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Haryana

भाजपा ने मिड्‌ढा तो जवाब में कांग्रेस ने सुरजेवाला को उतारा तगड़ा सियासी मुकाबला : 5 राज्यों में चुनावी नतीजों के बाद प्रतिष्ठा की लड़ाई बना जींद उपचुनाव

January 10, 2019 06:01 AM

COURTESY DAINIK BHASKAR JAN10

भाजपा ने मिड्‌ढा तो जवाब में कांग्रेस ने सुरजेवाला को उतारा
तगड़ा सियासी मुकाबला : 5 राज्यों में चुनावी नतीजों के बाद प्रतिष्ठा की लड़ाई बना जींद उपचुनाव
दिग्विजय चौटाला को उतार सकती है जेजेपी, इनेलो में कर्ण चौटाला के नाम पर भी विचार, नामांकन का आज आखिरी दिन

जींद विधानसभा सीट पर 28 जनवरी को होने जा रहे उपचुनाव के लिए नामांकन का गुरुवार को आखिरी दिन है। इसके लिए बुधवार को भाजपा ने पूर्व विधायक दिवंगत डॉ. हरिचंद मिड्‌ढा के बेटे डॉ. कृष्ण मिड्‌ढा काे उम्मीदवार बनाया। जवाब में कांग्रेस ने देर रात पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी व कैथल के विधायक रणदीप सुरजेवाला को मैदान में उतार दिया। वहीं, जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) ने जींद में देर शाम तक बैठक की, पर प्रत्याशी फाइनल नहीं हो सका। पार्टी दिग्विजय चौटाला व पूर्व विधायक बृजमोहन सिंगला के बेटे अंशुल सिंगला के नाम पर विचार कर रही है। इनेलो ने भाजपा के सुरेंद्र बरवाला को आॅफर दिया है। लक्ष्य डेयरी के मालिक बलजीत सिंह रेढू के नाम पर भी विचार हो रहा है। चर्चा यह भी है कि पार्टी अभय के बेटे कर्ण को भी उतार सकती है। मौजूदा हालात में प्रदेश की सियासत में जींद फिर निर्णायक भूमिका में आ गया है।
उम्मीदवारों को लेकर 4 मुख्य दलों की दिनभर बनी रणनीति पर वो सबकुछ जो आप जानना चाहते हैं...
भाजपा : मिड्‌ढा को उतारने के 3 बड़े कारण
कृष्ण मिड्‌ढा
कांग्रेस : सुरजेवाला को उतारने के 3 बड़े कारण
सुरजेवाला
1. उनके पिता पूर्व विधायक डॉ. हरिचंद मिड्‌ढा यहां से 2 बार विधायक रहे थे। उनकी छवि का फायदा मिल सकता है।
2. मिड्‌ढा सीएम मनोहर लाल से मिलकर पार्टी में शामिल हुए थे। हरिचंद मिड्‌ढा की सभी मांगों को निधन के बाद विधानसभा में स्वीकार कर सीएम ने पहले ही संकेत दे दिए थे।
3. इनेलो से आए डॉ. कृष्ण मिड्‌ढा को उम्मीदवार बनाकर उसके वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए भाजपा ने यह दांव खेला।
1. लगातार बैठकों के दौर के बावजूद किसी एक नाम पर वरिष्ठ नेताओं में सहमति नहीं बन रही थी। चुनाव में गुटबाजी का सामना करना पड़ सकता था।
2. विधानसभा चुनाव ज्यादा दूर नहीं हैं। उपचुनाव में भाजपा को टक्कर देने के लिए मजबूत उम्मीदवार उतारना जरूरी था।
3. सुरजेवाला व चौटाला परिवार में हमेशा टक्कर रही है। चौटाला परिवार को उसके गढ़ में टक्कर देने को रणदीप को उतारा गया।
ऐसे हुआ रणदीप का नाम फाइनल
कांग्रेस प्रत्याशी के नाम को लेकर सुबह 9:30 बजे केंद्रीय पर्यवेक्षक केसी वेणुगोपाल की अध्यक्षता में दिल्ली में सवा दो घंटे मैराथन बैठक हुई। इसमें पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा, रणदीप सुरजेवाला, दीपेंद्र हुड्डा, शैलजा, किरण चौधरी और कैप्टन अजय यादव ने भाग लिया। किसी एक नाम पर सहमति नहीं बनी। शाम 7:30 फिर बैठक हुई, लेकिन किसी नाम पर सहमति नहीं बनी। सभी नेताओं ने फैसला कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर छोड़ दिया। रात 9:30 बजे वेणुगोपाल ने जयपुर से लौटे राहुल गांधी को संभावित प्रत्याशियों पर रिपोर्ट दी।
रात 10:30 बजे राहुल ने सुरजेवाला से बात कर चुनाव में उतरने को कहा। 11:20 बजे मुकुल वासनिक के हस्ताक्षर युक्त पत्र जारी कर सुरजेवाला को प्रत्याशी घोषित कर दिया।
नॉलेज : 1993 में शमशेर सिंह सुरजेवाला राज्यसभा चले गए तो बेटे रणदीप सुरजेवाला ने नरवाना से उपचुनाव लड़ा। हालांकि, वे ओमप्रकाश चौटाला से हार गए थे। कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी सुरजेवाला 26 साल बाद फिर से उपचुनाव में उतरे हैं। सुरजेवाला फिलहाल राहुल की कोर टीम के सबसे महत्वपूर्ण सदस्यों में हैं। राहुल ने उन्हें उतारकर खेमों में बंटी प्रदेश कांग्रेस को एकजुट होने का संदेश दिया है।
जेजेपी : दिग्विजय के चांस इसलिए ज्यादा
पार्टी संस्थापक अजय चौटाला के बेटे दिग्विजय पार्टी का बड़ा चेहरा हैं।
जींद चौटाला परिवार का पारंपरिक वोट बैंक रहा है। पार्टी को जीत मिली तो आगे बड़ा फायदा होगा।
कांग्रेस की जाट वोट काटने के लिए ऐसा दांव खेल सकती है।
1.69 लाख मेंे करीब 50 हजार जाट वोटर
जींद के करीब 1.69 लाख वोटरों में करीब 50 हजार वोटर जाट हैं। हरियाणा बनने के बाद 51 साल में यहां साढ़े 30 साल पंजाबी व वैश्य समुदाय, 5 साल जाट, 5 साल बीसी समुदाय के विधायक रहे।
इनेलो : कर्ण या रेढू इसलिए उतर सकते हैं
बलजीत सिंह रेढू लक्ष्य डेयरी के मालिक हैं। शहर में अच्छी पकड़ है। इनेलो इनके नाम पर विचार कर रही है।
जींद इनेलो का गढ़ रहा है। अभय अपने बेटे कर्ण को राजनीति में उतार सकते हैं, क्योंकि आने वाले चुनावों में कर्ण पर बड़ी जिम्मेदारी होगी।
रणदीप जीते तो कैथल में हो सकता है उपचुनाव
सुरजेवाला चुनाव जीते तो एक सीट छोड़नी होगी। किसी सदस्य के इस्तीफा देने पर सीट 6 महीने से अधिक खाली नहीं रखी जा सकती। विधानसभा का कार्यकाल अक्टूबर के तीसरे सप्ताह तक है। ऐसे में कैथल में उपचुनाव संभव है।

 
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