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NBT EDIT -फिर चीन का अड़ंगा

March 15, 2019 06:32 AM

COURTESY NBT EDIT MARCH 15

फिर चीन का अड़ंगा


जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किए जाने की कोशिशों में चीन ने फिर अड़ंगा लगा दिया है। अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने के लिए संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव रखा था, लेकिन चीन ने अंतिम समय में अपनी वीटो की ताकत का इस्तेमाल करते हुए उसे चौथी बार बचा लिया। अपने इस कदम के पीछे चीन ने तकनीकी कारणों का हवाला दिया है। उसने प्रस्ताव की पड़ताल के लिए थोड़ा और वक्त मांगा है। यह तकनीकी रोक छह महीनों के लिए वैध है और इसे आगे तीन महीने के लिए बढ़ाया जा सकता है। बहरहाल, आतंकवाद को लेकर चीन का यह स्थायी रवैया पूरे विश्व को हैरान कर रहा है। अमेरिका ने चेतावनी दी है कि अगर चीन इसी तरह अड़ंगा लगाता रहा तो सुरक्षा परिषद के बाकी सदस्यों को कोई और भी कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। निश्चय ही भारत के लिए यह निराशाजनक है। जैश-ए-मोहम्मद की कार्रवाइयों से त्रस्त भारत काफी समय से इस संगठन के सरगना मसूद अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित किए जाने की मांग करता रहा है और इस मांग को दुनिया के लगभग हर देश का समर्थन भी मिल रहा है। लेकिन दुर्भाग्य से पड़ोसी चीन इस मामले में अपना अलग ही राग अलाप रहा है। दरअसल ऐसा करने के पीछे चीन का अपना हित है। पाकिस्तान में उसने बड़े पैमाने पर निवेश कर रखा है। चीन-पाक आर्थिक गलियारा और वन बेल्ट वन रोड जैसे उसके मेगा प्रॉजेक्ट एक स्तर पर आतंकी संगठनों की दया पर निर्भर हैं। मसूद अजहर के खिलाफ स्टैंड लेने पर जैश के आतंकी उसकी परियोजनाओं और कर्मचारियों को निशाना बना सकते हैं। चीन को अच्छी तरह पता है कि पाकिस्तान के सिस्टम में कट्टरपंथियों का बोलबाला है और प्रशासन पर उनका गहरा असर है। उनसे पंगा लेकर पाकिस्तान में अपने व्यापारिक हितों को सुरक्षित रखना चीन के लिए आसान नहीं होगा। दूसरी बात यह है कि चीन और पाकिस्तान के सामरिक संबंध काफी गहरे हैं। अपने ऊपर पाकिस्तान की निर्भरता बनाए रखने में ही उसका फायदा है, लिहाजा भारत-पाक रिश्ते सुधारने को लेकर भी उसने कभी कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है। दूसरे शब्दों में कहें तो भारत-पाक तनाव चीन के हित में है। अमेरिका, जापान और वियतनाम के साथ भारत की बढ़ती समझदारी भी उसे पसंद नहीं आती। लेकिन चीन जैसे ताकतवर देश का कूटनीतिक नजरिया जो भी हो, एक आतंकी संगठन के सरगना को संरक्षण देने की नीति के लिए सभ्य समाज में कोई जगह नहीं हो सकती। जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों को लेकर अब दुनिया में किसी को कोई दुविधा नहीं रह गई है। अगर चीन उन्हें लेकर अपने मौजूदा रुख पर कायम रहता है तो आने वाले दिनों में उसके घनिष्ठतम देश भी ऐसे मामलों में उसका साथ छोड़ देंगे। इस बार के ब्यौरे बता रहे हैं कि अपना पक्ष हम मजबूती से रखते रहें तो आतंकी संगठन अपने पाकिस्तानी किले में भी महफूज नहीं रह पाएंगे।
मसूद अजहर का मामला

 
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