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SONIPAT-अटेरना गांव में 83 एकड़ गेहूं की खड़ी फसल उजाड़ कर प्रशासन ने पंचायत को दिलाया कब्जा

January 11, 2019 05:38 AM

COURTESY DAINIK BHASKAR JAN 11

अटेरना गांव में 83 एकड़ गेहूं की खड़ी फसल उजाड़ कर प्रशासन ने पंचायत को दिलाया कब्जा
सालों से गांव के किसानों का था 366 एकड़ पर कब्जा, अभी भी कुछ जमीन का स्टे आॅर्डर

अटेरना गांव की 366 एकड़ जमीन को लेकर किसानों व पंचायत के बीच विवाद चल रहा है। गुरुवार को प्रशासन ने भारी पुलिस बल के साथ 83 एकड़ जमीन पर खड़ी गेहूं की फसल को उजाड़कर ग्राम पंचायत को कब्जा दिला दिया। बाकी जमीन पर कोर्ट का स्टे ऑर्डर दिखाया गया। किसानों ने प्रशासन की इस कार्रवाई को गलत बताया और आरोप लगाया कि उनके पूर्वज हंसापुर गांव की इस जमीन का 1227 से लगान दे रहे थे। 1954 में गलत तरीके से जमीन की गिरदावरी पंचायत के नाम हो गई। जिस वजह से वे पिछले 65 साल से मलकियत की लड़ाई कोर्ट में लड़ रहे हैं। कानूनी रूप से शामलात देह की जमीन पर खड़ी फसल को उजाड़कर कब्जा नहीं लिया जा सकता।
कब्जा दिलाने के लिए ड्यूटी मजिस्ट्रेट देशराज कंबोज, बीडीपीओ मनीष मलिक, पंचायत अधिकारी मुकेश कुमार, डीएसपी हरेंद्र, एसएचअो बीर सिंह, कानूनगो अजीत सिंह पुलिस बल के साथ दस ट्रैक्टर व दो जेसीबी लेकर विवादित भूमि में पहुंचे। जहां किसानों ने उन्हें जमीन पर स्टे ऑर्डर होना बताया। जब ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने स्टे ऑर्डर की कॉपी मांगी तो वे उसे पेश नहीं कर सके। जिस वजह से ड्यूटी मजिस्ट्रेट के आदेश पर 83 एकड़ जमीन में खड़ी गेहूं व मक्का की फसल को उजाड़ दिया गया। करीब पांच से छह घंटे तक प्रशासन की टीम ने कब्जा कार्रवाई की। ड्यूटी मजिस्ट्रेट देशराज कंबोज ने सरपंच सुरेश देवी चौहान को जमीन का कब्जा सौंपा। सरपंच सुरेश देवी के पति प्रवीन चौहान ने कहा कि जमीन पंचायत के नाम है। किसान पंचायती जमीन पर गलत तरीके से कब्जा किए हुए थे। कुछ जमीन का हाईकोर्ट में केस चल रहा है। जिस पर स्टे हैं। उस जमीन पर अभी कब्जा नहीं लिया गया है।
वर्ष 1227 से लगान दे रहे थे हंसापुर के किसान, 1954 में शामलात जमीन को पंचायत में किया था तब्दील
राई. अटेरना गांव में गेहूं की खड़ी फसल को उजाड़ते ट्रैक्टर एवं आदेश देते नायब तहसीलदार देशराज कंबोज।
भास्कर न्यूज | राई
अटेरना गांव की 366 एकड़ जमीन को लेकर किसानों व पंचायत के बीच विवाद चल रहा है। गुरुवार को प्रशासन ने भारी पुलिस बल के साथ 83 एकड़ जमीन पर खड़ी गेहूं की फसल को उजाड़कर ग्राम पंचायत को कब्जा दिला दिया। बाकी जमीन पर कोर्ट का स्टे ऑर्डर दिखाया गया। किसानों ने प्रशासन की इस कार्रवाई को गलत बताया और आरोप लगाया कि उनके पूर्वज हंसापुर गांव की इस जमीन का 1227 से लगान दे रहे थे। 1954 में गलत तरीके से जमीन की गिरदावरी पंचायत के नाम हो गई। जिस वजह से वे पिछले 65 साल से मलकियत की लड़ाई कोर्ट में लड़ रहे हैं। कानूनी रूप से शामलात देह की जमीन पर खड़ी फसल को उजाड़कर कब्जा नहीं लिया जा सकता।
