Monday, December 10, 2018
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Chandigarh

परिस्थिति में अपने बच्चांे को शिक्षित करें और एकता से रहना सिखाएं:सत्यदेव नारायण आर्य

December 06, 2018 03:29 PM
हरियाणा के राज्यपाल श्री सत्यदेव नारायण आर्य ने समाज के गरीब, दबे-कुचले लोगों का आहवान किया कि वें हर परिस्थिति में अपने बच्चांे को शिक्षित करें और एकता से रहना सिखाएं। यही संविधान निर्माता भारतरत्न बाबा साहेब डा0 भीम राव अम्बेडकर को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। श्री आर्य आज पंजाब युनिवर्सिटी चण्डीगढ़ के गोल्डन जुबली हाॅल में डा0 भीम राव अम्बेडकर के 63वें महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय सम्मेलन में बोल रहे थे। यह सम्मेलन पंजाब युनिवर्सिटी के डा0 भीम राव अम्बेडकर सैंटर द्वारा आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में राज्यपाल     श्री आर्य ने संविधान निर्माता डा0 भीम राव अम्बेडकर से जुड़े कार्यक्रम पूरे साल तक आयोजित करने के लिए पांच लाख रूपए देने की भी घोषणा की।
उन्होने अपने सम्बोधन में कहा कि समाज के सभी वर्गों के लोगों को बाबा साहेब के जीवन दर्शन से प्रेरणा लेनी होगी। उन्होने शिक्षा, संघर्ष और संगठन का जो सूत्र दिया था, वह राष्ट्र की प्रगति और एकता के लिए बहुत जरूरी है। संगठन और संघर्ष में शक्ति होती है। उन्होने कहा कि सबका साथ-सबका विकास का विचार संविधान में डा0 भीम राव अम्बेडकर की देन है। आज उसी विचार को देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी आगे बढ़ा रहे है। 
राज्यपाल श्री आर्य ने कहा कि बाबा साहेब ने संविधान में समतामूलक समाज की व्यवस्था की और सबको आगेे बढ़ने का अवसर प्राप्त हो। इसलिए उन्होने गरीब, दलितों और पिछड़ों के लिए सरकारी नौकरियों में और राजनैतिक व्यवस्था में आरक्षण का प्रावधान किया। संविधान में आरक्षण की व्यवस्था से ही गरीब वर्ग के लोगों के जीवन में नई रोशनी आई है। 
उन्होने डा0 भीम राव अम्बेडकर को एक सच्चा राष्ट्रवादी बताते हुए कहा कि आजादी के समय भारत के तीन टुकड़े होने से बचाया और इसके बाद संविधान की रचना की जिम्मेवारी उनके कंधों पर आई। उन्होने देश को विस्तृत संविधान दिया। संविधान तैयार करने के लिए डा0 भीम राव अम्बेडकर ने निरंतर 21-21 घंटे मेहनत की और लगभग तीन वर्ष में संविधान लिख डाला।
श्री आर्य ने कहा कि बाबा साहेब डा0 भीम राव अम्बेडकर कर्म, संघर्ष और विश्वास की त्रिमुर्ति थे। उन्होने विकट परिस्थितियों में जीवन व्यतीत कर उच्च शिक्षा ग्रहण की और दुनिया के महान विद्वान कहलाए। आज भी पूरी दुनिया में किसी ने डा0 भीम राव अम्बेडकर के बराबर शिक्षा ग्रहण नही की। उन्होने आहवान किया कि प्रत्येक व्यक्ति को संविधान निर्माता डा0 भीम राव अम्बेडकर के जीवन से सीख लेने की आवश्यकता है। उनके बताए मार्ग पर चलकर ही सभी को शिक्षित और संगठित हो कर संघर्ष करना होगा, तभी देश व समाज आगे बढ़ सकता है।
पंजाब युनिवर्सिटी चण्डीगढ़ के कुलपति प्रो0 राज कुमार ने डा0 भीम राव अम्बेडकर को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि बाबा साहेब एक गज़ब के प्रबंधक थे, उनके जीवन से हम सबको जीवन प्रबंधन, संगठन और प्रशासनिक प्रक्रिया भी सिखनी होगी। उन्होने कहा कि बाबा साहेब ने देश में भूमि सुधार और रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया के गठन का जो कार्य किया है उससे देश निरंतर तरक्की कर रहा है। 
इस राष्ट्रीय सम्मेलन में पंजाब युनिवर्सिटी के डा0 भीम राव अम्बेडकर सैंटर के समन्वयक देवेन्द्र सिंह ने अपने विचार रखे और कहा कि डा0 भीम राव अम्बेडकर के बिना भारतीय संविधान की कल्पना तक भी असंभव थी। संविधान में सामाजिक, प्रजातंत्र का प्रावधान किया जो आज भी प्रासंगिक है। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के सभी विभागीय अध्यक्ष, प्रो0 और विद्यार्थी उपस्थित थे। 
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