Thursday, January 17, 2019
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National

वर्ष 2018 का अन्तिम सप्ताह

December 24, 2018 04:49 PM

समय निरन्तर अबाधगति से चलता रहता है, हम समय को गुजार रहे हैं या समय में हम गुजर रहे हैं । यह अबूझ पहेली है । वर्ष, महीने, दिन सब गुजर रहे हैं, जीवन रेत की तरह मुट्ठी से फिसलता रहता हैं । राजनैतिक परिदृश्य हो या सामाजिक सरोकार, सब समय की परिधि में ही मूल्यांकित किये जा सकते हैं व समझे जा सकते हैं । मानव ने अपनी सुविधा के लिए तथा अपनी बुद्वि की सीमाओं को समझते हुए समय को तथा क्रियाकलापों को भिन्न खांचों में अर्थात टुकड़ों में बांटा है । जैसे 2018 का अन्तिम सप्ताह या 2019 का पहला सप्ताह? एक अतीत का हिस्सा हो जाएगा तो दूसरा भविष्य की कोख में पल रहा वर्तमान-पुराने प्रश्नों के साथ नये रूप में हमारे सामने होगा । राजनैतिक विशेषज्ञ, राजनीति में सालभर हुई उठक बैठक का हिसाब लगा, 2019 में होने वाले चुनावी कुंभ में क्या होले वाला है, इसका अनुमान लगायेंगे । वहीं अर्थशास्त्री, बैंकरस व वित्तीय विशेषज्ञ सैंसेक्स तथा निफटी के उतार चड़ाव, अर्थव्यवस्था के आगे बढने व उसकी गति के बारे में अपनी सोच व दृष्टिकोण के बारे में लिखेंगे, टी वी पर चर्चा करेंगे । मीडिया चाहे वह मास मीडिया हो या सोशल मीडिया भी 2018 कसे अनविदा कहने तथा 2019 का स्वागत करने में इस सप्ताह मशगूल हो जाएगा । बड़ी-बड़ी कम्पनियों में काम करने वाले, बड़े बड़े वित्तीय पैकेज पाने वाले तो सब पहले ही छुटिटयां मनाने देश व विदेश में आर्कषक पर्यटक स्थलों पर पहुंच गये होगें तथा अन्तिम सप्ताह मौज मस्ती में मनायेंगे । बाजार अपनी पूरी ताकत के साथ सेल्ज व डिस्काउंट के साथ, ग्राहकों को लुभाने तथा उन्हें जो आवश्यक नहीं हैं उसे भी खरीदने के लिए लालायित कर लोगों को अपनी गिरफत में लपेटे रखेगा ।

प्रश्न समस्याओं का व चुनौतियों का हैं क्या वे समय के साथ अर्थात 2018 से 2019 में जाने से बदल जायेगी । नहीं लेकिन आने वाला समय आपको निरंतरता का आभास भी देता है तो कुछ नये सिरे से करने का आमंत्रण भी देता ळे । कालचक्र के हिसाब से हर चीज पुरानी हो रही है, पुरानी करनी नहीं होती, वह सहज ही हो जाती है, नयी करनी पड़ती है, शायद इसीलिए ही जीवन में नये का, नवीनता का महत्व है । यह अन्तिम सप्ताह पीछे मुड़ कर देखने का है वैसे तो कहते हैं ’’मुड़-मुड़े के न देख आगे देखने वाले ही, तेज चल सकते हैं, विकास की गति पकड़ सकते हैं । पर जहां मोड़ आता हो वहां रूप् का देखना जरूरी है कि जिस दिशा में हमज ा रहे हैं वह सही है या गल्त, उध्र्वगामी है या अधोगामी । वर्ष 2018 का अन्तिम सप्ताह भी शायद यही हमसे कह रहा है कि रूको, ठहरो, संभलों जरा विचार करों, बीते साल को खंगालों जोकि शीघ्र ही इतिहास का हिस्सा बनने वाला है, उसमें क्या पाया, क्या खोया । वैयक्तिक स्तर पर ’’ समाजिक स्तर पर, राजनैतिक स्तर पर, सांस्कृतिक स्तर पर अपने देष की दृष्टि से व विश्व की दृष्टि से सोचने, समझने विश्लैष्ण करने तथा मूल्यांकित करने का मौका है इस वर्ष का अन्तिम सप्ताह । क्योंकि भविष्य जन्म लेता है, वर्तमान की कोख से, पर उसके बीज तो भूतकाल अर्थात अतीत में डाले जाते हैं । घटनाएं, दुर्घटनाएं समय के पटल पर अपनी छाप छोड़ती रहती हैं । मौसम बदलते हैं दिन बदलते हैं, मुकद्र बदलता है, समय बदलता है तो सब कुछ बदलता है, इस अर्थ में वर्ष 2018 का अन्तिम सप्ताह भी हमें समय के साथ बदलने की ताकीद कर रहा है कि देखों 2018 जा रहा है । सूखे पत्तों की तरह उड़ रहे हैं बीते दिन । अंत में ’’ जिंदगी क्या है कुछे लम्हों की उदार है, जिंदगी कभी धूप तो कभी छांव है जिंदगी, जिस भी रंग में चाहों रंग लो जिंदगी को, हसीन बना लो जिंदगी को, ईश्वर की सौगात है जिंदगी ।


                                                                               डा0क0 कली

 
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