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अफसरशाही का कमाल : हरियाणा में भूमि अधिग्रहण कानून, 2013 पूरी तरह से नजरअंदाज

December 05, 2018 12:21 PM

चंडीगढ़ -  हालाकि भारतीय संसद द्वारा बनाये गए भूमि अधि‍ग्रहण में उचि‍त मुआवजा एवं पारदर्शि‍ता का अधि‍कार,सुधार तथा पुनर्वास अधि‍नि‍यम, 2013   जिसे आम भाषा में नया भूमि अधिग्रहण कानून के नाम से भी जाना जाता है आज से पांच वर्ष पूर्व 1जनवरी, 2014 से सम्पूर्ण देश में लागू हो गया था परन्तु अफसरशाही की उदासीनता के चलते ही हरियाणा सरकार के  कार्मिक विभाग द्वारा जारी  प्रासंगिक अधिसूचनाओ में राज्य सिविल सेवा (एच.सी.एस.) अधिकारियों जो उप-मंडल अधिकारी (नागरिक) अथवा सिटी मजिस्ट्रेट आदि के रूप में कार्य कर रहे हैं। उन्हें  अपने अधिकार-क्षेत्र में पुराने एवं अब निरसित (समाप्त) कर दिए गये भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 के प्रावधान के तहत ही कलेक्टर के तौर पर नियुक्त जा  रहा है न की नए एवं अब लागू हो चुके कानून के अंतर्गत।  पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार  ने बताया कि जब उन्होंने गत दिनों हरियाणा के पिछले पांच वर्ष के राजपत्रो (सरकारी गजटो) को खंगाल कर उनका गहन अवलोकन किया, तो उन्हें अत्यंत हैरानी हुई क्योंकि आज तक हरियाणा सरकार का कार्मिक विभाग पुराने एवं अब निरसित हो चुके भूमि अधिग्रहण अधिनियम,1894  की धारा 3(C)  के तहत ही उक्त अधिकारियों को कलेक्टर के तौर पर नियुक्त करने सम्बन्धी अधिसूचना जारी करता  रहा है हालाकि अब कानूनी रूप से हरियाणा सरकार को भूमि अधि‍ग्रहण में उचि‍त मुआवजा एवं पारदर्शि‍ता का अधि‍कार, सुधार तथा पुनर्वास अधि‍नि‍यम, 2013  की धारा 3(G)  में उपयुक्त अधिकारियों को कलेक्टर के तौर पर पदांकित/नियुक्त करना चाहिए। एडवोकेट हेमंत ने आज इस सम्बन्ध में महामहिम राज्यपाल हरियाणा, प्रदेश के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व विभाग) आदि को ईमेल मार्फ़त पत्र याचिकाए भेजकर इस मामले में त्वरित संज्ञान लेकर उचित कार्यवाही करने की मांग की है।

 
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