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सुप्रीम कोर्ट : कार्यकारी मजिस्ट्रेट एफ.आई.आर. दर्ज करने बाबत नहीं दे सकता पुलिस को निर्देश

December 14, 2018 08:24 PM

विकेश शर्मा

चंडीगढ़- गत 13 दिसम्बर को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए एक आदेश में यह स्पष्ट किया गया है की मोजूदा कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत किसी भी कार्यकारी मजिस्ट्रेट के पास  पुलिस को सी.आर.पी.सी. की धारा 156(3) के तहत किसी मामले में जांच करने हेतु एफ.आई.आर. दर्ज करने के निर्देश देने की कोई शक्ति प्राप्त नहीं है. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत ने कहा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की खंडपीठ जिसमे जस्टिस  आर.एफ. नरीमन एवं जस्टिस नवीन सिन्हा सम्मिलित थे  ने गत गुरूवार को “नमन प्रताप सिंह बनाम उत्तर प्रदेश सरकार” नामक केस में  आदेश देते हुए  एस.डी.एम. उन्नाव द्वारा उनके समक्ष दायर हुई एक  शिकायत की सुनवाई करते हुए स्थानीय पुलिस को निर्देश देकर आई.पी.सी. की धाराओ420, 406,467, 468, 471, 504,506 एवं  34 के अंतर्गत जो एफ.आई.आर. दर्ज की गयी  थी, उसे इसी आधार पर खारिज करने का आदेश दिया है. हेमंत ने आगे बताया कि सी.आर.पी.सी. की धारा 156(3), जिसके अंतर्गत मजिस्ट्रेट पुलिस को एफ.आई.आर. दर्ज करने का निर्देश दे सकता है, वहां हालाकि मजिस्ट्रेट का कार्यकारी अथवा जुडिशल (न्यायिक) नहीं बताया गया है परन्तु यह अवश्य स्पष्ट है कि ऐसा मजिस्ट्रेट जिसे धारा 190  के तहत अधिकृत किया गया हो. अब इस धारा के तहत सम्बंधित राज्य की हाई कोर्ट द्वारा केवल जुडिशल (न्यायिक) मजिस्ट्रेट को ही इस बाबत एक गजट अधिसूचना जारी कर अधिकृत किया जाता है, कार्यकारी मजिस्ट्रेट को नहीं. क्या जिले में तैनात कार्यकारी मजिस्ट्रेट जैसे डी.सी. (उपायुक्त), ए.डी.सी. (अतिरिक्त उपायुक्त), एस.डी.एम. (उप-मंडलाधीश) आदि नियमित कार्यकारी मजिस्ट्रेट (दंडाधिकारी) एवं सिटी मजिस्ट्रेट, तहसीलदार, नायब तहसीलदार आदि जिले के अन्य आला अधिकारी जिन्हें राज्य सरकार द्वारा दंड प्रक्रिया संहिता (सी.आर.पी.सी ),1973  की प्रासंगिक धाराओ के तहत विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के तौर पर  नियुक्त किया जाता है, अपने समक्ष आये किसी मामले की सुनवाई करते हुए सम्बंधित पुलिस अधिकारी जैसे थाना या चौकी प्रभारी को उस केस में एफ.आई.आर. दर्ज करने बाबत निर्देश दे सकते हैं ? इसका उत्तर है नहीं.  गौरतलब है कि एडवोकेट हेमन्त द्वारा एक वर्ष पूर्व हरियाणा के सभी 22  जिलो  के किसी भी उपायुक्त(डी.सी.) को सी.आर.पी.सी की धारा20(1) के तहत आधिकारिक तौर पर जिला मजिस्ट्रेट (डी.एम.) एवं कार्यकारी मजिस्ट्रेट नियुक्त किये जाने बाबत आज तक राज्य सरकार द्वारा कोई अधिसूचना जारी नहीं किये जाने के मुद्दे को राज्य सरकार के उच्च स्तरीय अधिकारियों के लेवल पर उठाने के बाद अब जल्द भी  हरियाणा सरकार का न्याय प्रशासन विभाग वांछित अधिसूचना जारी करने वाला है एवं इतना ही नहीं आज तक राज्य के सभी डी.सी. द्वारा डी.एम. के तौर पर प्रयोग की गयी शक्तियों एवं पास किये गए आदेशो को कानूनी मान्यता देने बाबत भी एक कानून पारित करने की कवायद प्रारंभ हो रखी है.

 
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