले में अधिकारियों के बाइनेम नाम स्पष्ट करने के आदेश देकर एडीसी को वापस फाइल भेजी है। जिसमें अभी तक कुछ नहीं हुआ है। इसके साथ ही सीएम फ्लाइंग व विजिलेंस जांच भी चलती रही।
नगर परिषद चेयरपर्सन बोलीं-प्रोजेक्ट में तकनीकी काम अफसरों का
कैथल|सिटी स्कवेयर के लिए बना बाहरी गेट।
11 जनवरी को हाउस की मीटिंग मेें साफ हो गया था भ्रष्टाचार : सिटी स्कवेयर व बैंक स्कवेयर में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर 11 जनवरी को पार्षदों ने आपातकालीन बैठक बुलाई थी, जिसमें मुख्य शिकायतकर्ता राकेश सरदाना ने तथ्यों के साथ बता दिया था कि मामले में अधिकारियों की मिलीभगत के चलते बिल्डर को फायदा पहुंचाया गया और भ्रष्टाचार हुआ। उसी दिन हाउस ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया कि तुरंत प्रभाव से सिटी स्कवेयर का काम रुकवा कर सभी तरह के सामान को नगर परिषद अपने कब्जे में लेगा। पाइल टेस्टिंग के नाम पर दिए गए बिल्डर से 1.88 करोड़ रुपए बाई चेक रिकवर किए जाएंगे। अगर बिल्डर पैसा नहीं दे तो पूरा पैसा अधिकारियों से रिकवर किया जाए। भ्रष्टाचार में शामिल जिन-जिन अधिकारियों के बिलों को पास करने में हस्ताक्षर हैं, सभी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए ईओ अशोक कुमार यूएलबी डायरेक्टर को लिखेंगे, ताकि उन पर कार्रवाई की जा सके। ये सब प्वाइंट मिनटस बुक में दर्ज हुए थे, जिनके आधार पर ही आगे कार्रवाई हुई। अगर मिनट बुक में ये सब बातें न लिखी जाती तो आज एफआईआर दर्ज नहीं होती, लेकिन पार्षद भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़े रहे, जिस कारण आज मामला दर्ज हुआ है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ सीएम की कथनी व करनी में कोई अंतर नहीं है। आज ये साफ हो गया। अब जांच में पूरी तरह से स्थिति साफ हो जाएगी, जो संलिप्त होगा, उसे सजा मिलेगी। इस मामले में डीसी डाॅ. प्रियंका सोनी ने भी सही जांच की और नियमानुसार कार्रवाई की। पार्षद राकेश सरदाना, मुख्य शिकायतकर्ता

सीएम फ्लाइंग के डीएसपी की शिकायत पर सिटी स्कवेयर मामले में भ्रष्टाचार समेत कई अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। प्रदीप कुमार, सिटी थाना प्रभारी, कैथल
मुझे एफआईआर होने की सूचना मिली है। किसी भी प्रोजेक्ट में तकनीकी रूप से पूरा काम अधिकारियों का होता है। वे जांच में पूरा सहयोग करेंगी। सीमा कश्यप, चेयरपर्सन, नगर परिषद, कैथल

 
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