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रियल एस्टेट को राहत समेत कई फैसले टले'

January 11, 2019 06:38 AM

COURTESY NBT JAN 11

रियल एस्टेट को राहत समेत कई फैसले टले'


अंडरकंस्ट्रक्शन फ्लैट और मकान पर GST कम करने पर काउंसिल की मीटिंग में चर्चा हुई, लेकिन इसके साथ रेवेन्यू कम होने के साथ कई तकनीकी पेचीदगियां सामने आईं

GST काउंसिल की मीटिंग में जो फैसले लिए गए, उससे रेवेन्यू का करीब 3,000 से 4,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा

छोटे कारोबारियों को ज्यादा छूट देने से टैक्स कलेक्शन पर थोड़ समय के लिए असर पड़ेगा

टैक्स एक्सपर्ट का मानना है कि सरकार के इन फैसलों से छोटे कारोबारियों को काफी

फायदा होगा

छोटे राज्यों के छोटे कारोबारियों को 40 लाख रुपये तक की GST छूट देने से इनकार
सीमेंट पर GST कम करने को लेकर राज्यों के बीच सहमति नहीं बनी और लॉटरी पर 28% GST लगाने का फैसला नहीं हो पाया
[ जोसफ बर्नाड | नई दिल्ली ]

जी एसटी काउंसिल की गुरुवार को हुई बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए, मगर रियल एस्टेट को राहत समेत कुछ मामलों में फैसलों को भी टाल दिया गया। GST काउंसिल की मीटिंग के बाद एक बातचीत में रेवेन्यू सेक्रेटरी अजय भूषण पांडे ने कहा कि कई मामलों में सहमति नहीं बन पाई है। GST काउंसिल की अब तक की परंपरा रही है कि जो भी फैसले लिए गए हैं, सर्वसम्मति से लिए गए हैं। यही कारण है कि काउंसिल की मीटिंग में अंडरकंस्ट्रक्शन फ्लैट और मकान पर GST को कम करने के फैसले को टालना पड़ा। सीमेंट पर GST कम करने को लेकर पहले भी राज्यों में सहमति नहीं बन पाई थी। इसी तरह से राज्य सरकारों की लॉटरी पर 28 पर्सेँट GST लगाने को लेकर भी फैसला नहीं हो पाया।

उन्होंने कहा कि अंडरकंस्ट्रक्शन फ्लैट और मकान पर GST कम करने पर काउंसिल की मीटिंग में चर्चा हुई, मगर इसके साथ रेवेन्यू कम होने के साथ कई तकनीकी पेचीदगियां सामने आई हैं। दरअसल, राज्यों में स्टाम्प ड्यूटी अलग हैं।

जमीन और निर्माण लागत भी अलग-अलग हैं। ऐसे में GST कम होने पर कई राज्यों को कई तरह की तकनीकी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। यही कारण है कि इस मामले में कई राज्यों ने सवाल उठाए हैं और काउंसिल ने यह माना कि इन सवालों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है और इसके बाद ही इस पर फैसला लिया जाना चाहिए। इसे ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स को भेज दिया गया है। सीमेंट पर GST कम करने पर अजय भूषण पांडे ने कहा कि GST काउंसिल की पिछली बैठक पर भी इस मामले में सहमति नहीं बन पाई थी। यही कारण है कि इस बार इस पर ज्यादा चर्चा नहीं हुई। छोटे कारोबारियों को इतनी छूट दी गई है, तो क्या इससे टैक्स कलेक्शन पर असर नहीं पड़ेगा/ इस पर रेवेन्यू सेक्रेटरी ने कहा कि निश्चित रूप से असर पड़ेगा, मगर कुछ समय तक। GST काउंसिल की मीटिंग में जो फैसले लिए गए, उससे रेवेन्यू का करीब 3,000 से 4,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा, मगर यह अस्थायी होगा। जो कारोबारी कंपोजिशन स्कीम के तहत आएंगे या फिर जिनका कारोबार 40 लाख रुपये तक है, वे बेशक GST से छूट जाएंगे, मगर इनमें कई ऐसे कारोबारी भी होंगे, जो इसका लाभ नहीं लेना चाहेंगे, क्योंकि उन्हें फिर इनपुट क्रेडिट नहीं मिलेगा। ऐसे में कारोबारी अपना नफा-नुकसान देखकर फैसला लेंगे। कुल मिलाकर मामला काफी संतुलित रहेगा। बाद में टैक्स कलेक्शन की स्थिति में सुधार होगा।

रेवेन्यू सेक्रेटरी ने कहा कि छोटे राज्यों के छोटे कारोबारियों को हम 40 लाख रुपये तक की GST छूट नहीं दे सकते। इसके पीछे कारण है कि ऐसा होने पर छोटे राज्यों की आमदनी बुरी तरह से प्रभावित होगी। मान लीजिए कि किसी पूर्वोत्तर राज्य ने यह फैसला लागू कर दिया है कि जिस कारोबारी की सालाना आमदनी 40 लाख रुपये है, उसे GST देने की जरूरत नहीं। ऐसे में उस राज्य के 50 से 60 पर्सेंट कारोबारी GST के दायरे से बाहर हो जाएंगे। यही कारण है कि हमने छोटे राज्यों के लिए GST की सीमा छूट 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 40 लाख रुपये कर दिया है।

इधर, टैक्स एक्सपर्ट निखिल गुप्ता का कहना है कि सरकार के इन फैसलों को बेशक राजनीतिक चश्मे से देखा जा रहा है, लेकिन इससे छोटे कारोबारियों को काफी फायदा होगा। उन छोटे कारोबारियों को ज्यादा फायदा होगा, जो एक ही राज्य में कारोबार करते हैं और जिनको इनपुट क्रेडिट लेने की जरूरत नहीं है।

 
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