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नाराज मनमोहन बोले, क्रेडिट नहीं चाहिए’

January 11, 2019 06:37 AM

COURTESY NBT JAN N11

नाराज मनमोहन बोले, क्रेडिट नहीं चाहिए’


विशुद्ध राजनीति
दास्तान
संजय बारू, वरिष्ठ पत्रकार

जब ग्रामीण रोजगार से जुड़ा प्रस्ताव डॉ. मनमोहन सिंह के पास आया था तो वे बहुत उत्साहित हो उठे थे। यह प्रस्ताव एनएसी की ओर से आया था। डॉ. सिंह महाराष्ट्र में ऐसी स्कीम के अमल में आने के बारे में परिचित थे और इस बारे में बहुत सकारात्मक सोच रखते थे। बतौर योजना आयोग उपाध्यक्ष 1980 में डॉ. मनमोहन सिंह ने इस योजना पर विस्तार से रिसर्च और अध्ययन भी किया था। वह बतौर पीएम इस योजना को पूरे देश में लागू करना चाहते थे। उनकी मंशा थी कि राज्य में चल रहा महाराष्ट्र रोजगार गारंटी स्कीम पूरे देश में मनरेगा के नाम से चले। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्त मंत्री पी चिदंबरम के मन में बस वित्तीय घाटे को लेकर कुछ आशंका थी। वित्तीय हालत ऐसी नहीं थी कि खुल कर खजाना खोला जाए। साथ ही इसके बजट प्रावधान और इसके लाभार्थियों की संख्या पर मंथन हो रहा था। हर पहलू पर बात हो रही थी, लेकिन कहना होगा कि तब ग्रामीण विकास मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह, जो फिजिक्स के भी प्रफेसर रह चुके हैं, ने पॉप्युलिस्ट और वित्तीय प्रावधान के बीच का रास्ता निकालने में अहम भूमिका निभाई थी। इन तीनों ने तब फिर आगे का रोडमैप तय किया।

 

राहुल को श्रेय देने की होड़

कांग्रेस मनरेगा का क्रेडिट राहुल गांधी को देने के लिए आतुर थी। इसी सिलसिले में कुछ मौकों पर ऐसी स्थिति भी पैदा हो गई जिससे शर्मिंदगी के हालात बन गए। ऐसा ही मौका था मनमोहन सिंह के जन्म दिन का। उस दिन मुझे भी ऐसी ही परेशानी और विचित्र स्थिति का सामना करना पड़ा था। 26 सितंबर 2007 को, जिस दिन डॉ. सिंह का जन्म दिन था उस दिन तब कांग्रेस के जनरल सेक्रेटरी बने राहुल गांधी पार्टी के दूसरे नेताओं के साथ डॉ सिंह को बधाई देने आए। चाय और नाश्ते की औपचारिकता के बाद नेताओं के बीच तमाम नीतियों पर बात होने लगी। मीटिंग के अंत में सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल ने डॉ. सिंह को एक बयान की कॉपी दी जिसे पीएमओ की ओर से मीडिया में जारी करने का आग्रह किया। बयान में यह दावा किया गया था कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से आग्रह किया है कि मनरेगा योजना को देश के सभी 500 से अधिक जिलों में लागू किया जाय। तब तक इस योजना को देश के 200 पिछड़े जिलों में ही लागू किया जा सका था। मैंने अहमद पटेल से कहा कि पीएमओ की तरफ से ऐसे बयान जारी नहीं किए जाते हैं और बेहतर होगा कि इसे पार्टी के स्तर पर जारी किया जाए। पीएमओ बस यह तस्वीर जारी कर सकता है कि मनमोहन सिंह को जन्म दिन देने की बधाई देने राहुल गांधी और दूसरे नेता आए। बाद में एक सीनियर पत्रकार ने मुझसे फोन कर पूछा कि क्या पीएम मनमोहन सिंह ने राहुल गांधी के उस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया जिसके तहत पूरे देश में मनरेगा लागू करने की मांग की गई है/ मैंने उन्हें याद दिलाया कि पीएम ने अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में इस बारे में पहले ही बता दिया था और पीएमओ इसके लिए ग्रामीण विकास और वित्त मंत्रालय के साथ संपर्क में है।

