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Haryana

अभी तक बंधवाड़ी प्लांट को पर्यावरण मंत्रालय की इजाजत नहीं

March 15, 2019 06:26 AM

COURTESY NBT MARCH 15

एनओसी मिलने के डेढ़ साल का समय लगेगा प्लांट बनने में• अगस्त 2019 में शुरू होना था प्लांट• गीले कूड़े से कैसे जनरेट करेंगे बिजली, चार लाख टन कूड़ा हो चुका है एकत्र• हर दिन 800 से एक हजार टन कूड़ा हो रहा एकत्र • एनजीटी में हर रोज होगी इस मामले में सुनवाई
हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। करीब चार लाख टन कूड़ा अरावली में एकत्र हो गया है। गंदगी बढ़ती जा रही है। गीले कूड़े से पावर कैसे जनरेट होगी। देश भर में वेस्ट टू एनर्जी प्लांट फेल पड़े हैं। अब वह सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं।

-विवेक कंबोज, पर्यावरणविद्
अगले माह तक पर्यावरण मंत्रालय से एनओसी मिलने की उम्मीद है। प्लांट बनने में करीब डेढ़ साल का समय लगेगा। 2020 तक प्लांट शुरू होने की उम्मीद है।

-गौरव जोशी, चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर, इकोग्रीन
NBT
Surender.Singh@timesgroup.com


•गुड़गांव : वेस्ट टू एनर्जी और वेस्ट टू कंपोस्ट के लिए इकोग्रीन कंपनी के बंधवाड़ी प्लांट को शुरू होने की डेट लंबी होती जा रही है। अग्रीमेंट के अनुसार भी यह डेट इसी साल अगस्त माह में पूरी हो जाएगी। लेकिन अभी तक इस प्लांट के लिए नगर निगम को पर्यावरण विभाग की एनओसी मिलना शुरू नहीं हुआ है। एनओसी के बाद इसका काम शुरू होगा। प्लांट बनने के लिए कम से कम डेढ़ साल का समय लगेगा। ऐसे में अब नई डेडलाइन 2020 के आखिर में जा टिकी है। जबकि दूसरी ओर यहां पर आए दिन सैकड़ों टन कूड़ा गुड़गांव- फरीदाबाद से एकत्र हो रहा है। सुखा और गीला कूड़ा एक साथ डाला जा रहा है।

इसी साल शुरू होना था प्लांट

इकोग्रीन कंपनी के नगर निगम से जो अग्रीमेंट किया था, उसके अनुसार अगस्त, 2019 में यह प्लांट शुरू होना था। यहां पर हर दिन एकत्र हो रहे कूड़े से बिजली और खाद बनाने का प्लांट बनाया जाना था। वेस्ट टू एनर्जी और वेस्ट को कंपोस्ट के लिए शुरू होने वाले प्लांट के लिए अब 2020 के आखिर में दावा किया जा रहा है। एनओसी मिलने के बाद 16 से 18 माह का समय प्लांट बनने मेें लगेगा।

 

हर दिन आता है डेढ़ हजार टन कूड़ा

गुड़गांव से यहां पर हर रोज करीब 800 से एक हजार टन कूड़ा आता है। इसी प्रकार फरीदाबाद से हर रोज 600 ये 800 टन कूड़ा आता है। यहां पर पिछले साल से कूड़ा ढाई लाख से बढ़कर 4 लाख टन एकत्र हो गया है। बंधवाड़ी में इस कूड़े से निकलने वाला जहरीले पानी लीचेट भी बेकाबू होता जा रहा है। गीले कूड़े से बिजली पैदा नहीं होती। जबकि यहां पर अभी तक सुखे और गीले कूड़े का एक साथ ही ढे़र लगा है।

 

एनजीटी में हर रोज सुनवाई

2015 में इस प्लांट के विरोध में एनजीटी में डाले गए केस पर अब एनजीटी रोजना सुनवाई करेगा। इसमें इस प्लांट को यहां पर लगाने से जंगल के साथ साथ वन्य जीव के अस्तित्व पर सकंट की आशंका जताई गई थी। एनजीटी इस मामले में पीसीबी और नगर निगम को फटकार लगा चुका है। शहर के पर्यावरणविद् अब सुप्रीम कोर्ट में यह मामला ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए खाका तैयार कर लिया गया है। इस केस में चल रही ढिलाई के चलते यह फैसला लिया गया है।



 
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