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ईपीएफ और इनकम टैक्स के आंकड़ों से रोजगार को नहीं माप सकते: विशेषज्ञ

February 11, 2019 05:15 AM


COURTESY DAINIK BHASKAR FEB 11

ईपीएफ और इनकम टैक्स के आंकड़ों से रोजगार को नहीं माप सकते: विशेषज्ञ
बेरोजगारी से जुड़ी रिपोर्ट रोके जाने से उपजे विवाद के बाद सरकार की ओर से प्रोविडेंट फंड, इनकम टैक्स और नेशनल पेंशन स्कीम के आंकड़ों से यह बताने की कोशिश हुई कि देश में करोड़ों नए रोजगार सृजित हुए। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इन आंकड़ों से यह नहीं कहा जा सकता कि रोजगार के मौके वाकई बढ़े हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को लोकसभा में कहा था कि असंगठित क्षेत्र में नौकरियां बढ़ी हैं। पिछले 15 महीने में 1.8 करोड़ लोग ईपीएफ में एनरोल हुए हैं। इनमें से 64% लोग 28 साल से कम उम्र के हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मार्च 2014 में नेशनल पेंशन स्कीम में 65 लाख कर्मचारियों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। अक्टूबर 2018 तक यह आंकड़ा 1.2 करोड़ हो गया।
सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के सीईओ महेश व्यास के अनुसार ईपीएफ एनरोलमेंट को रोजगार सृजन मान लेना सही नहीं है। इनमें बड़ी संख्या असंगठित क्षेत्र में पहले से काम कर रहे लोगों की हो सकती है। उनका पीएफ अकाउंट खुलने का मतलब यह नहीं कि उन्हें नई नौकरी मिली है। मोदी ने कहा था कि 36 लाख कॉमर्शियल वाहन और 27 लाख ऑटो रिक्शा बिकने से 1.25 करोड़ लोगों को रोजगार मिला। उन्होंने यह भी कहा था कि दो लाख सर्विस कॉल सेंटर खुलने, बिल्डिंगें बनने, होटलों और हाउसिंग सेक्टर में तेजी से भी बड़ी संख्या में रोजगार का सृजन हुआ। व्यास ने कहा कि अगर कोई किसान मजदूर का काम पकड़ता है या ट्रक चलाने लगता है तो इसे नई नौकरी नहीं कहा जा सकता। मोदी ने कहा था कि 7-8 सेक्टर के आंकड़ों के आधार पर ही रोजगार की दर निकाली जाती है। जबकि रोजगार का सृजन करीब 100 सेक्टर में होता है। इस पर व्यास ने कहा कि मोदी संभवत: श्रम मंत्रालय द्वारा किए गए सर्वे का हवाला दे रहे हैं। लेकिन नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गेनाइजेशन (एएसएसओ) दारा कराया गया सर्वे बेरोजगारी को मापने का सबसे अच्छा तरीका माना जाता है।
पहले से काम कर रहे लोगों का पीएफ अकाउंट खुलने का मतलब यह नहीं कि उन्हें नई नौकरी मिली है
रोजगार के सरकारी आंकड़ों पर संशय के तीन प्रमुख कारण
20 से ज्यादा कर्मचारी होने पर ही पीएफ
नियम के मुताबिक अगर किसी यूनिट में 20 या ज्यादा लोग काम कर रहे हैं तो उसे ईपीएफओ में रजिस्ट्री करवानी होगी। अगर कल तक किसी संस्थान में 19 लोग काम कर रहे थे, तो 20वें कर्मचारी के ज्वाइन करते ही उसे सभी 20 कर्मचारियों का पीएफ अकाउंट खोलना पड़ेगा। ऐसे में नई नौकरी तो एक को ही मिली, न कि 20 लोगों को।
नोटबंदी के बाद बेरोजगारी दर सबसे ज्यादा
एएसएसओ के सर्वे के मुताबिक नोटबंदी के बाद 2017-18 में बेरोजगारी दर 6.1% थी। यह 1972-73 के बाद सबसे ज्यादा है। रोजगार के जुड़े तमाम आंकड़े 1972-73 से हीी मिलने शुरू हुए थे।
दिसंबर 2018 में बेरोजगारी दर 7.4% हुई
सीएमआईई के मुताबिक दिसंबर 2018 में बेरोजगारी दर 7.4% तक पहुंच चुकी थी। बेरोजगारों की संख्या भी बढ़कर 1.1 करोड़ हो गई है। यह पिछले 15 महीनों में सबसे ज्यादा है। सरकार के ज्यादातर दावे इन आंकड़ों के उलट हैं। दोनों बातें एक साथ सही नहीं हो सकती हैं।
सरकार का दावा- 2 साल में सरकारी नौकरी के 3.79 लाख मौके आए
एजेंसी | नई दिल्ली
सरकार ने विभिन्न संस्थानों में 2017 और 2019 के बीच 3.79 लाख सरकारी नौकरियों के मौके लाने का दावा किया। सरकार ने कहा कि उसने 2017 और 2018 के बीच केंद्र सरकार के प्रतिष्ठानों में 2,51,279 नौकरियां पैदा कीं। वित्त मंत्री पीयूष गोयल द्वारा 1 फरवरी को पेश किए गए अंतरिम बजट के दस्तावेजों के विश्लेषण से पता चलता है कि 1 मार्च 2019 तक सरकार द्वारा पैदा की गई नौकरियों की संख्या 3,79,544 तक बढ़कर 36,15,770 पर पहुंच जाएंगी।
रेल, पुलिस और डाक विभाग में ज्यादातर भर्तियां
बजट दस्तावेजों में सेक्टर-वार ब्योरा दिया गया है कि कैसे केंद्र सरकार के विभिन्न संस्थानों में नौकरियों के अवसर पैदा किए गए। इसके मुताबिक भारतीय रेलवे 1 मार्च 2019 तक सबसे अधिक 98,999 नौकरियों के मौके पैदा करेगा। पुलिस विभागों में 1 मार्च 2019 तक 79,353 अतिरिक्त नौकरियों की जगह बनेगी। इसी तरह डाक विभाग में 1 मार्च 2019 तक 4,21,068 कर्मचारी होंगे

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