 

एसएमएस ने बढ़ाई मुश्किल

उसी दिन मैनें पत्रकारों को यह टेक्स्ट भी भेज दिया कि मनरेगा को पूरे देश में लागू करने की योजना को पीएम मनमोहन सिंह का बर्थ डे गिफ्ट समझ लिया जाए। उस शाम सभी टीवी चैनलों पर और अगले दिन सभी अखबारों में राहुल की मांग को प्रमुखता से दिखाया गया। यहां यह भी बताना जरूरी है कि अगर सोनिया या राहुल का उस दिन जन्मदिन होता तो संभवत: उसी दिन जन्मदिन तोहफे के रूप में पूरे देश में इस योजना को लागू करने का एलान जरूर होता। पार्टी के रणनीतिकार ऐसी ही योजना बनाते, लेकिन मनमोहन सिंह के जन्मदिन से जोड़ने की ऐसी कोई मंशा कांग्रेस नेतृत्व के अंदर नहीं थी।

मेरे बारे में पार्टी के अंदर बात होने लगी थी। एक सीनियर नेता ने सीनियर संपादक से कहा कि ‘संजय बारू को क्या लगता है, डॉ. मनमोहन सिंह कांग्रेस को चुनाव जिता सकते हैं/ हमें राहुल की छवि को प्रॉजेक्ट करना होगा।’ जब मैंने यह सुना तो लग गया था कि मैं परेशानी में पड़ने वाला हूं। अगले ही दिन मुझे पीएम ने बुला लिया। जब मैं उनके कमरे में पहुंचा तब उनके कमरे से नायर, नारायणन और पुलक बाहर निकल रहे थे। तीनों ने निकलते हुए मुझसे आंख तक नहीं मिलाई। तभी मुझे अहसास हो गया था कि मसला गंभीर है।

डॉ. साहब अपनी कुर्सी पर हाथ मोड़े बैठे थे। उनकी मुखमुद्रा देखकर ही अंदाजा लग गया कि वे नाराज हैं। उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या मैंने पत्रकारों को वह एसएमएस भेजा था जिसमें नरेगा के देशव्यापी विस्तार को मेरे जन्मदिन का तोहफा बताया गया था/ मैंने कहा, ‘भेजा था, लेकिन उसमें कुछ ऐसा नहीं था कि किसी को ठेस पहुंचे।’ मनमोहन सिंह खामोश हो गए। मैंने खामोशी को तोड़ते हुए कहा- पार्टी इसका पूरा क्रेडिट राहुल गांधी को देना चाहती थी, लेकिन आप और रघुवंश प्रसाद सिंह दोनों क्रेडिट पाने के उतने ही हकदार हैं। मैंने कुछ गलत नहीं किया।’

‘मुझे खुद के लिए कोई क्रेडिट नहीं चाहिए’, मनमोहन सिंह ने पलट कर कहा। वह गुस्से में भरे थे।

मैंने कहा, यह सुनिश्चित करना मेरा काम है कि आपकी अच्छी इमेज बनी रहे और आप जिस चीज के हकदार हैं उसका क्रेडिट आपको मिले। पार्टी अपना काम सोनिया-राहुल के लिए करे, मुझे यह आपके लिए करना है।’ लेकिन यह सुनकर मनमोहन सिंह का गुस्सा कम नहीं हुआ। उन्होंने फिर दोहराया- मैं नहीं चाहता कि आप मेरी इमेज को प्रॉजेक्ट करें।

(बारू की पुस्तक The Accidental Prime Minister से साभार

 
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