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इनेलो विधायक संधू के निधन के बाद अभय चौटाला के हरियाणा विधानसभा में विपक्ष के नेता पर संशय ?

January 19, 2019 04:44 PM

चंडीगढ़ - आज पेहोवा विधानसभा हलके से विधायक जसविंदर सिंह संधू के दुखद निधन के फलस्वरूप प्रदेश विधानसभा में इनेलो पार्टी के मोजूदा विधायकों की संख्या वर्तमान 18 से एक और  घटकर 17 रह गयी है. ओम प्रकाश चौटाला के नेतृत्व वाली इनेलो पार्टी के  हरियाणा विधान सभा में उनके छोटे पुत्र अभय सिंह चौटाला सदन में विपक्ष के नेता हैं. गत वर्ष  उनके बड़े भाई अजय चौटाला और उनके दो पुत्रो दुष्यंत चौटाला और दिग्विजय चौटाला ने  इनेलो पार्टी से अलग होकर अपनी अलग जननायक जनता पार्टी  बना ली गयी थी जिसमे अजय चौटाला की पत्नी, नैना सिंह चौटाला, जो इनेलो पार्टी की सिरसा जिले  से डबवाली सीट से विधायक भी शामिल है एवं सूत्रों के मुताबिक  दो  अन्य इनेलो विधायक भी उनका समर्थन कर रहे हैं. हालांकि इन  तीनो ने इस सम्बन्ध में न तो  सदन में  स्पीकर को अपने को इनेलो विधायक दल से अलग करने स्वयं लिख कर दिया  है एवं न ही इनेलो विधायक दल या विपक्ष के नेता अभय सिंह चौटाला द्वारा इस सम्बन्ध में सदन में इन तीनो के विरूद्ध  कोई कार्यवाही करने बाबत स्पीकर को लिख कर दिया गया है..  बहरहाल आज  इनेलो पार्टी विधायकों  की संख्या  घटकर 17  हो गयी है, जो सदन में कांग्रेस पार्टी की मोजूदा संख्या के बराबर हैं, परन्तु क्या  इससे अभय चौटाला के नेता प्रतिपक्ष के पद पर कोई असर पड़ेगा ? पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने इस बाबत जानकारी देते हुए बताया की सदन में विपक्ष के नेता का दर्जा माननीय स्पीकर महोदय द्वारा प्रदान किया जाता है. चूँकि अक्टूबर,2014  में हुए हरियाणा विधानसभा चुनावो में इनेलो पार्टी को 19  सीटें प्राप्त हुई थी जो भाजपा की 47  की संख्या के बाद सबसे अधिक थी, इसलिए इनेलो विधायक दल के नेता अभय चौटाला को नेता प्रतिपक्ष का पद स्पीकर महोदय द्वारा  दिया गया. इसके विपरीत कांग्रेस पार्टी को 15 सीट प्राप्त हुई हालाकि वर्ष 2016  में हरियाणा जनहित कांग्रेस के दो विधायको- कुलदीप बिश्नोई एवं रेणुका बिश्नोई द्वारा अपनी पार्टी का कांग्रेस में विधिवत विलय करने के बाद सदन में कांग्रेस के विधायको की संख्या 17  पहुँच गयी. एडवोकेट हेमंत ने बताया कि अगर विधानसभा में दो दलों की सदस्य संख्या एक सामान हो, तो विपक्ष के नेता का चयन करने समय यह देखा जाता है कि पिछले आम चुनाव में दोनों पार्टियों में से किस पार्टी को अकेले  अधिक वोट प्रतिशत प्राप्त हुआ था. हेमंत ने कहा कि जब उन्होंने भारतीय चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ो से इस बाबत जानकारी प्राप्त की, तो उन्हें पता चला कि इसमें इनेलो पार्टी ने कांग्रेस  को पछाड़ दिया था. जहाँ इनेलो पार्टी को अक्टूबर, 2014  के विधानसभा चुनावो में 24.11 प्रतिशत वोट मिले वही कांग्रेस पार्टी को मात्र 20.58  प्रतिशत मत ही प्राप्त हुए. इसलिए अगर इनेलो की सदस्य संख्या आज कांग्रेस विधायक दल के बराबर  17 भी हो गयी है, तो भी विपक्ष के नेता का पद अभय चौटाला के पास ही रहन  चाहिए. लिखने योग्य है कि गत वर्ष  अगस्त माह  में इनेलो के जींद से विधायक डॉ. हरि चंद मिढा के निधन के कारण सदन में इनेलो पार्टी की   सदस्य संख्या 19  से एक घटकर पहले ही  18 हो गयी थी एवं जिस सीट पर इस माह 28  जनवरी को उपचुनाव होना निर्धारित है. एडवोकेट हेमंत ने इस बाबत एक पूर्व मिसाल के बारे में जानकारी देते हुए बताया की वर्ष 2013  में तत्कालीन कर्नाटक विधानसभा आम चुनावो में भाजपा एवं जनता दल सेक्युलर दोनों को ही 40-40 सीटें प्राप्त हुई थी परन्तु जब नेता प्रतिपक्ष के लिए दोनों पार्टियों के मत प्रतिशत को देखा गया को एक क्षेत्रीय दल होने के बावजूद जनता दल सेक्युलर को सदन में विपक्ष के नेता का पद मिला क्योंकि इस पार्टी को उक्त चुनावो में 20.19 प्रतिशत मत प्राप्त हुए थे जबकि एक राष्ट्रीय पार्टी होते हुए भी भाजपा को केवल 19.89 प्रतिशत वोट ही हासिल हुए थे. हेमंत ने कहा की अगर नैना चौटाला एवं  उनके गुट के दो और विधायक  इनेलो विधायक पार्टी से अलग हो जाते हैं, तो ऐसी परिस्थिति में इनेलो के विधायक दल की संख्या मौजूदा परिस्थिति में 14  हो जायेगी जो  वर्तमान कांग्रेस पार्टी के विधायकों की संख्या 17  से तीन कम हो जायेगी जिससे अभय चौटाला का विपक्ष के नेता का पद छिन सकता है.  अब ऐसे परिस्थिति में यह स्पीकर महोदय  के विवेकाधिकार पर होगा कि वो इस सम्बन्ध में क्या निर्णय लेते हैं. एडवोकेट हेमंत ने बताया कि जहाँ तक आज रिक्त हुई पेहोवा सीट का प्रश्न है, वहां  उपचुनाव नहीं होगा क्योंकि मौजूदा कानून के अनुसार केवल उसी सीट पर उपचुनाव करवाया जाता है जब उस सीट के निवर्तमान विधायक, जिसका  निधन हुआ है, उसका उस समय कम से कम एक वर्ष का कार्यकाल शेष बचा  हो. हेमंत ने  बताया चूँकि  वर्तमान  हरियाणा विधानसभा की  अवधि इस वर्ष नवंबर माह तक है इसलिए पेहोवा सीट पर कोई उपचुनाव नहीं होगा. यहाँ तक कि अगर जींद में कैथल से मौजूदा विधायक रणदीप सुरजेवाला भी अगर कांग्रेस के प्रत्याशी  के तौर पर उपचुनाव में विजयी होकर कैथल सीट से अपना इस्तीफ़ा देंगे, तो उस परिस्थिति में भी कैथल में कोई उपचुनाव नहीं होगा. 

 
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