कब्जा दिलाने के लिए ड्यूटी मजिस्ट्रेट देशराज कंबोज, बीडीपीओ मनीष मलिक, पंचायत अधिकारी मुकेश कुमार, डीएसपी हरेंद्र, एसएचअो बीर सिंह, कानूनगो अजीत सिंह पुलिस बल के साथ दस ट्रैक्टर व दो जेसीबी लेकर विवादित भूमि में पहुंचे। जहां किसानों ने उन्हें जमीन पर स्टे ऑर्डर होना बताया। जब ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने स्टे ऑर्डर की कॉपी मांगी तो वे उसे पेश नहीं कर सके। जिस वजह से ड्यूटी मजिस्ट्रेट के आदेश पर 83 एकड़ जमीन में खड़ी गेहूं व मक्का की फसल को उजाड़ दिया गया। करीब पांच से छह घंटे तक प्रशासन की टीम ने कब्जा कार्रवाई की। ड्यूटी मजिस्ट्रेट देशराज कंबोज ने सरपंच सुरेश देवी चौहान को जमीन का कब्जा सौंपा। सरपंच सुरेश देवी के पति प्रवीन चौहान ने कहा कि जमीन पंचायत के नाम है। किसान पंचायती जमीन पर गलत तरीके से कब्जा किए हुए थे। कुछ जमीन का हाईकोर्ट में केस चल रहा है। जिस पर स्टे हैं। उस जमीन पर अभी कब्जा नहीं लिया गया है।
किसानों ने दो महीने का समय मांगा, प्रशासन ने ठुकराया
भारतीय किसान संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष ताहर सिंह चौहान, राजपूत महासभा के प्रधान चरण सिंह चौहान, पावसरा गांव के केहर सिंह चौहान, मनौली के कैलाश नंबरदार ने ड्यूटी मजिस्ट्रेट देशराज कंबोज से दो महीने का समय मांगा। किसानों ने कहा कि गेहूं की फसल की कटाई के बाद वे खुद जमीन से कब्जा छोड़ देंगे। प्रशासन ने उनका प्रस्ताव ठुकरा दिया और कब्जा कार्रवाई का आदेश दिया।
पंडित लख्मीचंद यूनिवर्सिटी का भी पंचायत ने दे रखा है प्रस्ताव : पंचायत ने पंचायती जमीन में पंडित लख्मीचंद संगीत यूनिवर्सिटी के लिए भी प्रस्ताव सरकार को भेज रखा है। चर्चा रही कि पंचायत इसी जमीन पर यूनिवर्सिटी बनवाने के लिए प्रयासरत है।
अटेरना गांव की पंचायत को 83 एकड़ जमीन में कब्जा दिलाया गया है। इस जमीन पर कोर्ट का कोई स्टे ऑर्डर नहीं था। जिस जमीन पर स्टे था, उसे छोड़ दिया गया है। देशराज कंबोज, नायब तहसीलदार एवं ड्यूटी मजिस्ट्रेट राई।
जमीन का विवाद 1954 से चल रहा है, हमारे साथ गलत व्यवहार कर रहा प्रशासन
किसान बीर सिंह, धनसिंह, बबलू, मदन, राजपाल, रणसिंह, जसवंत, आनंद, राजबीर सिंह ने बताया कि अटेरना गांव के साथ एक गांव हंसापुर था, जो अब बेचिराग गांव है। इस गांव की 366 एकड़ जमीन पर अटेरना गांव के किसानों का कब्जा है। इस जमीन का उनके पूर्वज वर्ष 1227 से लगान दे रहे थे। लगान की पुरानी रसीद भी उनके पास है। 1954 में शामलात देह की इस जमीन को गलत तरीके से पंचायत में तब्दील कर दिया गया था। किसानों ने उसके बाद भी जमीन पर कब्जा नहीं छोड़ा। आज तक किसानों का ही जमीन पर कब्जा था। पंचायत व प्रशासन मिलीभगत कर किसानों से उनकी जमीन छीन रहा है। पंचायत के खिलाफ किसानों ने हाईकोर्ट में मुकदमा कर रखा है। प्रशासन ने कानून का उल्लंघन कर जमीन पर कब्जा लिया है

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