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सर्विसेज मामले में बड़ी बेंच बनाने पर होगा विचार 14 फरवरी को मामले में जस्टिस एके सिकरी और जस्टिस अशोक भूषण ने अलग-अलग फैसला सुनाया था

March 26, 2019 06:55 AM

COURTESY NBT MARCH 26

सर्विसेज मामले में बड़ी बेंच बनाने पर होगा विचार
14 फरवरी को मामले में जस्टिस एके सिकरी और जस्टिस अशोक भूषण ने अलग-अलग फैसला सुनाया था

• विशेष संवाददाता, सुप्रीम कोर्ट

 

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार की उस गुहार पर गौर करने की बात कही है जिसमें दिल्ली सरकार ने सर्विसेज के मामले में फैसले के लिए लार्जर बेंच का गठन करने का अनुरोध किया है। गौरतलब है कि 14 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार बनाम एलजी मामले में सर्विसेज मामले को लार्जर बेंच को रेफर कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन जस्टिस एके सिकरी और जस्टिस अशोक भूषण ने इस मामले में अलग-अलग मत व्यक्त किए थे और इस कारण सर्विसेज से संबंधित मामले को लार्जर बेंच रेफर किया गया था। हालांकि इसके अलावा अन्य मामले में दोनों जजों ने सहमति से फैसले दिए हैं इसके तहत एंटी करप्शन ब्रांच को केंद्र सरकार के अधीन कर दिया गया था।

दिल्ली सरकार की ओर से इस मामले को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली अदालत में उठाया गया और कहा गया कि सर्विसेज के मामले की सुनवाई के लिए लार्जर बेंच का गठन किया जाना चाहिए ताकि मामले में जल्दी फैसला आ सके। चीफ जस्टिस ने कहा कि वह इस मसले पर गौर करेंगे। 14 फरवरी को मामले में जस्टिस एके सिकरी और जस्टिस अशोक भूषण ने अलग-अलग फैसला सुनाया था। सर्विसेज को छोड़कर बाकी मुद्दे पर दोनों ने एक मत से फैसला दिया। लेकिन सर्विसेज मामले में दोनों जजों का मत अलग था।

क्या कहा था जस्टिस सिकरी ने : दिल्ली सरकार के स्मूद फंक्शनिंग के लिए जॉइंट सेक्रेटरी और उसके ऊपर के अधिकारियों के ट्रांसफर पोस्टिंग और का मामला एलजी के हाथ में होना चाहिए जबकि इससे नीचे के अधिकारी दिल्ली, अंडमान एंड निकोबार आईसलैंड सिविल सर्विसेज (दानिक्स) और दिल्ली अंदमान निकोबार आईजलैंड पुलिस सर्विस (दानिप्स) के मामले में ट्रांसफर पोस्टिंग का अधिकार दिल्ली सरकार के पास हो और फाइल एलजी को भेजी जाए। अगर दोनों में मतभेद होगा तो मामले को राष्ट्रपति के पास भेजा जाए। ग्रेड 3 और ग्रेड 4 के कर्मियों के ट्रांसफर पोस्टिंग के लिए एक बोर्ड बनाया जाना चाहिए।

क्या कहा था जस्टिस भूषण ने : दिल्ली सरकार को सर्विसेज पर कंट्रोल करने का कोई अधिकार नहीं है। दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए जस्टिस भूषण ने कहा कि सर्विसेज केंद्र के पास रहेगा।

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