Sunday, April 21, 2019
Follow us on
Haryana

नामांकन दाखिल करने के अंतिम दिन दोपहर तीन बजे तक डाला जा सकता है मतदाता सूची में नाम

March 20, 2019 01:10 PM

चंडीगढ़ -   आगामी 12  मई  2019  को देश की 17 वी लोक सभा के लिए  हरियाणा की सभी 10  सीटों पर होने वाले चुनावो के दृष्टिगत बीते जनवरी माह में प्रकाशित मतदाता सूचियों  के अनुसार राज्य भर में मतदाताओं की  कुल संख्या 1 करोड़ 73 लाख 55 हज़ार 247 है. गत 10 मार्च 2019  को भारतीय चुनाव आयोग द्वारा पूरे देश में लोक सभा चुनावो के कार्यक्रम की घोषणा करने के बाद कई लोगो के मन में यह प्रश्न यह उठता है की क्या अब भी  उक्त प्रकाशित की गयी  मतदाता सूची में संशोधन कर नया नाम डाला जा सकता है या किसी मौजूदा मतदाता का नाम हटाया जा सकता है. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि  लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के अनुसार किसी प्रदेश में चुनावो की अधिसूचना जारी होने के उपरान्त नामांकन भरने की प्रक्रिया प्रारम्भ हो जाती है एवं यह लगभग एक सप्ताह तक चलती है. इसी प्रक्रिया में   अंतिम दिन जिस प्रकार दोपहर तीन बजे तक उम्मीदवारों द्वारा नामांकन दाखिल किये जा सकते हैं, ठीक उसी समय तक मतदाता सूचियों तक में संशोधन किया जा सकता है अर्थात नए नाम डाले जा सकते है एवं पुराने नाम, चाहिए किसी नियत  कारण से हटाए जा सकते है. ऐसा उक्त 1950  अधिनियम की धारा 23 (3 ) के अनुसार किया जा सकता है. एडवोकेट हेमंत ने इस सम्बन्ध में माननीय सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 1977 के निर्णय- नरेंद्र माड़ीवालापा खेनी बनाम माणिकराव पाटिल  का हवाला भी दिया जिसमें इस  कोर्ट द्वारा इस कानूनी व्यवस्था को  दोहराया गया था. हेमंत ने बताया की किसी क्षेत्र में  मतदाता सूची में नाम डलवाने के किये उस क्षेत्र के सामान्य निवासी  की आयु उस वर्ष एक जनवरी को 18 वर्ष होनी चाहिए. उन्होंने बताया की मूल रूप में   यह आयु 21 वर्ष होती थी परन्तु तत्कालीन राजीव गाँधी सरकार ने संसद द्वारा भारतीय संविधान में संशोधन करवा  मार्च, 1989  इसे 18 वर्ष कर दिया था. एक और रोचक तथ्य के बारे में हेमंत ने बताया की मौजूदा कानूनी प्रावधानों के तहत अगर कोई व्यक्ति विचाराधीन (अभियुक्त)  है  और इस कारण  न्यायिक हिरासत या पुलिस कस्टडी में हैं, तो उसे वोट डालने का अधिकार तो  नहीं होता परन्तु वह उम्मीदवार के तौर चुनाव लड़ सकता है. उन्होंने बताया की जुलाई, 2013 में हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2004 में पटना हाई कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले को सही ठहराते हुए   यह फैसला दिया कि जब कोई व्यक्ति विचाराधीन कैदी के तौर पर  जेल या पुलिस हिरासत में होने के कारण वोट देने के अधिकार से वंचित है, तो इस कारण वह चुनाव लड़ने के लिए भी अयोग्य होगा परन्तु तत्काल रूप से तब केंद्र में सत्तासीन मनमोहन सिंह सरकार ने संसद में एक संशोधन कानून पास करवा उक्त सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश को पलट  दिया.  हालांकि हेमंत ने बताया कि अगर कोई  व्यक्ति कोर्ट द्वारा अपराधी सिद्ध होने के बाद जेल में अपनी सजा काट रहा है, वह न तो चुनाव लड़ सकता है न ही वोट दे सकता है. 

 
Have something to say? Post your comment
 
More Haryana News
HARYANA-ऑनलाइन सिस्टम में खामियां : गेहूं बेचने के एक सप्ताह बाद भी आढ़तियों के खाते में नहीं पहुंची पेमेंट, आढ़ती बोले- सरकार का 72 घंटे में भुगतान का दावा फेल PANIPAT- बिना टोल टैक्स दिए जा रहे संजय भाटिया के काफिले को रोका तो हुआ विवाद, प्रमोद विज ने 2 हजार रुपए दिए, तब निकलीं गाड़ियां राई विधानसभा सीट के 7 बूथाें की ईवीएम चुनाव के साढ़े 4 साल बाद 15 मई को हाईकोर्ट में खुलेंगी कांग्रेस के जयतीर्थ दहिया से 3 वोट से हारे इनेलो के इंद्रजीत दहिया की याचिका पर हाईकोर्ट के आदेश फरीदाबाद से उम्मीदवार बदल सकती है कांग्रेस आप के चक्कर में रुकी लिस्ट PANCHKULA- मीटिंग में जूनियर अफसर बोला-पंचकूला में नहीं हो रही अवैध माइनिंग सीनियर अफसर बोले-गलत रिपोर्ट पर साइन नहीं करेंगे, सब टंग जाएंगे Haryana has only 174 transgender voters: Poll panel Auspicious time doesn’t wait for Khattar Gurgaon is Gurugram now, but constituency name stays same पूर्व सीएम और कांग्रेस नेता सोनीपत से नहीं लड़ेंगे चुनाव हाई कमान हारा, हुड्डा जीते GURGAON-Far from the chaos of urban life