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कुरुक्षेत्र में 3 से 7 दिसम्बर, 2018 तक चलने वाले कुरुक्षेत्र कुंभ 2018 के दौरान 4,5 और 6 दिसम्बर को ‘सांस्कृतिक भारत का गौरव: द्वादश कुंभ एवं धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र’ के तहत राष्टï्रीय संगोष्ठïी का आयोजन किया जाएगा

December 03, 2018 04:01 PM
 कुरुक्षेत्र में 3 से 7 दिसम्बर, 2018 तक चलने वाले कुरुक्षेत्र कुंभ 2018 के दौरान 4,5 और 6 दिसम्बर को ‘सांस्कृतिक भारत का गौरव: द्वादश कुंभ एवं धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र’ के तहत राष्टï्रीय संगोष्ठïी का आयोजन किया जाएगा। 
कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के एक प्रवक्ता ने आज यह जानकारी देते हुए बताया कि 4 दिसम्बर को ‘द्वादश कुंभ: अवधारणा और आवश्यकता, 5 दिसम्बर को सांस्कृतिक पुनर्जागरण और भारत तथा 6 दिसम्बर को गीता और कुरुक्षेत्र का महत्व’, विषयों पर संगोष्ठïी आयोजित की जाएगी। इन संगोष्ठिïयों का आयोजन कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में प्रात: 10 बजे से सांय 5 बजे तक किया जाएगा। 
प्रमाणों से स्पष्टï है कि हमारे अध्यात्मिक देश में कभी 12 स्थानों पर कुभ की परम्परा रही है। इसी कड़ी में 2018 में अग्रहायण (मार्गशीर्ष) मास में 5,6 व 7 दिसम्बर को दुर्लभ कुंभ योग बन रहा है। इसी पावन काल में कुरुक्षेत्र में कुंभ लग रहा है। 
उल्लेखनीय है कि सरस्वती नदी के पावन तट पर स्थित कुरुक्षेत्र की सात वन, नौ नदियों और पांच कूपों से सुसज्जित 48 कोस की भूमि ऋषियों, मुनियों तथा देवाताओं की तपस्थली, कर्मभूमि और यज्ञ भूमि के रूप में विख्यात है। मां सरस्वती के तट पर स्थित इस धर्मभूमि में कभी कल्पवास की प्रथा थी जिसके अंतर्गत प्रति वर्ष पुनीत अग्रहायण (मार्गशीर्ष) मास में कल्पवास लगता था। अग्रहायण मास को साक्षात गीता गंगा प्रवाहित करने वाले भगवान श्री कृष्ण का रूप ही कहा गया है।  साथ ही प्रत्येक 12 वर्ष में वृश्चिक राशि पर सूर्य, चन्द्रमा और बृहस्पति के आने से दुर्लभ महाकुंभ योग की भी परम्परा थी। इस मौके पर देश-देशांतर के धर्म गुरु, पुण्यात्मावृंद पधार कर विश्व-ब्रह्मïाण्ड के कल्याण के लिए चिंतन किया करते थे। इस संस्कृति की पूर्व उत्तर वैदिक काल के साथ-साथ पौराणिक काल तक अनंत महिमा रही है। 
गौरतलब है कि कुरुक्षेत्र में 7 दिसम्बर से 23 दिसम्बर, 2018 तक आयोजित किये जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-2018 में गुजरात भागीदार राज्य और मॉरीशस भागीदर देश के रूप में शिरकत करेगा। 
 
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