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आंध्र प्रदेश में ब्राह्मणों को आखिर क्यों बांटी जा रही हैं महंगी कारें सीएम चंद्रबाबू नायडू ने 4 जनवरी को अमरावती में 30 बेरोजगार ब्राह्मण युवकों को कारें दीं।

January 11, 2019 06:26 AM

COURTESY NBT JAN 11
राजनीतिक मायने भी छिपे हैं इस फिक्र के पीछे
Mohd.Nadeem@timesgroup.com

 

आंध्र प्रदेश इस वक्त एक खास वजह से चर्चा में है। वहां की सरकार गरीबी रेखा से नीचे वाले बेरोजगार ब्राह्मण युवाओं को रोजगार मुहैया कराने के उद्देश्य से स्विफ्ट डिजायर कार उपलब्ध करा रही है। इसके लिए दो लाख रुपये सरकार की तरफ से दिए जा रहे हैं, जो सब्सिडी के रूप में होंगे, जिन्हें वापस नहीं करना होगा। बाकी की राशि सस्ते ब्याज दर पर किश्तों में लाभार्थी को चुकानी होगी। 50 युवाओं को गाड़ी देकर इस योजना की शुरूआत की जा रही है। इसके बाद इसका विस्तार होना है। इस योजना की जानकारी आने के बाद पूरे देश का चौंकना स्वाभाविक था लेकिन इस बात की जानकारी कम ही लोगों को होगी कि आंध्र प्रदेश एक ऐसा राज्य है, जहां ब्राह्मणों के कल्याण के लिए सरकारी उपक्रम के रूप में एक कॉरपोरेशन (आंध्र प्रदेश ब्राह्मण वेलफेयर कॉरपोरेशन, जिसे वहां एबीसी कहा जाता है) पहले से ही बना हुआ है। इस कॉरपोरेशन की इकाई के रूप में आंध्र प्रदेश ब्राह्मण कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी भी है, जो कि जरूरतमंद ब्राह्मणों को सस्ती ब्याज दर पर कर्ज मुहैया कराती है। कॉरपोरेशन ब्राह्मणों के कल्याण और उन्हें प्रोत्साहन देने के लिए अलग-अलग तरह की नौ योजनाएं चला रहा है।
आंध्र प्रदेश में फिलहाल नौ ऐसी योजनाएं हैं जो सिर्फ और सिर्फ ब्राह्मण समाज को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं। इनके नाम भी ऋषि-मुनियों पर रखे गए हैं।

वेदव्यास : इसके तहत ब्राह्मण परिवार के जो भी बच्चे वैदिक शिक्षा ग्रहण करना चाहते हैं, उनके पूरे कोर्स का खर्च कॉरपोरेशन देता है। ये कोर्स एक साल से लेकर छह साल की अवधि तक के होते हैं।

गायत्री : इस योजना के तहत हाई स्कूल बोर्ड से लेकर पीजी कोर्स तक टॉपर्स ब्राह्मण छात्रों को नकद धनराशि देकर प्रोत्साहित किया जाता है। यह धनराशि 7500 रुपये से लेकर 20 हजार रुपये तक होती है।

भारती : इसके तहत ऐसे ब्राह्मण छात्रों को अपनी उच्च शिक्षा विदेश में पूरी करने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है, जिनके परिवार की सालाना वार्षिक आय छह लाख से कम है। आर्थिक सहायता पांच लाख से दस लाख के बीच होती है।

चाणक्य : गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले ब्राह्मण युवाओं को स्वरोजगार के लिए कार और ई-ऑटो की खरीद कराई जाती है। स्विफ्ट डिजायर कार के लिए सरकार की ओर से दो लाख और ई-ऑटो के लिए 75 हजार की सब्सिडी उपलब्ध कराई जाती है।

द्रोणाचार्य : इस योजना के तहत उन युवाओं को स्किल डिवेलपमेंट की ट्रेनिंग दी जाती है, जिनके परिवार की वार्षिक आय छह लाख रुपये से अधिक नहीं होती है। अधिकतम आयुसीमा 32 साल होनी चाहिए।

वशिष्ट : इस योजना के तहत ब्राह्मण छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए निजी कोचिंग संस्थाओं में पढ़ाई की सुविधा दी जाती है। कोचिंग की फीस सरकार अदा करती है।

कश्यप : इस योजना के तहत अनाथ बच्चों, विधवाओं और निराश्रित बूढ़ों को सरकार हर महीने एक हजार रुपये के हिसाब से उनकी जीविका चलाने को आर्थिक सहायता देती है। निराश्रित गृह में रहने की स्थिति में यह राशि 3000 होती है।

गरुण : इस योजना के तहत ऐसे किसी ब्राह्मण परिवार, जिसकी सालाना आय 75 हजार रुपये से कम है, को किसी व्यक्ति की मृत्यु पर अंतिम संस्कार के खर्चों के लिए सरकार 10 हजार रुपये की सहायता देती है।

भार्गव : इस योजना के तहत ब्राह्मण समुदाय के समृद्ध लोगों को अपने समुदाय के लिए कुछ करने को प्रेरित किया जाता है।
पढ़ाई के लिए विदेश भेजने का इंतजाम भी किया गया
सरकारी पक्ष को सुनें तो मुख्यमंत्री के इस कदम के पीछे कोई राजनीतिक निहितार्थ नहीं हैं। राज्य के मुख्यमंत्री होने के नाते अपने नागरिकों की भलाई के लिए योजनाएं बनाना, उनका क्रियान्वयन सुनिश्चित कराना यह उनकी ड्यूटी में शामिल है लेकिन दलित नेता सूर्यप्रकाश नल्ला इसके पीछे सीधी राजनीति देखते हैं। उनका कहना है कि राज्य में ब्राह्मण भले कोई बड़ा वोटबैंक न हों लेकिन लगभग हर घर में उसकी पहुंच है क्योंकि सुख-दुख के जितने भी कर्मकांड होते हैं, वह ब्राह्मणों के द्वारा ही होते हैं। नायडू ने ब्राह्मणों को खुश करने का दांव इसलिए खेला है कि उन्हें लगता है कि घर-घर 'माउथ टु माउथ' पब्लिसिटी में ब्राह्मण उनका जरिया बन सकते हैं। दूसरा, यह भी माना जाता है कि ब्राह्मण का आशीर्वाद बहुत लाभकारी होता है। इस वजह से चंद्रबाबू सरकारी खजाने से ब्राह्मणों को खुश कर उनका आशीर्वाद लेना चाहते हैं।
आंध्र प्रदेश में ब्राह्मणों को आखिर क्यों बांटी जा रही हैं महंगी कारें
सीएम चंद्रबाबू नायडू ने 4 जनवरी को अमरावती में 30 बेरोजगार ब्राह्मण युवकों को कारें दीं।

 
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